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Patna Flood News : 1975 की बाढ़ के बाद बनी थी पटना की ‘ढाल’, अब गंगा के सामने होगी सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा, क्या 24 KM लंबी टाउन प्रोटेक्शन वॉल बचा पाएगी राजधानी?

पटना में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और बाढ़ का खतरा गहराता जा रहा है। कई निचले इलाकों में पानी पहुंच चुका है। ऐसे में करीब 50 साल पुरानी टाउन प्रोटेक्शन वॉल राजधानी की सबसे बड़ी ढाल बनी है।

Patna Flood News : 1975 की बाढ़ के बाद बनी थी पटना की ‘ढाल’, अब गंगा के सामने होगी सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा, क्या 24 KM लंबी टाउन प्रोटेक्शन वॉल बचा पाएगी राजधानी?
Tejpratap
Tejpratap
8 मिनट

Patna Flood News : बिहार में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और पटना पर बाढ़ का खतरा गहराता जा रहा है। शहर के कई निचले इलाकों में पानी दस्तक दे चुका है। ऐसे समय में करीब पांच दशक पुरानी पटना टाउन प्रोटेक्शन वॉल एक बार फिर राजधानी की सबसे बड़ी उम्मीद बनकर सामने आई है। सवाल यह है कि क्या यह पुरानी ढाल इस बार गंगा के बढ़ते दबाव को रोक पाएगी?

पटना में गंगा का पानी जैसे-जैसे ऊपर चढ़ रहा है, वैसे-वैसे राजधानी की चिंता भी बढ़ती जा रही है। गंगा किनारे बसे इलाकों में पानी का दबाव साफ दिखाई देने लगा है। कई घाट डूब चुके हैं, सड़कों पर पानी पहुंच गया है और निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुसने लगा है। ऐसे हालात में लोगों की नजर उस सुरक्षा दीवार पर टिक गई है, जिसे करीब पांच दशक पहले पटना को गंगा की बाढ़ से बचाने के लिए तैयार किया गया था। यह है पटना टाउन प्रोटेक्शन वॉल, जिसे शहर की बाढ़ सुरक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है।

1975 की बाढ़ ने दिखाई थी खतरे की तस्वीर

पटना ने वर्ष 1975 में बाढ़ का बेहद भयावह दौर देखा था। उस समय गंगा के उफान ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। इसके बाद शहर को भविष्य में गंगा के बाढ़ के पानी से बचाने के लिए स्थायी सुरक्षा व्यवस्था तैयार करने का फैसला लिया गया।

इसी के तहत वर्ष 1976 में पटना टाउन प्रोटेक्शन वॉल का निर्माण कराया गया। करीब पांच दशक पुरानी यह सुरक्षा दीवार आज भी राजधानी के बड़े हिस्से के लिए महत्वपूर्ण बाढ़ सुरक्षा ढांचे के तौर पर मौजूद है। रिपोर्टों के अनुसार, यह सुरक्षा घेरा करीब 24 किलोमीटर लंबा है और इसका विस्तार दानापुर से रानी घाट तक बताया जाता है। यानी गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच यह दीवार पटना के लिए सिर्फ कंक्रीट और मिट्टी की संरचना नहीं, बल्कि शहर की सुरक्षा की एक अहम उम्मीद है।

108 रास्ते किए गए बंद, 13 स्लुइस गेटों पर निगरानी

गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए पटना जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया है। टाउन प्रोटेक्शन वॉल में बने सभी 108 रास्तों को बंद कर दिया गया है, ताकि गंगा का पानी इन रास्तों से शहर के अंदर प्रवेश न कर सके।इसके अलावा सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े 13 स्लुइस गेटों का भी निरीक्षण कराया गया। कुछ स्थानों पर सीपेज यानी पानी रिसने की शिकायत मिलने के बाद लीकेज को बंद कराया गया है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। नगर निगम, जल संसाधन विभाग और बुडको की टीमों को बाढ़ निरोधक उपायों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने को कहा गया है।

गंगा का पानी बढ़ा तो पटना के कई हिस्सों में संकट

जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार स्थिति सामान्य नहीं है। मनेर में गंगा खतरे के निशान से 1.50 मीटर ऊपर, दीघा घाट पर 1.23 मीटर और गांधी घाट पर 1.76 मीटर ऊपर बह रही है। हाथीदह में भी गंगा खतरे के निशान से 1.48 मीटर ऊपर है।वहीं, पुनपुन नदी श्रीपालपुर में खतरे के निशान से 2.56 मीटर ऊपर बह रही है। Vइन आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पटना के सामने चुनौती केवल गंगा से नहीं है। गंगा के साथ पुनपुन और अन्य जलधाराओं का बढ़ता दबाव भी शहर के लिए चिंता का कारण बना हुआ है।

