Bihar Police Headquarters : बिहार में पुलिस अंचलों का होगा नया सीमांकन, इंस्पेक्टरों का घटेगा बोझ; अनुसंधान और कांड निष्पादन भी होगा तेज

बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली को मजबूत करने के लिए पुलिस अंचलों के पुनर्गठन की तैयारी शुरू हो गई है। इससे थाना स्तर पर लंबित कांडों के निष्पादन में तेजी आएगी और अनुसंधान व पर्यवेक्षण व्यवस्था पहले से अधिक प्रभावी होगी।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sun, 04 Jan 2026 07:55:13 AM IST

Bihar Police Headquarters : बिहार में पुलिस अंचलों का होगा नया सीमांकन, इंस्पेक्टरों का घटेगा बोझ; अनुसंधान और कांड निष्पादन भी होगा तेज

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Bihar Police Headquarters : बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी की जा रही है। राज्य में पुलिस अंचलों (Police Circles) के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसका मुख्य उद्देश्य थाना स्तर पर लंबित एवं निलंबित कांडों के निष्पादन में तेजी लाना, अनुसंधान की गुणवत्ता में सुधार करना और बेहतर पर्यवेक्षण व्यवस्था विकसित करना है।


इस प्रस्ताव को लेकर पुलिस मुख्यालय स्तर पर उच्चस्तरीय बैठक भी हो चुकी है। बैठक के बाद सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक (SP) और अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किन जिलों और क्षेत्रों में पुलिस अंचलों के पुनर्गठन की आवश्यकता सबसे अधिक है और वहां किस प्रकार का ढांचा विकसित किया जाना चाहिए।


दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में बिहार में पुलिस व्यवस्था का विस्तार तेजी से हुआ है। राज्य में अब 2800 से अधिक पुलिस थाने कार्यरत हैं। इसके साथ ही बड़ी संख्या में पुलिस आउट पोस्ट को भी पूर्ण थाने का दर्जा दिया गया है। इस विस्तार का सीधा असर पुलिस अंचलों पर पड़ा है। एक पुलिस सर्किल के अंतर्गत आने वाले थानों और क्षेत्रों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है, जिससे सर्किल इंस्पेक्टर पर कार्यभार अत्यधिक बढ़ गया है।


मौजूदा व्यवस्था में एक सर्किल इंस्पेक्टर को कई थानों की निगरानी करनी पड़ती है। इसके चलते न केवल निलंबित कांडों के निष्पादन में देरी हो रही है, बल्कि अनुसंधान की मॉनिटरिंग भी अपेक्षित स्तर पर नहीं हो पा रही है। कई मामलों में समय पर पर्यवेक्षण नहीं होने के कारण केस कमजोर पड़ जाते हैं, जिसका असर न्यायिक प्रक्रिया और अपराध नियंत्रण दोनों पर पड़ता है।


पुलिस मुख्यालय का मानना है कि अंचलों के पुनर्गठन से सर्किल इंस्पेक्टर के अधीन थानों की संख्या को संतुलित किया जा सकेगा। इससे हर थाना और कांड पर बेहतर निगरानी संभव होगी। साथ ही, लंबित मामलों की नियमित समीक्षा होने से उनके निष्पादन में तेजी आएगी और पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सकेगा।


सूत्रों के अनुसार, पुनर्गठन के तहत कुछ बड़े और अत्यधिक व्यस्त पुलिस अंचलों को विभाजित किया जा सकता है। वहीं, कम कार्यभार वाले क्षेत्रों में नए सिरे से सीमांकन किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक सर्किल इंस्पेक्टर के पास सीमित और प्रबंधनीय संख्या में थाने हों, ताकि वे प्रभावी ढंग से अनुसंधान पर्यवेक्षण और प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभा सकें।


पुलिस अंचलों के पुनर्गठन से फील्ड स्तर पर भी पुलिसिंग मजबूत होने की उम्मीद है। थानों पर दबाव कम होने से पुलिस अधिकारी अपराध की रोकथाम, गश्त और जनसंपर्क जैसे कार्यों पर अधिक ध्यान दे सकेंगे। इससे आम जनता में पुलिस के प्रति भरोसा भी बढ़ेगा।


विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम बिहार पुलिस के लिए समय की मांग है। राज्य में बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण और अपराध के बदलते स्वरूप को देखते हुए पुलिस संरचना में सुधार आवश्यक हो गया था। यदि यह पुनर्गठन सही योजना और संसाधनों के साथ लागू किया जाता है, तो इससे न केवल पुलिस की कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि कानून-व्यवस्था की स्थिति भी और मजबूत होगी।


फिलहाल सभी जिलों से रिपोर्ट मिलने का इंतजार किया जा रहा है। इसके बाद पुलिस मुख्यालय अंतिम प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेजेगा। मंजूरी मिलने के बाद चरणबद्ध तरीके से पुलिस अंचलों के पुनर्गठन की प्रक्रिया लागू की जाएगी। माना जा रहा है कि आने वाले समय में बिहार पुलिस की यह पहल राज्य की कानून-व्यवस्था को नई दिशा देगी।