Bihar News : बिहार में सोशल मीडिया के बढ़ते दुरुपयोग पर लगाम लगाने के लिए बिहार पुलिस ने बड़ा अभियान चलाया है। साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई (CCSU) ने पिछले छह महीनों के दौरान फेक न्यूज, सांप्रदायिक तनाव फैलाने वाले पोस्ट, डीपफेक कंटेंट और महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध से जुड़े मामलों में व्यापक कार्रवाई की है। पुलिस का कहना है कि राज्य में सुरक्षित और जिम्मेदार डिजिटल माहौल बनाने के उद्देश्य से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की 24 घंटे निगरानी की जा रही है।
सीसीएसयू के आंकड़ों के अनुसार, बीते छह महीनों में विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को 692 लीगल नोटिस जारी किए गए। इसके अलावा 1320 आपत्तिजनक यूआरएल और पोस्ट हटवाए गए, जबकि 529 फर्जी और आपत्तिजनक सोशल मीडिया अकाउंट्स को निष्क्रिय कराया गया। इसी अवधि में साइबर अपराध से जुड़े 475 मामलों में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई और 103 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
बिहार पुलिस का यह अभियान 'ऑपरेशन प्रहार' के तहत लगातार चलाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से फैलने वाली अफवाहों, भ्रामक सूचनाओं और गैरकानूनी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए तकनीकी निगरानी और कानूनी कार्रवाई दोनों को समान रूप से प्राथमिकता दी जा रही है।
सीसीएसयू के आईजी रंजीत कुमार मिश्रा ने बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 24 घंटे और सप्ताह के सातों दिन निगरानी रखी जा रही है। इस दौरान महिलाओं और बालिकाओं के खिलाफ साइबर अपराध, फर्जी आईडी, एआई से तैयार किए गए डीपफेक वीडियो और फोटो, सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने वाले पोस्ट, सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाली सामग्री तथा अन्य गैरकानूनी गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जाती है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी पोस्ट या डिजिटल सामग्री के जरिए कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका होती है तो डिजिटल साक्ष्यों और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर संबंधित साइबर थानों के साथ समन्वय स्थापित कर तत्काल कार्रवाई की जाती है। ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 और अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत मुकदमा दर्ज किया जाता है।
पुलिस के अनुसार, संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों, न्यायपालिका और अन्य सार्वजनिक संस्थाओं के खिलाफ आपत्तिजनक या भ्रामक सामग्री साझा करने वाले मामलों में भी सख्त कार्रवाई की जा रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर समाज में भ्रम फैलाने या लोगों को उकसाने वाले तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
बिहार पुलिस ने आम लोगों से सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से उपयोग करने की अपील की है। आईजी रंजीत कुमार मिश्रा ने कहा कि सोशल मीडिया अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण माध्यम है, लेकिन इसका इस्तेमाल कानून के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने, सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने, अफवाह फैलाने या कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश करने वालों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हाल के वर्षों में कई आपराधिक और संगठित समूह सोशल मीडिया के जरिए अपना नेटवर्क बढ़ाने, भ्रामक प्रचार करने और लोगों को गुमराह करने की कोशिश करते हैं। कई मामलों में आम लोग बिना तथ्य जांचे ऐसी सामग्री साझा कर देते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है। इसी कारण साइबर निगरानी को और मजबूत किया गया है।
बिहार पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी पोस्ट, वीडियो या संदेश को साझा करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांचें। यदि सोशल मीडिया पर कोई संदिग्ध, भ्रामक या आपत्तिजनक सामग्री दिखाई दे तो उसकी सूचना तुरंत साइबर पुलिस या संबंधित अधिकारियों को दें। पुलिस का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म को सुरक्षित, जिम्मेदार और कानूनसम्मत बनाए रखने के लिए यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।





