Bihar ration card : बिहार में राशन कार्डधारियों पर सख्ती, 15 हजार से अधिक लाभुकों का कटेगा नाम; जानिए क्या रही वजह

बिहार में जन वितरण प्रणाली को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन ने अपात्र राशन कार्डधारियों के खिलाफ सख्त अभियान शुरू कर दिया है। आपूर्ति विभाग द्वारा किए जा रहे डाटा सत्यापन और विभिन्न सरकारी योजनाओं के रिकॉर्ड के मिलान के दौरान बड़ी संख्या म

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sat, 10 Jan 2026 08:24:54 AM IST

Bihar ration card : बिहार में राशन कार्डधारियों पर सख्ती, 15 हजार से अधिक लाभुकों का कटेगा नाम; जानिए क्या रही वजह

- फ़ोटो

Bihar ration card : बिहार में जन वितरण प्रणाली (PDS) को पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। इसी क्रम में एक अहम समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में आपूर्ति विभाग से जुड़े सभी पदाधिकारी एवं कर्मी शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य राशन वितरण व्यवस्था में व्याप्त गड़बड़ियों की पहचान करना और यह सुनिश्चित करना था कि सरकारी अनाज का लाभ केवल पात्र लाभुकों तक ही पहुंचे।


अनुमंडल पदाधिकारी ने बैठक में जानकारी दी कि विभागीय स्तर पर संदिग्ध राशन कार्डधारियों की गहन जांच की जा रही है। विभिन्न सरकारी योजनाओं और उपलब्ध डाटाबेस से प्राप्त आंकड़ों का मिलान करने पर यह सामने आया है कि बड़ी संख्या में ऐसे लाभुक राशन कार्ड का लाभ ले रहे हैं, जो निर्धारित मानकों के अनुसार इसके लिए पात्र नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अपात्र लोगों द्वारा सरकारी योजनाओं का लाभ लेना न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि इससे वास्तव में जरूरतमंद परिवारों का हक भी मारा जा रहा है।


जांच के दौरान यह पाया गया है कि लगभग 5000 से अधिक ऐसे लाभुक हैं, जिनकी वार्षिक आय राशन कार्ड के लिए निर्धारित मान्य आय सीमा से अधिक है, इसके बावजूद वे सस्ते दर पर राशन प्राप्त कर रहे हैं। इसी तरह करीब 9000 से अधिक ऐसे राशन कार्डधारी सामने आए हैं, जिनके पास कई एकड़ से अधिक भूमि है और वे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ भी ले रहे हैं, फिर भी जन वितरण प्रणाली से अनाज उठा रहे हैं।


इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया है कि 471 ऐसे लाभुक हैं, जिनके पास चार पहिया वाहन मौजूद है। नियमों के अनुसार चार पहिया वाहन रखने वाले परिवार आमतौर पर राशन कार्ड के पात्र नहीं माने जाते, इसके बावजूद ये लोग वर्षों से सरकारी राशन का लाभ ले रहे हैं। इतना ही नहीं, 216 ऐसे लाभुक भी चिन्हित किए गए हैं, जो किसी न किसी निजी कंपनी में डायरेक्टर या उच्च पद पर कार्यरत हैं और आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद राशन कार्ड का उपयोग कर रहे हैं।


सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि 24 ऐसे व्यक्ति भी पाए गए हैं, जिनका जीएसटी टर्नओवर 25 लाख रुपये से अधिक है। इतना अधिक कारोबार होने के बावजूद ये लोग भी सरकारी राशन योजना के अंतर्गत लाभ ले रहे हैं, जो पूरी तरह से नियमों का उल्लंघन है। इन सभी श्रेणियों को मिलाकर अब तक 15 हजार से अधिक जन वितरण प्रणाली के राशन कार्डधारियों को संदिग्ध उपभोक्ताओं की श्रेणी में चिन्हित किया गया है।


अनुमंडल पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि इन सभी संदिग्ध लाभुकों की जांच प्रक्रिया जारी है और जांच पूरी होने के बाद अपात्र पाए जाने वाले लोगों के राशन कार्ड रद्द किए जाएंगे। इसके साथ ही यदि यह पाया गया कि इन लोगों ने लंबे समय से सरकारी अनाज का अनुचित लाभ उठाया है, तो उनसे अनाज की वसूली भी की जा सकती है। प्रशासन का मानना है कि इस कार्रवाई से राशन वितरण प्रणाली में सुधार आएगा और जरूरतमंद लोगों को समय पर और पूरा राशन मिल सकेगा।


बैठक में सभी प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे जल्द से जल्द जांच की प्रक्रिया को पूरा करें, ताकि अपात्र लोगों को चिन्हित कर उनका राशन कार्ड रद्द किया जा सके। साथ ही यह भी कहा गया कि सरकारी नौकरी करने वाले, पक्का मकान रखने वाले और आर्थिक रूप से संपन्न परिवारों की भी विशेष रूप से जांच की जाए, क्योंकि ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां सक्षम लोग भी राशन कार्ड का लाभ उठा रहे हैं।


अनुमंडल पदाधिकारी ने अपात्र लाभुकों से अपील की कि वे स्वयं आगे आकर अपना राशन कार्ड सरेंडर कर दें। उन्होंने कहा कि स्वेच्छा से कार्ड जमा करने वालों के प्रति प्रशासन नरमी बरत सकता है, जबकि जांच में पकड़े जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही सभी आपूर्ति पदाधिकारियों को यह निर्देश भी दिया गया कि वे उपभोक्ताओं को जल्द से जल्द ई-केवाईसी कराने के लिए प्रेरित करें।


उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि जिन लाभुकों द्वारा ई-केवाईसी नहीं कराई जाएगी, उनका राशन बंद किया जा सकता है। बैठक में सहायक जिला आपूर्ति पदाधिकारी, सभी प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी तथा आपूर्ति विभाग से जुड़े अन्य अधिकारी और कर्मी उपस्थित रहे। प्रशासन की इस सख्ती को बिहार में जन वितरण प्रणाली को दुरुस्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।