1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mon, 23 Feb 2026 01:29:11 PM IST
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Bihar Legislative Council : बिहार विधान परिषद में आज उस समय अनोखा और गंभीर मामला सामने आया जब सरकार के ही आदेश की अवहेलना का मुद्दा सदन में गूंज उठा। मामला सरकारी कार्यक्रमों में शिलापट्ट (उद्घाटन बोर्ड) पर विधान परिषद सदस्यों का नाम शामिल नहीं किए जाने और उन्हें आमंत्रण नहीं भेजे जाने से जुड़ा है। इस मुद्दे पर सदन में जोरदार हंगामा हुआ।
विधान परिषद सदस्य तरुण कुमार ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार द्वारा 7 दिसंबर 2021 को ग्रामीण विकास विभाग की ओर से स्पष्ट निर्देश जारी किया गया था कि किसी भी सरकारी कार्यक्रम में संबंधित सांसद, विधायक और विधान पार्षद को अनिवार्य रूप से आमंत्रित किया जाए। यदि वे उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होना चाहें तो उन्हें प्राथमिकता दी जाए। इतना ही नहीं, शिलापट्ट पर नाम अंकित करने की भी स्पष्ट व्यवस्था तय की गई थी।
तरुण कुमार ने सदन में कहा कि उनके पास सुबह 9:30 बजे तक का वीडियो फुटेज है, जिसमें साफ दिख रहा है कि समस्तीपुर विधानसभा क्षेत्र के मोरवा में लगे उद्घाटन बोर्ड पर विधान परिषद सदस्यों का नाम शामिल नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि न तो उन्हें निमंत्रण दिया जाता है और न ही उनके नाम को शिलापट्ट पर स्थान दिया जाता है, जो सीधे-सीधे सरकार के आदेश की अवहेलना है।
इस पर सभापति ने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकारी कार्यक्रम होगा तो उसमें विधान परिषद के सदस्य भाग ले सकते हैं और उनका नाम प्राथमिकता से रहेगा क्योंकि यह उच्च सदन है। उन्होंने संबंधित मामले की जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मंत्री अशोक चौधरी ने भी सदन में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा पूरी तरह से स्पष्ट है और सभी तकनीकी पदाधिकारियों को निर्देश जारी हैं कि सांसद, विधायक और विधान पार्षदों को अनिवार्य रूप से आमंत्रित किया जाए। हालांकि, उन्होंने माना कि कुछ जगहों पर तकनीकी स्तर पर गलती हो जाती है।
अशोक चौधरी ने बताया कि इस प्रश्न के आने के बाद जिलाधिकारी को सूचना दी गई है और जहां-जहां ऐसी शिकायतें मिली हैं, वहां पुराने शिलापट्ट हटवाकर नए बोर्ड लगवाए गए हैं। साथ ही संबंधित कार्यपालक अभियंता को शो-कॉज नोटिस जारी करने की बात भी कही गई है। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला अब प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी आदेशों के पालन पर सवाल खड़ा कर रहा है। सदन में उठे इस मुद्दे ने साफ कर दिया है कि यदि सरकारी निर्देशों की अवहेलना होती है तो उसका राजनीतिक और प्रशासनिक असर दोनों देखने को मिल सकता है।