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Bihar Ration Card : राशन कार्ड बनवाना हुआ मुश्किल! शादीशुदा महिलाओं के जाति प्रमाणपत्र ने रोकी हजारों फाइलें, गरीब परिवार परेशान

बिहार में विशेष राशन कार्ड अभियान के दौरान हजारों आवेदन शादीशुदा महिलाओं के जाति प्रमाणपत्र के अभाव में अटक गए हैं। जानिए पूरा मामला और प्रशासन की चुनौती।

Bihar Ration Card : राशन कार्ड बनवाना हुआ मुश्किल! शादीशुदा महिलाओं के जाति प्रमाणपत्र ने रोकी हजारों फाइलें, गरीब परिवार परेशान
Tejpratap
Tejpratap
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पटना: बिहार सरकार एक ओर विशेष अभियान चलाकर पात्र परिवारों तक तेजी से राशन कार्ड पहुंचाने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर एक प्रशासनिक पेचीदगी इस अभियान की रफ्तार पर ब्रेक लगा रही है। सबसे बड़ी समस्या विवाहित महिलाओं के जाति प्रमाणपत्र को लेकर सामने आई है। नियमों के अनुसार महिलाओं का जाति प्रमाणपत्र उनके मायके से जारी होता है, जबकि राशन कार्ड के लिए आवेदन ससुराल के पते से किया जा रहा है। इसी वजह से हजारों आवेदन अधूरे दस्तावेजों के कारण लंबित पड़े हैं।

गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए यह समस्या केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी खाद्यान्न योजना का लाभ मिलने में भी बड़ी बाधा बन गई है। रोज कमाने-खाने वाले परिवारों को बार-बार दूसरे प्रखंड, गांव या जिले के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है और मजदूरी का नुकसान भी हो रहा है।

आय और आवासीय प्रमाणपत्र आसानी से, लेकिन जाति प्रमाणपत्र बना मुश्किल

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार आय और आवासीय प्रमाणपत्र स्थानीय स्तर पर आसानी से बन जा रहे हैं, लेकिन जातीय प्रमाणपत्र के मामले में विवाहित महिलाओं को अपने मायके के संबंधित अंचल कार्यालय जाना पड़ता है। कई मामलों में मायका दूसरे जिले या काफी दूर होने के कारण महिलाओं के लिए दस्तावेज जुटाना कठिन हो रहा है।यही कारण है कि विशेष राशन कार्ड अभियान के दौरान बड़ी संख्या में आवेदन सत्यापन के बावजूद स्वीकृत नहीं हो पा रहे हैं। इससे अभियान की गति भी प्रभावित हो रही है।

सारण जिले में सबसे ज्यादा असर

इस समस्या का सबसे बड़ा उदाहरण सारण जिला बनकर सामने आया है। यहां 13 अगस्त तक 49,455 नए राशन कार्ड बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। लेकिन अभियान के दौरान लोगों की भारी भागीदारी के कारण 2 अगस्त तक ही 57,549 आवेदन प्राप्त हो गए। इनमें से 52,007 आवेदनों का सत्यापन पूरा कर लिया गया है, जबकि 5,602 आवेदन अब भी लंबित हैं। अधिकारियों का कहना है कि इनमें करीब 5,000 आवेदन केवल विवाहित महिलाओं के जातीय प्रमाणपत्र नहीं होने की वजह से अटके हुए हैं।

आवेदन की रफ्तार तेज, लेकिन दस्तावेजों ने रोकी प्रक्रिया

विशेष अभियान के दौरान लोगों ने बड़ी संख्या में आवेदन किए। आंकड़ों के अनुसार 31 जुलाई को एक ही दिन में 6,211 आवेदन, 1 अगस्त को 2,318 आवेदन और 2 अगस्त को 726 आवेदन प्राप्त हुए। हालांकि आवेदन मिलने की गति उत्साहजनक रही, लेकिन आवश्यक दस्तावेज पूरे नहीं होने के कारण कई फाइलें आगे नहीं बढ़ सकीं। इससे पात्र परिवारों को राशन कार्ड मिलने में देरी हो रही है।

गरीब परिवारों पर बढ़ा आर्थिक बोझ

इस पूरी प्रक्रिया का सबसे अधिक असर गरीब और मजदूर परिवारों पर पड़ रहा है। कई महिलाओं को जातीय प्रमाणपत्र बनवाने के लिए मायके तक कई बार यात्रा करनी पड़ रही है। इससे यात्रा खर्च के साथ-साथ दैनिक मजदूरी का भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों का कहना है कि यदि जातीय प्रमाणपत्र की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए या प्रशासन कोई वैकल्पिक व्यवस्था करे, तो हजारों परिवारों को राहत मिल सकती है।

प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

अब जिला प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती लंबित आवेदनों का जल्द निपटारा करना और अधूरे दस्तावेजों को समय पर पूरा कराना है। यदि जातीय प्रमाणपत्र से जुड़ी इस व्यावहारिक समस्या का समाधान नहीं निकाला गया, तो हजारों पात्र परिवार तय समय सीमा के भीतर राशन कार्ड से वंचित रह सकते हैं।

सरकारी खाद्यान्न योजना का लाभ जरूरतमंद लोगों तक समय पर पहुंचे, इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर व्यावहारिक और सरल व्यवस्था बनाने की मांग भी तेज हो रही है। फिलहाल राशन कार्ड अभियान जारी है, लेकिन विवाहित महिलाओं के जाति प्रमाणपत्र का मुद्दा पूरे अभियान की सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।