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Bihar News: सिपाही भर्ती परीक्षा में धांधली करने वाले गिरोह का पर्दाफाश, 15 गिरफ्तार

Bihar News: बिहार सिपाही भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़े का पर्दाफाश, शेखपुरा में फर्जी बायोमेट्रिक ऑपरेटर समेत 15 गिरफ्तार। मास्टरमाइंड गोरेलाल यादव भी नवादा से पकड़ा गया।

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पुलिस की कार्रवाई
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Deepak Kumar
Deepak Kumar
3 मिनट

Bihar News: बिहार सिपाही भर्ती परीक्षा 2025 में धांधली करने वाले एक बड़े गिरोह का शेखपुरा पुलिस ने पर्दाफाश किया है। 20 जुलाई को हुई इस परीक्षा में फर्जी बायोमेट्रिक ऑपरेटरों और सॉल्वर गैंग के 15 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपियों में मास्टरमाइंड गोरेलाल यादव (24 वर्ष), नवादा जिले के गोविंदपुर, हरिनारायणपुर गांव का निवासी भी शामिल है। इस गिरोह में नवादा के 4, शेखपुरा के 7, भोजपुर के 2 और गया के 1 अभ्यर्थी के साथ-साथ 2 महिला अभ्यर्थी भी शामिल हैं।


शेखपुरा के एसपी बलिराम कुमार चौधरी ने बताया है कि बायोमेट्रिक सत्यापन का काम हैदराबाद की कंपनी सायनासोर को सौंपा गया था, जिसमें स्थानीय युवाओं को भी शामिल किया गया था। गुप्त सूचना के आधार पर परीक्षा शुरू होने से पहले सभी केंद्रों पर बायोमेट्रिक ऑपरेटरों की जांच शुरू की गई। इस्लामियां उच्च विद्यालय में जांच के दौरान सचिन कुमार की जगह फर्जी आईडी कार्ड के साथ चिंटू कुमार और सिकंदर कुमार को बायोमेट्रिक ऑपरेटर के रूप में काम करते पकड़ा गया। पूछताछ में दोनों ने मास्टरमाइंड गोरेलाल यादव का नाम उगला।


जांच में खुलासा हुआ कि इस गिरोह में 18 लोग शामिल थे, जिन्होंने सभी परीक्षा केंद्रों पर सेटिंग कर फर्जीवाड़ा करने की साजिश रची थी। इनमें से 13 लोगों और 2 परीक्षार्थियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि बाकी की तलाश जारी है। गिरोह ने प्रत्येक अभ्यर्थी से 7 लाख रुपये तक की डील की थी ताकि उन्हें लिखित परीक्षा पास करवाया जा सके। पटना पुलिस ने भी इस मामले में एक अन्य गिरोह के तीन शातिरों को गिरफ्तार किया है, जो सिपाही भर्ती परीक्षा में सेटिंग के जरिए नकल कराने की योजना बना रहे थे। बिहार पुलिस और केंद्रीय चयन पर्षद ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।


पहले भी बिहार सिपाही भर्ती परीक्षा में धांधली के मामले सामने आ चुके हैं। 2023 में पेपर लीक के कारण 1 अक्टूबर की परीक्षा रद्द कर दी गई थी, जिसमें 74 FIR दर्ज हुई थीं और 150 से अधिक लोग गिरफ्तार हुए थे। 2022 में गया में 36 अभ्यर्थी ब्लूटूथ डिवाइस के साथ पकड़े गए थे। इस बार बायोमेट्रिक सत्यापन, CCTV निगरानी और लाइव स्ट्रीमिंग के बावजूद सॉल्वर गैंग सक्रिय रहा। जो परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है।


पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 469 (जालसाजी) और बिहार परीक्षा नियंत्रण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। साथ ही सायनासोर कंपनी के बायोमेट्रिक सिस्टम में खामियों की जांच भी शुरू की गई है। शेखपुरा और पटना पुलिस अन्य फरार आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है।