1st Bihar Published by: FIRST BIHAR Updated Mar 23, 2026, 10:28:13 AM
प्रतिकात्मक तस्वीर - फ़ोटो Google
Bihar Panchayat Chunav 2026: बिहार में पंचायत चुनाव 2026 की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। सूबे में पंचायत आम चुनाव की वोटिंग नवंबर-दिसंबर 2026 में संभावित है।राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला स्तर पर पदाधिकारियों की तैनाती का आदेश जारी कर दिया है। हर जिले में डीएम को जिला निर्वाचन पदाधिकारी (पंचायत) के रूप में नामित किया गया है, जबकि जिला पंचायत राज पदाधिकारी उप निर्वाचन पदाधिकारी (पंचायत) होंगे।
पंचायत चुनाव 2026 पुराने परिसीमन के आधार पर आयोजित होंगे। राज्य सरकार ने वार्ड, पंचायत या चुनाव क्षेत्र की सीमाओं में कोई बदलाव नहीं किया है। त्रि-स्तरीय पंचायतीराज व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद के विभिन्न पदों के लिए मतदान होगा। इसमें मुखिया, सरपंच, पंच, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य शामिल हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग फार्म-1 के प्रकाशन के बाद वोटर लिस्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करेगा। इसके अंतर्गत मतदाता सूची का निर्माण, बूथों का निर्धारण और ईवीएम की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। 2011 की जनगणना के आधार पर चुनाव क्षेत्र की आबादी निर्धारित की जाएगी, फिर फार्म-1 जारी होगा और आम लोगों से अपने निर्वाचन क्षेत्र को लेकर दावा और आपत्ति मांगी जाएगी। मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया जून 2026 में शुरू होगी।
बिहार में पंचायतों का अंतिम परिसीमन 1991 की जनगणना के आधार पर 1994 में किया गया था। 36 वर्षों में पंचायतों की आबादी बढ़ने के बावजूद कोई नया परिसीमन नहीं हुआ। जन प्रतिनिधियों का कहना है कि इससे प्रतिनिधित्व और संसाधनों का संतुलन बिगड़ रहा है। नगर निकायों के विस्तार और पुनर्गठन से पंचायतों की सीमाएं प्रभावित हुई हैं।
इस साल का पंचायत चुनाव कई मायनों में खास होगा। पहली बार ग्रामीण पंचायत चुनाव में ईवीएम के जरिए मतदान होगा। मल्टी पोस्ट इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में 6 बैलेट यूनिट होगी और कंट्रोल यूनिट एक ही होगी। मतदाता एक ही स्थान पर वार्ड सदस्य, मुखिया और सरपंच के लिए वोट डाल सकेंगे।
धांधली और फर्जी वोटिंग को रोकने के लिए इस बार फेशियल रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। पंचायती राज विभाग के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति दूसरी बार फर्जी मतदान करने बूथ पर आएगा, तो वहां लगे कैमरों से उसकी पहचान कर ली जाएगी। इसके साथ ही आरक्षण रोस्टर में बदलाव के लिए जिलों से वार्डवार आंकड़े मांगे गए हैं।