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Bihar Traffic Police : अब हाईवे पर स्पीड दिखी तो बचना मुश्किल! बिहार के सभी NH पर 58 नए इंटरसेप्टर, तुरंत कटेगा E-Challan

बिहार में राष्ट्रीय राजमार्गों पर तेज रफ्तार और सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। 58 नए इंटरसेप्टर वाहन इसी महीने ट्रैफिक पुलिस को मिलेंगे। हर 50 किलोमीटर पर गश्त होगी, स्पीड गन से निगरानी होगी और नियम तोड़ने वालों का तुरंत ई-चा

Bihar Traffic Police : अब हाईवे पर स्पीड दिखी तो बचना मुश्किल! बिहार के सभी NH पर 58 नए इंटरसेप्टर, तुरंत कटेगा E-Challan
Tejpratap
Tejpratap
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Bihar Traffic Police : बिहार में सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए यातायात पुलिस जल्द ही राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच) पर अपनी निगरानी और मजबूत करने जा रही है। राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय ने सभी राष्ट्रीय राजमार्गों को हाई-टेक ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम से जोड़ने की तैयारी पूरी कर ली है। इसी महीने यातायात पुलिस को 58 नए इंटरसेप्टर वाहन मिलने वाले हैं, जिनकी तैनाती के बाद राज्य से गुजरने वाले करीब 6,300 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्गों की निगरानी प्रभावी ढंग से की जाएगी।


फिलहाल बिहार के विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों पर 61 इंटरसेप्टर वाहन पहले से गश्त कर रहे हैं, जो लगभग 3,000 किलोमीटर सड़क नेटवर्क की निगरानी कर रहे हैं। नए वाहनों के शामिल होने के बाद सभी प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों को ट्रैफिक पुलिस की नियमित गश्ती व्यवस्था के दायरे में लाया जाएगा। पुलिस मुख्यालय की योजना के अनुसार, हर 50 किलोमीटर की दूरी पर एक इंटरसेप्टर वाहन तैनात रहेगा, जिससे दुर्घटनाओं की रोकथाम और आपातकालीन सहायता दोनों को गति मिलेगी।


एनएच पर सबसे ज्यादा होते हैं सड़क हादसे

बिहार में हर वर्ष औसतन करीब 12 हजार सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की जाती हैं। इनमें से लगभग 40 से 45 प्रतिशत हादसे राष्ट्रीय राजमार्गों पर होते हैं। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इन दुर्घटनाओं का सबसे बड़ा कारण ओवरस्पीड है। तेज रफ्तार, लापरवाही से वाहन चलाना और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी के कारण बड़ी संख्या में लोगों की जान चली जाती है। इसी चुनौती से निपटने के लिए इंटरसेप्टर वाहनों की संख्या बढ़ाई जा रही है, ताकि हाईवे पर हर समय निगरानी बनी रहे और नियम तोड़ने वालों पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।


कैमरा और स्पीड गन से होगी निगरानी

नए इंटरसेप्टर वाहन अत्याधुनिक तकनीक से लैस होंगे। इनमें हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे, स्पीड गन और डिजिटल रिकॉर्डिंग सिस्टम लगाए जाएंगे। ये उपकरण तेज गति से चलने वाले वाहनों की पहचान कर तत्काल उनका डेटा रिकॉर्ड करेंगे। इसके आधार पर नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों का ऑनलाइन ई-चालान जारी किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि लोगों को ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूक बनाना और सड़क सुरक्षा को मजबूत करना है।


वॉयस रिकॉर्डिंग भी बनेगी सबूत

इंटरसेप्टर वाहनों में वॉयस रिकॉर्डिंग सिस्टम भी लगाया जाएगा। यदि किसी वाहन चालक और पुलिसकर्मी के बीच ट्रैफिक जांच के दौरान कोई विवाद होता है या नियम उल्लंघन से जुड़ा मामला सामने आता है, तो रिकॉर्ड हुई आवाज को साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा। इससे कार्रवाई में पारदर्शिता बढ़ेगी और विवाद की स्थिति में तथ्यात्मक जांच आसान होगी।


अतिक्रमण और सुरक्षा पर भी रहेगी नजर

इन गश्ती वाहनों का उपयोग केवल ट्रैफिक नियमों के पालन तक सीमित नहीं रहेगा। राष्ट्रीय राजमार्गों पर अतिक्रमण, संदिग्ध गतिविधियों और सुरक्षा संबंधी मामलों पर भी लगातार नजर रखी जाएगी। पुलिस का मानना है कि हाईवे पर नियमित गश्त से अपराध नियंत्रण में भी मदद मिलेगी और यात्रियों की सुरक्षा बेहतर होगी।


डायल-112 से जुड़ेंगे इंटरसेप्टर वाहन

पुलिस मुख्यालय के अनुसार, सभी इंटरसेप्टर वाहनों को डायल-112 इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम से भी जोड़ा जाएगा। इससे यदि किसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क दुर्घटना, वाहन खराब होने या किसी अन्य आपात स्थिति की सूचना मिलती है, तो सबसे नजदीकी इंटरसेप्टर वाहन तुरंत मौके पर पहुंच सकेगा।इस व्यवस्था से दुर्घटना के बाद 'गोल्डन आवर' के दौरान पीड़ितों को समय पर सहायता मिलने की संभावना बढ़ेगी, जिससे गंभीर हादसों में मौतों की संख्या कम करने में मदद मिल सकती है।

राज्य पुलिस का मानना है कि इंटरसेप्टर वाहनों की संख्या बढ़ने, आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल और डायल-112 के साथ बेहतर समन्वय से बिहार के राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनेगी।