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Bihar Governor : जानिए भारत में किन-किन सैन्य अधिकारियों को बनाया गया राज्यपाल, बिहार में सैयद अता हसनैन नया नाम

भारत में कई बार सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों को राज्यपाल बनाया गया है। बिहार के नए राज्यपाल सैयद अता हसनैन भी भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं। जानिए किन-किन पूर्व सैनिकों को राज्यपाल बनाया गया।

Bihar Governor : जानिए भारत में किन-किन सैन्य अधिकारियों को बनाया गया राज्यपाल, बिहार में सैयद अता हसनैन नया नाम
Tejpratap
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Bihar Governor : भारत में कई बार ऐसा देखा गया है कि केंद्र सरकार राज्यों के राज्यपाल के रूप में सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों को नियुक्त करती रही है। खासकर भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी—जैसे जनरल या लेफ्टिनेंट जनरल—जिन्होंने लंबे समय तक देश की सुरक्षा और रणनीतिक मामलों में काम किया हो, उन्हें इस संवैधानिक पद की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। हाल ही में बिहार के नए राज्यपाल के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन की नियुक्ति भी इसी परंपरा की एक कड़ी मानी जा रही है।


दरअसल, सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के पास अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने का अनुभव होता है। यही कारण है कि सरकार कई बार उन्हें प्रशासनिक जिम्मेदारियों के लिए भी उपयुक्त मानती है। खासकर ऐसे राज्य जहां सुरक्षा या रणनीतिक महत्व अधिक होता है, वहां पूर्व सैन्य अधिकारियों को राज्यपाल बनाना एक सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा जाता है।


भारत में पहले भी कई पूर्व सैन्य अधिकारियों को राज्यपाल बनाया गया है। इनमें लेफ्टिनेंट जनरल एस. के. सिन्हा का नाम प्रमुख रूप से लिया जाता है। वह भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी रहे और बाद में उन्हें असम तथा जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील राज्यों का राज्यपाल बनाया गया। पूर्वोत्तर और कश्मीर जैसे क्षेत्रों में उनकी प्रशासनिक समझ और सुरक्षा मामलों की जानकारी को काफी अहम माना गया था।


इसी तरह जनरल जोगिंदर जसवंत सिंह भी भारतीय सेना के प्रमुख रह चुके हैं। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें अरुणाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया। अरुणाचल प्रदेश चीन सीमा से लगा हुआ राज्य है, इसलिए वहां एक अनुभवी सैन्य अधिकारी की नियुक्ति को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया।


पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल एस. एफ. रोड्रिग्स भी उन सैन्य अधिकारियों में शामिल हैं जिन्हें राज्यपाल की जिम्मेदारी दी गई। उन्हें पंजाब का राज्यपाल बनाया गया था और उन्होंने लगभग एक दशक तक इस पद पर कार्य किया। पंजाब उस समय सुरक्षा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण राज्य माना जाता था, ऐसे में उनके अनुभव का लाभ प्रशासन को मिला।


इसके अलावा कृष्ण कांत पॉल भी सेना में सेवा देने के बाद प्रशासनिक क्षेत्र में सक्रिय हुए। बाद में उन्हें उत्तराखंड और मेघालय का राज्यपाल बनाया गया। उनका अनुभव भी राज्यों के प्रशासनिक संचालन में उपयोगी माना गया।


हालांकि सभी सैन्य अधिकारी राज्यपाल नहीं बने, लेकिन कई अधिकारियों ने राजनीति और शासन में भी अहम भूमिका निभाई। इसका एक प्रमुख उदाहरण पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल वी. के. सिंह हैं। वह राज्यपाल नहीं बने, लेकिन बाद में सक्रिय राजनीति में आए और केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि सेना के वरिष्ठ अधिकारियों को शासन और नीति निर्माण में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जाती रही हैं।


इसी कड़ी में अब बिहार के नए राज्यपाल के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन का नाम जुड़ा है। वह भारतीय सेना के एक प्रतिष्ठित अधिकारी रहे हैं और रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ माने जाते हैं। जम्मू-कश्मीर में उन्होंने 15वीं कोर की कमान संभाली थी, जो सेना की सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील कोर में से एक मानी जाती है।


हसनैन अपने कार्यकाल के दौरान कश्मीर में “हार्ट्स एंड माइंड्स” यानी जनता के साथ संवाद और विश्वास बढ़ाने की रणनीति के लिए भी जाने जाते हैं। सैन्य अनुभव के साथ-साथ रणनीतिक सोच और प्रशासनिक समझ के कारण उन्हें बिहार जैसे बड़े राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी सौंपी गई है।


बहरहाल अब कहा यह जा रहा है कि पूर्व सैन्य अधिकारियों को राज्यपाल बनाने से प्रशासन में अनुशासन, तटस्थता और राष्ट्रीय दृष्टिकोण को मजबूती मिलती है। यही वजह है कि समय-समय पर केंद्र सरकार ऐसे अधिकारियों को राज्यों के संवैधानिक पदों पर नियुक्त करती रही है। बिहार में सैयद अता हसनैन की नियुक्ति भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाने के रूप में देखी जा रही है।