1st Bihar Published by: First Bihar Updated Wed, 07 Jan 2026 01:31:20 PM IST
Vijay Kumar Sinha - फ़ोटो REPORTER
Vijay Kumar Sinha : बिहार में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है और विभागीय मामलों में सुधार के लिए कड़ा दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है। इसी कड़ी में आज विभागीय मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विभाग के वर्तमान हालात, सुधार प्रक्रिया और भविष्य की रणनीति को लेकर महत्वपूर्ण बातें कही।
मंत्री ने कहा कि विभाग सुधार की प्रक्रिया को धीरे-धीरे और सतर्क तरीके से लागू कर रहा है। उन्होंने इसका उदाहरण देते हुए कहा कि हम होम्योपैथिक इलाज करते हैं और देसी इलाज पर भरोसा रखते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर एलोपैथिक व्यवस्था और ऑपरेशन भी उपलब्ध है। उनका यह बयान इस बात को दर्शाता है कि विभाग केवल औपचारिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि समस्या का स्थायी और संतुलित समाधान निकालना चाहता है।
विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया कि हम विभाग में “धीरे-धीरे डोज देने” की नीति अपना रहे है। उन्होंने कहा कि यदि हम सुधार को अचानक लागू करेंगे या अधिक दबाव डालेंगे, तो इससे अनर्थ या प्रतिकूल प्रतिक्रिया हो सकती है। इसलिए विभाग मामलों को छोटे-छोटे कदमों में सुधार रहा है, ताकि प्रक्रिया स्थिर और संतुलित रहे। उन्होंने इसे एक तरह से होम्योपैथिक उपचार से तुलना करते हुए बताया, जिसमें एक ही बार में ज्यादा दवाई नहीं दी जाती बल्कि थोड़ी-थोड़ी मात्रा में धीरे-धीरे बीमारी को ठीक किया जाता है।
विभागीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल यह प्रक्रिया होम्योपैथिक तरीके से जारी है, यानी धीरे-धीरे और सतर्कता के साथ सुधार लागू किए जा रहे हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो विभाग ऑपरेशन और एलोपैथिक उपाय भी करेगा, ताकि किसी भी गंभीर समस्या का समय पर समाधान किया जा सके। उन्होंने अधिकारियों को 31 मार्च तक के लिए लक्ष्य और समयसीमा भी निर्धारित की है, ताकि सभी मामलों में तेजी और पारदर्शिता बनी रहे।
इस बैठक में अधिकारियों और कर्मचारियों को यह संदेश भी दिया गया कि विभागीय मामलों में लापरवाही, देरी या भ्रष्टाचार बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विभाग अब पुराने ढर्रे और ढील-ढाले तरीके से नहीं चलेगा, बल्कि सटीक और प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।
आपको बताते चलें कि, बिहार में इस वित्तीय वर्ष में भूमि सुधार और संबंधित जनसुविधाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। विभिन्न प्रकार के आवेदन और अभियान अब तेजी से निष्पादित हो रहे हैं, जिससे लोगों को उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान मिल रहा है। सबसे पहले सामान्य आवेदनों की बात करें तो इस वित्तीय वर्ष की शुरुआत में आवेदन निष्पादन दर 75.30 प्रतिशत थी, जो वर्तमान में बढ़कर 82 प्रतिशत हो गई है। इसके साथ ही लंबित मामलों की संख्या में 30,000 से अधिक की कमी आई है। यह सुधार प्रशासनिक प्रक्रिया में तेजी और पारदर्शिता का संकेत है।