Bihar Panchayat News : बिहार के ग्रामीण इलाकों में विकास योजनाओं को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करने और पंचायत स्तर पर पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार की नई ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका योजना विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जीरामजी) को लेकर राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत जिलेवार पंच सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।
इस अभियान में त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ प्रशासनिक अधिकारियों की भी भागीदारी होगी। खास तौर पर मुखिया, वार्ड सदस्य और पंचों को योजना के प्रावधानों, कार्यप्रणाली और पंचायत स्तर पर इसकी भूमिका की जानकारी दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि पंचायत प्रतिनिधियों को नई योजना की पूरी जानकारी मिले, जिससे वे ग्रामीण जरूरतों के मुताबिक बेहतर विकास योजनाएं तैयार कर सकें।यह प्रदेशव्यापी अभियान 15 अगस्त तक सभी ग्राम पंचायतों में लगातार आयोजित किया जाएगा।
मनरेगा और नई योजना का अंतर समझाया जाएगा
ग्रामीण विकास विभाग एवं सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि पंच सम्मेलनों का प्रमुख उद्देश्य पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को पुरानी मनरेगा व्यवस्था तथा 1 जुलाई 2026 से लागू वीबी-जीरामजी योजना के बीच अंतर को स्पष्ट करना है।
सम्मेलन में प्रतिनिधियों को बताया जाएगा कि नई योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने के साथ-साथ ऐसे स्थायी कार्यों पर जोर दिया जाएगा, जिनसे गांव की अर्थव्यवस्था मजबूत हो और ग्रामीणों की आय के नए अवसर पैदा हों।
सरकार का जोर इस बात पर भी है कि पंचायतें केवल परंपरागत तरीके से योजनाएं तैयार न करें, बल्कि स्थानीय जरूरतों और उपलब्ध संसाधनों का आकलन करके साक्ष्य आधारित विकास योजनाएं तैयार करें। इससे योजनाओं का चयन वास्तविक जरूरत के आधार पर होगा और सरकारी राशि का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा।
सिर्फ रोजगार नहीं, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर
मंत्री के अनुसार वीबी-जीरामजी को केवल रोजगार उपलब्ध कराने वाली योजना के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इसका व्यापक उद्देश्य गांवों को आत्मनिर्भर बनाना और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने में ग्रामीण क्षेत्रों की भूमिका को मजबूत करना है।
नई व्यवस्था में विकास कार्यों को चार प्रमुख क्षेत्रों में बांटकर परिणाम आधारित काम करने पर जोर दिया गया है। इनमें जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन, गांवों में टिकाऊ एवं मजबूत बुनियादी ढांचे का निर्माण, ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने वाली उत्पादक परिसंपत्तियों का निर्माण तथा जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए हरित विकास शामिल हैं। इसका सीधा असर ग्रामीण इलाकों में रोजगार के साथ-साथ सड़क, जल संरक्षण, सिंचाई, पर्यावरण संरक्षण और आजीविका से जुड़े स्थायी संसाधनों के निर्माण पर पड़ सकता है।
डिजिटल व्यवस्था से बढ़ेगी पारदर्शिता
वीबी-जीरामजी योजना में तकनीक के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार का उद्देश्य योजना में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ फर्जीवाड़े और अनियमितताओं की संभावनाओं को कम करना है। इसके लिए कार्यस्थलों पर बायोमीट्रिक और फेस ऑथेंटिकेशन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा डिजिटल माध्यम से रियल टाइम उपस्थिति दर्ज करने और काम की निगरानी करने की व्यवस्था भी शामिल है। मजदूरों के भुगतान को भी डिजिटल और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है। इससे मजदूरी भुगतान में देरी और गड़बड़ी की शिकायतों को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
बेरोजगारी भत्ते का भी प्रावधान
नई योजना में समय पर मजदूरी भुगतान के साथ बेरोजगारी भत्ते के कानूनी प्रावधान को भी महत्वपूर्ण माना गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि योजना के तहत रोजगार की मांग करने वाले ग्रामीण श्रमिकों को निर्धारित व्यवस्था के अनुसार काम या संबंधित वैधानिक लाभ मिल सके।
इसके अलावा शिकायतों के त्वरित निपटारे के लिए मजबूत शिकायत निवारण तंत्र विकसित करने की बात कही गई है। इससे पंचायत स्तर पर सामने आने वाली समस्याओं को समय रहते संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने और उनके समाधान की प्रक्रिया को बेहतर बनाया जा सकेगा।
पंचायतों को बनाया जाएगा विकास का केंद्र
सरकार की योजना में पंचायतों की भूमिका को सिर्फ योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं रखने, बल्कि उन्हें स्थानीय विकास की मजबूत इकाई बनाने पर जोर है। पंच सम्मेलनों के माध्यम से प्रतिनिधियों को योजना की जानकारी देने के साथ यह भी बताया जाएगा कि उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय जरूरतों के आधार पर किस तरह प्रभावी कार्यों का चयन किया जाए। सरकार का मानना है कि यदि पंचायत स्तर पर योजना निर्माण, निगरानी और भुगतान की प्रक्रिया पारदर्शी रहती है तो सरकारी योजनाओं का लाभ ज्यादा प्रभावी तरीके से ग्रामीण परिवारों तक पहुंचाया जा सकता है।
इसी उद्देश्य के साथ बिहार में 15 अगस्त तक चलने वाला यह पंच सम्मेलन अभियान पंचायत प्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। सरकार का संदेश स्पष्ट है कि सशक्त पंचायत ही विकसित बिहार की मजबूत नींव बनेगी।





