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Bihar Police : 5 नए ग्रामीण एसपी पद सृजित, वीआईपी सुरक्षा पर एडीजी ने दी अहम जानकारी; जानिए क्या बोले

बिहार पुलिस ने प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव किया है। 5 नए ग्रामीण एसपी पद सृजित किए गए हैं, साथ ही साइबर क्राइम और अपराध नियंत्रण में बड़ी उपलब्धियां सामने आई हैं।

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Tejpratap
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Bihar Police :  पटना से एडीजी मुख्यालय सुनील कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिहार पुलिस से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए 5 नए ग्रामीण पुलिस अधीक्षक (Rural SP) के पद सृजित किए गए हैं। यह नई व्यवस्था पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर, मधुबनी, वैशाली और सिवान जिलों में लागू की जाएगी।


एडीजी मुख्यालय ने बताया कि इन पांच जिलों में पुलिस निरीक्षक, पुलिस अवर निरीक्षक, सिपाही और हवलदार सीधे नए ग्रामीण एसपी के अधीन काम करेंगे। वहीं जिलों के मूल एसपी कार्यों का बंटवारा करेंगे और अपने स्तर से स्वतंत्र रूप से भी कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालेंगे। उन्होंने कहा कि यह पहल पुलिस प्रशासन को अधिक प्रभावी और तेज बनाने के उद्देश्य से की गई है। इसे राज्य में बेहतर पुलिसिंग की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।


अपराध नियंत्रण में बड़ी उपलब्धि

एडीजी लॉ एंड ऑर्डर सुधांशु रंजन ने चार महीने की उपलब्धियों का विवरण साझा करते हुए बताया कि बिहार पुलिस ने गंभीर अपराधों पर सख्त कार्रवाई करते हुए दो मामलों में दोषियों को फांसी की सजा दिलाई है। इसके अलावा 400 से अधिक अपराधियों को उम्रकैद की सजा भी न्यायालय द्वारा दी गई है।


उन्होंने एक जघन्य हत्या मामले का उल्लेख करते हुए बताया कि बेगूसराय में एक आरोपी ने एक व्यक्ति के माता-पिता और बहन की गोली मारकर हत्या कर दी थी, जिसके दोषी को फांसी की सजा सुनाई गई है। दूसरे मामले में मेहंदिया थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी की हत्या कर उसके शव को कई टुकड़ों में काट दिया था, जिसमें भी आरोपी को कठोर सजा दिलाई गई है। एडीजी लॉ एंड ऑर्डर ने कहा कि बिहार पुलिस अपराधियों के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर काम कर रही है और जांच से लेकर सजा तक की प्रक्रिया को मजबूत किया गया है।


 साइबर अपराध पर कड़ी कार्रवाई

बिहार पुलिस साइबर सेल के आईजी रंजीत कुमार मिश्रा ने साइबर अपराध को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने लोगों से साइबर ठगी से सतर्क रहने की अपील की और बताया कि पिछले चार महीनों में साइबर सेल की कार्यप्रणाली में काफी सुधार हुआ है।


आईजी ने बताया कि साइबर हेल्पलाइन पर आने वाली कॉल्स की संख्या 5500 से बढ़कर 8100 से अधिक हो गई है, जिनमें रोजाना लगभग 430 शिकायतें दर्ज की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि “साइबर प्रहार 3.0” अभियान के तहत फर्जी अकाउंट और साइबर फ्रॉड नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।


अब तक लगभग 5000 फर्जी अकाउंट को फ्रीज किया जा चुका है। साइबर फ्रॉड से जुड़े मामलों में कुल 199.09 करोड़ रुपये की शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से 7.6 करोड़ रुपये की राशि रिकवर की जा चुकी है। इस उपलब्धि के साथ बिहार देश में साइबर फ्रॉड रिकवरी में चौथे स्थान पर पहुंच गया है।


 थाना स्तर पर हेल्प डेस्क को मजबूत करने के निर्देश

एडीजी मुख्यालय सुनील कुमार ने यह भी कहा कि सभी थानों में स्थापित हेल्प डेस्क को और अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाया जाएगा, ताकि आम जनता की शिकायतों का समय पर समाधान हो सके। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हेल्प डेस्क पर आने वाली हर शिकायत को गंभीरता से लिया जाए और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।


वीआईपी सुरक्षा पर बयान

माननीय व्यक्तियों की सुरक्षा में कटौती के सवाल पर एडीजी मुख्यालय ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े निर्णय संबंधित निर्देशों के अनुसार लिए जाते हैं और इन्हें सार्वजनिक रूप से विस्तार से साझा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जो भी निर्देश मिलते हैं, उनके अनुसार ही कार्रवाई की जाती है।


बिहार पुलिस द्वारा किए गए ये नए प्रशासनिक बदलाव, अपराध नियंत्रण की सख्ती और साइबर सुरक्षा में सुधार राज्य की कानून-व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। सरकार और पुलिस प्रशासन का दावा है कि आने वाले समय में इन प्रयासों का सकारात्मक असर जमीन पर और अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।