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Bihar News : अब नहीं चलेगा पुराना हिसाब! आपके वार्ड की सीट बदलेगी या नहीं? पंचायत चुनाव से पहले जान लें नया नियम

बिहार में पंचायत चुनाव 2026 को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार आरक्षण 2011 जनगणना के आधार पर होगा और नए Form-1 से पंचायतों का डेटा अपडेट किया जाएगा।

Bihar News : अब नहीं चलेगा पुराना हिसाब! आपके वार्ड की सीट बदलेगी या नहीं? पंचायत चुनाव से पहले जान लें नया नियम
Tejpratap
Tejpratap
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Panchayat Election : बिहार में पंचायत चुनाव 2026 को लेकर अब माहौल गरमाने लगा है। गांव-गांव में चर्चा शुरू हो गई है और इसी बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने भी अपनी तैयारी तेज कर दी है। आयोग की तरफ से एक अहम पत्र जारी किया गया है, जिसमें कई नए दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इस बार चुनाव को लेकर सबसे बड़ी बात यह है कि आरक्षण का निर्धारण 2011 की जनगणना के आधार पर ही किया जाएगा, लेकिन इसके लिए एक नया ‘प्रपत्र-1’ (Form-1) तैयार किया जाएगा।


दरअसल, पिछले कुछ सालों में बिहार के कई गांवों को नगर निकायों यानी नगर निगम और नगर परिषद में शामिल कर लिया गया है। इसका सीधा असर पंचायतों की सीमाओं और उनकी जनसंख्या पर पड़ा है। कहीं पंचायत का इलाका छोटा हो गया है तो कहीं उसकी आबादी कम या ज्यादा हो गई है। ऐसे में पुराने आंकड़ों के आधार पर चुनाव कराना मुश्किल हो गया था। यही वजह है कि आयोग ने इस बार डिजिटल तरीके से पूरे डेटा को अपडेट करने का फैसला लिया है।


अब नई व्यवस्था के तहत पंचायतों की जनसंख्या और उनके क्षेत्रों का मिलान ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा और उसी आधार पर नया प्रपत्र-1 तैयार होगा। इससे यह साफ हो जाएगा कि किस पंचायत में कितनी आबादी बची है और कौन-सा इलाका नगर निकाय में चला गया है।


आयोग ने चुनाव से जुड़े सभी पदों को दो हिस्सों में बांट दिया है। इसमें मुखिया, सरपंच, वार्ड सदस्य, पंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य जैसे पद शामिल हैं। पहला हिस्सा उन क्षेत्रों का होगा जहां कोई बदलाव नहीं हुआ है। ऐसे इलाकों में 2015 के पुराने आंकड़ों के आधार पर ही प्रपत्र-1 जारी किया जाएगा। यानी वहां ज्यादा बदलाव की जरूरत नहीं पड़ेगी।


वहीं दूसरा हिस्सा उन क्षेत्रों का होगा जहां पंचायत की सीमा या जनसंख्या में बदलाव हुआ है। इन इलाकों में विलोपित वार्डों यानी जो वार्ड अब पंचायत में नहीं रहे, उनकी अलग से एंट्री की जाएगी। साथ ही नई जनसंख्या का डेटा भी जोड़ा जाएगा। इससे यह पूरी तरह साफ रहेगा कि पंचायत का कितना हिस्सा शहर में शामिल हो गया है और कितना गांव में बचा है।


एक खास बात यह भी है कि मुखिया, पंचायत समिति और जिला परिषद के पदों के लिए जनसंख्या का आंकड़ा अलग से भरने की जरूरत नहीं होगी। यह डेटा वार्डों के आधार पर अपने आप सिस्टम में जुड़ जाएगा। यानी पूरी प्रक्रिया को ज्यादा आसान और पारदर्शी बनाने की कोशिश की जा रही है।


अगर किसी को लगता है कि उसके पंचायत या वार्ड की जनसंख्या के आंकड़ों में गड़बड़ी है, तो उसके लिए भी मौका दिया गया है। आम लोग 27 अप्रैल से 11 मई के बीच अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए पंचायत कार्यालय, प्रखंड कार्यालय, अनुमंडल कार्यालय और जिला पदाधिकारी के दफ्तर में सूची चिपकाई जाएगी, ताकि लोग उसे देख सकें।


सिर्फ दफ्तरों तक ही सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इस जानकारी को सोशल मीडिया और आयोग की वेबसाइट पर भी डाला जाएगा। गांव-गांव तक सूचना पहुंचाने के लिए पुराने तरीके भी अपनाए जाएंगे। हाट-बाजारों में डुगडुगी बजाकर लोगों को जानकारी दी जाएगी और लाउडस्पीकर लगे वाहनों से भी प्रचार किया जाएगा, ताकि कोई भी व्यक्ति इस प्रक्रिया से अनजान न रहे।


पूरे काम की निगरानी के लिए भी खास इंतजाम किए गए हैं। जिला स्तर पर जिला पंचायत राज पदाधिकारी को नोडल अफसर बनाया गया है, जो इस प्रक्रिया पर नजर रखेंगे। वहीं राज्य स्तर पर संयुक्त निर्वाचन आयुक्त शंभु कुमार को जिम्मेदारी दी गई है। वे हर दिन की रिपोर्ट लेंगे और अगर कहीं कोई तकनीकी दिक्कत आती है तो उसे तुरंत ठीक कराया जाएगा।


कुल मिलाकर देखा जाए तो इस बार पंचायत चुनाव को ज्यादा पारदर्शी और सटीक बनाने की तैयारी है। डिजिटल सिस्टम के जरिए डेटा अपडेट करने से गड़बड़ियों की गुंजाइश कम होगी और चुनाव प्रक्रिया भी पहले से ज्यादा साफ-सुथरी नजर आएगी। अब देखना यह होगा कि इन नई तैयारियों का असर जमीनी स्तर पर कितना दिखता है और क्या इससे चुनाव में किसी तरह के विवाद कम होते हैं या नहीं।