Bihar News : बिहार सरकार ने अवैध खनन और खनिजों के अवैध परिवहन पर प्रभावी रोक लगाने के लिए खनिज भंडारण (मिनरल स्टोरेज) से जुड़े नियमों को पहले से अधिक सख्त कर दिया है। अब खनिजों के भंडारण और परिवहन की पूरी प्रक्रिया डिजिटल निगरानी में होगी। नए नियमों के तहत कारोबार के आकार के अनुसार सीसीटीवी कैमरा, धर्मकांटा (वजन मापने की व्यवस्था) और विभागीय पोर्टल से जुड़ाव अनिवार्य किया गया है। साथ ही बिना वैध ई-चालान या पारगमन पास के किसी भी खनिज का परिवहन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
खान एवं भू-तत्व विभाग द्वारा जारी नई व्यवस्था का उद्देश्य खनिज कारोबार को अधिक पारदर्शी बनाना, राजस्व चोरी रोकना और अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। सरकार का मानना है कि डिजिटल मॉनिटरिंग और ऑनलाइन ट्रैकिंग से पूरे सिस्टम में जवाबदेही बढ़ेगी।
कारोबारियों को तीन श्रेणियों में बांटा गया
नई व्यवस्था के तहत खनिज भंडारण करने वाले व्यवसायियों को तीन श्रेणियों—लघु, मध्यम और वृहद—में विभाजित किया गया है। प्रत्येक श्रेणी के लिए अलग-अलग भंडारण क्षमता, लाइसेंस शुल्क और आवश्यक सुविधाएं निर्धारित की गई हैं।
लघु व्यवसायियों के लिए नियम
लघु श्रेणी के व्यवसायी अधिकतम 25 हजार घनफीट खनिज का भंडारण कर सकेंगे। इसके लिए 5 हजार रुपये आवेदन शुल्क देकर एक वर्ष का लाइसेंस प्राप्त किया जा सकेगा। यदि व्यवसायी अपने स्टोरेज स्थल पर सीसीटीवी कैमरा स्थापित करता है, तो वह 20 हजार रुपये शुल्क देकर सीधे पांच वर्ष का लाइसेंस भी ले सकता है।
मध्यम कारोबारियों के लिए धर्मकांटा जरूरी
मध्यम श्रेणी के व्यवसायियों को 25 हजार से 1 लाख घनफीट तक खनिज भंडारण की अनुमति मिलेगी। इस श्रेणी के लिए 50 हजार रुपये का लाइसेंस शुल्क निर्धारित किया गया है और लाइसेंस की वैधता पांच वर्ष होगी।
इन व्यवसायियों के लिए स्टोरेज स्थल पर सीसीटीवी कैमरा और स्वयं का या साझा धर्मकांटा लगाना अनिवार्य होगा। यदि सार्वजनिक धर्मकांटे का उपयोग किया जाता है, तो वहां भी विभाग से जुड़ा सीसीटीवी कैमरा होना आवश्यक रहेगा।
बड़े कारोबारियों पर भी कड़ी निगरानी
वृहद श्रेणी के व्यवसायी 1 लाख से 10 लाख घनफीट तक खनिज का भंडारण कर सकेंगे। इसके लिए 2 लाख रुपये आवेदन शुल्क निर्धारित किया गया है। इस श्रेणी में भी धर्मकांटा और सीसीटीवी कैमरों को विभागीय पोर्टल से ऑनलाइन जोड़ना अनिवार्य होगा, ताकि विभाग रियल टाइम निगरानी कर सके।
बिना ई-चालान नहीं चलेगा कोई वाहन
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब बिना वैध ई-चालान या पारगमन पास के किसी भी खनिज का परिवहन नहीं किया जा सकेगा। ई-चालान प्रणाली को जियो-फेंसिंग और ऑनलाइन ट्रैकिंग तकनीक से जोड़ा जा रहा है। इससे खनिजों की आवाजाही पर लगातार नजर रखी जा सकेगी और फर्जी भंडारण, अवैध परिवहन तथा राजस्व चोरी जैसी गतिविधियों पर अंकुश लगेगा।
सरकार का क्या है उद्देश्य?
सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने से खनन और खनिज भंडारण की पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी। डिजिटल रिकॉर्ड, सीसीटीवी निगरानी और ऑनलाइन ट्रैकिंग के जरिए अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा। साथ ही नियमों का पालन करने वाले कारोबारियों को भी एक व्यवस्थित और पारदर्शी व्यवस्था का लाभ मिलेगा।
नई गाइडलाइन के लागू होने के बाद खनिज कारोबार से जुड़े सभी व्यवसायियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी करनी होंगी। ऐसा नहीं करने पर लाइसेंस संबंधी कार्रवाई के साथ अन्य कानूनी प्रावधान भी लागू किए जा सकते हैं।