पटना के कई निचले इलाकों में पानी पहुंच चुका है। दीघा घाट पर गंगा अंडरपास के नीचे तक पानी पहुंच गया है। गायघाट-दीदारगंज सड़क के कई हिस्से जलमग्न हैं। बिंद टोली, एलसीटी घाट, गांधी घाट, महावीर घाट और पटना सिटी के कई इलाकों में भी गंगा का पानी लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। कई स्थानों पर स्थिति इतनी गंभीर है कि लोगों को कमर तक पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है।

क्या सिर्फ दीवार पटना को बचा सकती है?

यही सबसे बड़ा सवाल है।विशेषज्ञों के अनुसार, टाउन प्रोटेक्शन वॉल पटना के बड़े हिस्से को गंगा के सीधे बाढ़ प्रभाव से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, लेकिन इसे शहर का पूर्ण सुरक्षा कवच मानना सही नहीं होगा। बाढ़ के दौरान केवल नदी का पानी ही खतरा नहीं होता। नदी का कटाव, तट की कमजोरी, स्लुइस गेट से पानी का रिसाव और शहर के ड्रेनेज सिस्टम पर बढ़ता दबाव भी बड़ी चुनौती बन सकता है।

अगर गंगा का जलस्तर लंबे समय तक ऊंचा रहता है तो शहर से बारिश और नालों का पानी बाहर निकालना भी मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि बाढ़ सुरक्षा के लिए प्रोटेक्शन वॉल के साथ-साथ पंपिंग स्टेशन, स्लुइस गेट, ड्रेनेज और तट संरक्षण की व्यवस्था का मजबूत रहना जरूरी है।

पांच दशक बाद बदली हैं परिस्थितियां

जब 1976 में टाउन प्रोटेक्शन वॉल तैयार की गई थी, तब पटना का स्वरूप आज की तुलना में काफी अलग था। शहर का विस्तार सीमित था और गंगा के किनारे आज जितना निर्माण नहीं था।अब आबादी बढ़ी है, शहर नदी की तरफ भी फैला है और निचले इलाकों में बड़ी संख्या में लोग रहते हैं। ऐसे में पुरानी सुरक्षा संरचना पर दबाव भी बढ़ा है। इसके अलावा गंगा की धारा में बदलाव और कटाव की समस्या समय-समय पर नई चुनौती पैदा करती रही है। इसी कारण अलग-अलग समय पर तट और बैंक प्रोटेक्शन के काम भी कराए गए हैं।

प्रशासन की रात-दिन तैयारी

गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए पटना के जिलाधिकारी कुंदन कुमार, पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के. शर्मा और नगर आयुक्त यशपाल मीणा समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने दीघा घाट से बिंद टोली, एलसीटी घाट, गोसाईं टोला और टाउन प्रोटेक्शन वॉल क्षेत्र का निरीक्षण किया।

प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी रास्ते से गंगा का पानी शहर में प्रवेश न करने पाए। सभी ड्रेनेज पंपिंग स्टेशनों को चालू रखने और जरूरत पड़ने पर शहर से पानी की तत्काल निकासी सुनिश्चित करने को कहा गया है।पाटलिपुत्र कॉलोनी सहित संवेदनशील इलाकों में भी अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। सदाकत आश्रम के पास नाले के रास्ते पानी के संभावित प्रवेश को रोकने के लिए संबंधित विभागों को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया गया है।

असली परीक्षा अभी बाकी है

पटना के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती गंगा के बढ़ते जलस्तर और लंबे समय तक बने रहने वाले पानी के दबाव की है।टाउन प्रोटेक्शन वॉल ने करीब 50 वर्षों में पटना को कई बार बाढ़ के सीधे प्रभाव से बचाने में भूमिका निभाई है। लेकिन इस बार नदी का दबाव, शहर का विस्तार और निचले इलाकों में बढ़ती आबादी—तीनों एक साथ चुनौती पेश कर रहे हैं।प्रशासन ने 108 रास्ते बंद कर दिए हैं, 13 स्लुइस गेटों की निगरानी बढ़ा दी गई है और पंपिंग स्टेशनों को तैयार रखा गया है।अब निगाहें गंगा पर हैं।क्योंकि सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि गंगा कितनी बढ़ेगी, सवाल यह भी है कि पटना की पांच दशक पुरानी 'ढाल' इस बार गंगा के कहर के सामने कितनी मजबूती से खड़ी रहती है।