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Bihar Politics: प्रशांत किशोर पर दर्ज हुआ FIR, पटना पुलिस ने लगाया यह आरोप

Bihar Politics: पटना में जन सुराज के प्रदर्शन के दौरान प्रशांत किशोर और 300 अज्ञात लोगों पर FIR दर्ज। पुलिस ने लाठीचार्ज कर रोका, किशोर ने नीतीश सरकार पर साधा निशाना। बिहार चुनाव 2025 से पहले भारी बवाल।

Bihar Politics
प्रशांत किशोर पर FIR
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Deepak Kumar
Deepak Kumar
4 मिनट

Bihar Politics: पटना में 23 जुलाई को जन सुराज अभियान के संयोजक प्रशांत किशोर और उनके समर्थकों पर बिहार विधानसभा के पास प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रदर्शन करने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के प्रयास के आरोप में FIR दर्ज की गई है। सिटी एसपी सेंट्रल दीक्षा ने बताया है कि मजिस्ट्रेट के बयान के आधार पर सचिवालय थाना में प्रशांत किशोर सहित 300 अज्ञात लोगों के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है। यह घटना बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान हुई जब किशोर ने जन सुराज के तहत विधानसभा घेराव का आह्वान किया था।


प्रशांत किशोर के नेतृत्व में जन सुराज के कार्यकर्ता और समर्थक बिहार में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और भू-सर्वेक्षण में कथित भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को लेकर विधानसभा का घेराव करने निकले थे। पुलिस ने चितकोहरा गोलंबर के पास बैरिकेड्स लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की। जब प्रदर्शनकारी बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़े तो स्थिति बिगड़ गई। पुलिस ने लाठीचार्ज और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया, जिसमें कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए। किशोर को भी पुलिस ने हिरासत में लिया लेकिन बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।


किशोर ने इस घटना को नीतीश कुमार सरकार के खिलाफ जनता की आवाज दबाने का प्रयास बताया है। उन्होंने कहा कि “यह सिर्फ शुरुआत है। अगर सरकार हमारी मांगों पर ध्यान नहीं देती तो अगली बार एक लाख लोग पटना की सड़कों पर होंगे।” उन्होंने सरकार पर जनता की मांगों को अनसुना करने का आरोप लगाया है और अपने अभियान को और तेज करने की चेतावनी दी है।


इधर पटना पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने बिना अनुमति के प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश की कोशिश की, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती थी। सिटी एसपी ने दावा किया कि न्यूनतम बल का उपयोग किया गया और प्रदर्शनकारियों को बार-बार चेतावनी दी गई थी। दूसरी ओर जन सुराज के समर्थकों का आरोप है कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और पुलिस ने बेवजह बल प्रयोग किया।


यह घटना बिहार की राजनीति में एक नए विवाद का कारण बन गई है। प्रशांत किशोर पहले नरेंद्र मोदी, नीतीश कुमार और ममता बनर्जी जैसे नेताओं के लिए चुनावी रणनीतिकार रहे, अब वह जन सुराज के जरिए बिहार में तीसरे राजनीतिक विकल्प के रूप में उभर रहे हैं। उनकी पार्टी ने 2024 के उपचुनावों में चार सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, हालांकि सभी हार गए। फिर भी किशोर की व्यापक जनसंपर्क रणनीति और 5,000 से अधिक गांवों में 3,000 किमी की पदयात्रा ने उन्हें जनता के बीच चर्चा का विषय बना दिया है।


किशोर ने नीतीश कुमार की सरकार को “नौकरशाही का जंगलराज” करार दिया है और लालू प्रसाद के शासन को “संगठित अपराध का जंगलराज” बताया। उनकी यह आक्रामक रणनीति और जन सुराज का मुद्दा-आधारित अभियान जैसे शिक्षा, रोजगार और शराबबंदी हटाने की मांग बिहार के युवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों में अच्छा समर्थन जुटा रहा है।

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