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PM Kisan Samman Nidhi : बिहार के किसानों के लिए बड़ी समस्या, पीएम-किसान सम्मान निधि की अगली किस्त से कई किसान वंचित; जानिए क्या है मुख्य वजह

PM Kisan Samman Nidhi : बिहार में पीएम-किसान सम्मान निधि योजना के तहत कई किसानों को अगली किस्त से लाभ नहीं मिल पाएगा। समस्या का मुख्य कारण है किसानों की फार्मर आईडी न बन पाना।

PM Kisan Samman Nidhi : बिहार के किसानों के लिए बड़ी समस्या, पीएम-किसान सम्मान निधि की अगली किस्त से कई किसान वंचित; जानिए क्या है मुख्य वजह
Tejpratap
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5 मिनट

PM Kisan Samman Nidhi : बिहार में प्रधानमंत्री कृषि सम्मान निधि योजना (पीएम-किसान सम्मान निधि) के तहत बड़ी संख्या में किसानों को लाभ मिलता रहा है, लेकिन अब इसके अगले चरण में कई किसानों की राशि रोकी जा सकती है। इसका मुख्य कारण किसानों की फार्मर आईडी (Farmer ID) न बन पाना है। वर्षों से योजना का लाभ ले रहे कई किसानों का आईडी बनाना अब मुश्किल हो गया है, क्योंकि उनके नाम पर जमीन की जमाबंदी (Land Records / Jamabandi) नहीं है या यह उनके पिता या दादा के नाम पर दर्ज है।


बिहार में कृषि और राजस्व विभाग ने इस समस्या को हल करने के लिए मिशन मोड में फार्मर आईडी बनाने की प्रक्रिया शुरू की है। जिले के सभी प्रखंडों में कृषि समन्वयक, राजस्व कर्मचारी और किसान सलाहकार किसानों का ई-केवाईसी (E-KYC) और फार्मर रजिस्ट्रेशन (FR) कर रहे हैं। यह प्रक्रिया सिर्फ पीएम-किसान सम्मान निधि ही नहीं, बल्कि अन्य कृषि सेवाओं के लिए भी जरूरी है।


जिले के जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने जिला ग्रामीण विकास अभिकरण में चल रहे ई-केवाईसी और फार्मर रजिस्ट्रेशन कार्य का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान शुक्रवार को 9,103 किसानों का फार्मर आईडी तैयार किया गया, जिसमें 595 आईडी CSC केंद्रों पर, 8,443 ऑपरेटरों द्वारा और 65 किसानों ने खुद ऑनलाइन आवेदन करके प्राप्त किया।


जमाबंदी और आधार में अंतर: सबसे बड़ी बाधा

किसानों को फार्मर आईडी बनाने में सबसे बड़ी समस्या आधार और जमाबंदी में नाम के अंतर से हो रही है। अधिकांश किसानों की जमीन उनके पिता या दादा के नाम पर है, जबकि आधार कार्ड वर्तमान नाम से बना है। यदि आधार और जमाबंदी में नामों में कोई भिन्नता हो, जैसे “श्याम कुमार मंडल” आधार में और “श्याम कुमार” या “श्याम कुमार मंडल उर्फ राम मंडल” जमाबंदी में, तो आवेदन ऐप में स्वीकार नहीं होता।


राजस्व कर्मचारियों के अनुसार, यह तकनीकी सख्ती फार्मर रजिस्ट्रेशन की गति को बहुत धीमा कर रही है। कर्मचारी चाहकर भी आवेदन आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं। इस वजह से कई किसानों की फार्मर आईडी अभी तक नहीं बन पाई है और ऐसे किसान पीएम-किसान सम्मान निधि की अगली किस्त से वंचित हो सकते हैं।


सबौर का उदाहरण

जिले के सबौर प्रखंड में कुल 6,612 किसानों का ई-केवाईसी और फार्मर रजिस्ट्रेशन होना था। इनमें से 4,415 किसानों का ई-केवाईसी पूरा हो गया है, लेकिन केवल 721 किसानों की रजिस्ट्री हो पाई, यानी सिर्फ 10 प्रतिशत। यह स्पष्ट करता है कि पूरे जिले में रजिस्ट्री की रफ्तार अभी भी बेहद धीमी है।


डिजिटल डेटाबेस से पारदर्शिता

ई-केवाईसी, फार्मर रजिस्ट्री, आधार और भूमि रिकॉर्ड को जोड़कर एक डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। इससे किसानों की पहचान सत्यापित होती है और योजनाओं का वितरण पारदर्शी ढंग से हो पाता है। किसान आईडी बनवाने के लिए आधार और मोबाइल नंबर अनिवार्य हैं। ऐप और डिजिटल डेटाबेस के माध्यम से किसान अब घर बैठे मोबाइल ऐप या CSC कियोस्क पर फेस ऑथेंटिकेशन और OTP के जरिए रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।


बिहार में स्थिति

बिहार में पीएम-किसान सम्मान निधि लेने वाले किसानों की कुल संख्या लगभग 2,40,833 है, लेकिन अब तक सिर्फ 28,381 फार्मर आईडी बन पाई हैं। हाल ही में किए गए अभियान में शुक्रवार को 9,103 आईडी बनीं। जिलाधिकारी की लगातार मॉनिटरिंग और प्रखंड स्तर पर कैंप लगाने के बावजूद, ठंड के बावजूद किसानों की संख्या अच्छी रही।


राजस्व विभाग और कृषि विभाग के कर्मचारी हर पंचायत में जाकर ई-केवाईसी और फार्मर रजिस्ट्रेशन कर रहे हैं। किसानों को निर्देश दिया गया है कि यदि आधार और जमाबंदी में अंतर है तो जमाबंदी सुधार या आधार सुधार कराएं, तभी उनकी फार्मर आईडी बनेगी और अगली किस्त की राशि उन्हें मिलेगी।


बिहार में पीएम-किसान योजना का लाभ लाखों किसानों तक पहुंचता रहा है, लेकिन अब जमाबंदी और आधार में नाम के अंतर ने किसानों के लिए बाधा खड़ी कर दी है। जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी की निगरानी और प्रखंड स्तर पर अभियान के बावजूद फार्मर रजिस्ट्रेशन धीमा है। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे जल्द से जल्द अपनी जमीन की जमाबंदी और आधार में सुधार कराएँ, ताकि पीएम-किसान सम्मान निधि की अगली किस्त का लाभ उन्हें मिल सके।