ब्रेकिंग
बिहार में तीन साल की मासूम की हत्या से सनसनी, भूसे से मिला सड़ा-गला शवNEET UG परीक्षा में बड़ा बदलाव: अगले साल से CBT मोड में होगा एग्जाम, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का एलानNEET पेपर लीक पर सरकार का सख्त रुख: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान बोले- दोषियों को पाताल से भी ढूंढ निकालेंगेशराबबंदी वाले बिहार का हाल देखिए: पटना में सचिवालय के बाद DTO ऑफिस में मिलीं शराब की बोतलें, परिवहन कार्यालय में छापेमारी से हड़कंप‘सवाल सिर्फ 3 रुपये की बढ़ोत्तरी का नहीं..’, पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने पर रोहिणी आचार्य का हमलाबिहार में तीन साल की मासूम की हत्या से सनसनी, भूसे से मिला सड़ा-गला शवNEET UG परीक्षा में बड़ा बदलाव: अगले साल से CBT मोड में होगा एग्जाम, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का एलानNEET पेपर लीक पर सरकार का सख्त रुख: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान बोले- दोषियों को पाताल से भी ढूंढ निकालेंगेशराबबंदी वाले बिहार का हाल देखिए: पटना में सचिवालय के बाद DTO ऑफिस में मिलीं शराब की बोतलें, परिवहन कार्यालय में छापेमारी से हड़कंप‘सवाल सिर्फ 3 रुपये की बढ़ोत्तरी का नहीं..’, पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने पर रोहिणी आचार्य का हमला

BIHAR NEWS : डिप्टी सीएम ने अफसरों को हड़काया, कहा - फिल्ड में जाइए दफ्तर में बैठने से काम नहीं चलेगा, शिकायत मिली तो...

मानसून से पहले बिहार सरकार अलर्ट मोड में है। जल संसाधन मंत्री ने अधिकारियों को तटबंध और नहरों का निरीक्षण करने का निर्देश देते हुए लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।

BIHAR NEWS : डिप्टी सीएम ने अफसरों को हड़काया, कहा - फिल्ड में जाइए दफ्तर में बैठने से काम नहीं चलेगा, शिकायत मिली तो...
Tejpratap
Tejpratap
4 मिनट

पटना : बिहार में मानसून के आगमन से पहले सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। इसी कड़ी में शुक्रवार को जल संसाधन विभाग के मंत्री सह उपमुख्यमंत्री ने विभागीय अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को साफ शब्दों में हड़काते हुए कहा कि - दफ्तर में बैठने से काम नहीं चलेगा बल्कि फिल्ड में जाइए और यह भी समझ लें की मुझे शिकायत मिली तो फिर सीधे एक्शन होगा। 


बैठक के दौरान मंत्री का रुख काफी सख्त नजर आया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सिर्फ दफ्तर में बैठकर फाइलों का निष्पादन करने से काम नहीं चलेगा। सभी अधिकारियों को तटबंधों, नहरों और जल निकासी परियोजनाओं का नियमित निरीक्षण करना होगा। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर किसी क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि संबंधित अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे हैं, तो उनके खिलाफ सीधे कठोर कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बचाने का मौका नहीं मिलेगा।


मंत्री ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि “पूरी जिम्मेदारी आपकी है। आप सक्षम हैं, लेकिन आज से यह आदत बना लीजिए कि हर परिस्थिति में फील्ड का निरीक्षण करना है। तटबंधों पर जाना है, नहरों की स्थिति देखनी है और लोगों की समस्याओं को समझना है। अगर मैं किसी क्षेत्र में पहुंच गया और पता चला कि अधिकारी वहां नहीं गए हैं, तो कार्रवाई तय मानी जाए।”


उन्होंने कहा कि अक्सर शिकायतें मिलती हैं कि 100 में से कई अधिकारी कभी क्षेत्र में पहुंचते ही नहीं हैं। यह स्थिति स्वीकार्य नहीं है। क्षेत्रीय अधिकारियों का काम केवल दफ्तर तक सीमित नहीं हो सकता। उन्हें गांवों और शहरों में जाकर वास्तविक हालात देखने होंगे। मंत्री ने कहा कि किसी भी जिले में जाकर वहां के लोगों से बातचीत करें और जानें कि पानी की समस्या क्या है, कहां दिक्कत है और किस तरह समाधान किया जा सकता है।


बैठक में मंत्री ने विशेष रूप से कहा कि क्षेत्रीय अधिकारी का असली कार्यालय उसका फील्ड होता है। उन्होंने कहा कि “क्षेत्रीय अधिकारी दफ्तर में बैठकर काम नहीं कर सकता। फील्ड में जाना ही उसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।” उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मानसून से पहले सभी तटबंधों, बांधों, स्लुइस गेट, नहरों और जल निकासी संरचनाओं की स्थिति का गंभीरता से निरीक्षण किया जाए।


मंत्री ने यह भी कहा कि किसी भी निर्माण या मरम्मत कार्य की निगरानी केवल कागजों पर नहीं होनी चाहिए। कम से कम दो से तीन स्तर के अधिकारियों को मौके पर जाकर काम की गुणवत्ता जांचनी होगी। उन्होंने कहा कि कई परियोजनाओं में दिक्कत इसलिए आती है क्योंकि अधिकारी स्थल पर जाकर स्थिति का जायजा नहीं लेते। अगर समय रहते निरीक्षण हो, तो बड़ी समस्याओं से बचा जा सकता है।


बैठक में विभाग के वरिष्ठ अभियंताओं और क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि मानसून शुरू होने से पहले सभी संवेदनशील इलाकों की सूची तैयार कर ली जाए। जहां तटबंध कमजोर हैं या जलभराव की आशंका है, वहां विशेष निगरानी रखी जाए। साथ ही राहत और बचाव कार्यों की तैयारी भी पहले से सुनिश्चित करने को कहा गया।


सरकार की इस सख्ती को मानसून पूर्व तैयारी के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। हर साल बिहार के कई जिले बाढ़ और जलजमाव की समस्या से प्रभावित होते हैं। ऐसे में सरकार इस बार पहले से तैयारी कर किसी भी आपदा की स्थिति से निपटने की रणनीति पर काम कर रही है।


पटना से प्रेम राज की रिपोर्ट 

संबंधित खबरें