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Bihar Property Registration : बिहार में जमीन निबंधन में फर्जीवाड़े पर लगेगा लगाम, जीआईएस मैपिंग से होगी पारदर्शी रजिस्ट्री

बिहार सरकार जमीन निबंधन में होने वाले फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठा रही है। अब प्लॉट रजिस्ट्री के समय जीआईएस मैपिंग, अक्षांश-देशांतर और तस्वीर अपलोड अनिवार्य होगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी।

Bihar Property Registration : बिहार में जमीन निबंधन में फर्जीवाड़े पर लगेगा लगाम, जीआईएस मैपिंग से होगी पारदर्शी रजिस्ट्री
Tejpratap
Tejpratap
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Bihar Land Registry : बिहार सरकार राज्य में जमीन निबंधन (Bihar Land Registry) से जुड़ी धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए एक बड़ा और अहम कदम उठाने जा रही है। अब जमीन या प्लॉट के निबंधन के समय जीआईएस मैपिंग (भौगोलिक सूचना प्रणाली मानचित्रण) अनिवार्य की जाएगी। इसके तहत निबंधन के दौरान प्लॉट का सटीक स्थान, उसके अक्षांश-देशांतर (Latitude-Longitude) और स्थल की तस्वीर अपलोड करनी होगी। इस नई व्यवस्था से जमीन की पहचान और सत्यापन आसान होगा, वहीं निबंधन प्रक्रिया में पारदर्शिता भी काफी बढ़ेगी।


यह महत्वाकांक्षी योजना मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग द्वारा तैयार की जा रही है। विभाग इस उद्देश्य के लिए एक विशेष सॉफ्टवेयर विकसित कर रहा है, जिसे जल्द ही पूरे राज्य में लागू किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि जीआईएस तकनीक के इस्तेमाल से जमीन से जुड़ी गड़बड़ियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा और आम लोगों को सुरक्षित व भरोसेमंद निबंधन सुविधा मिल सकेगी।


निबंधन डीआईजी सुशील कुमार सुमन ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि जमीन की जीआईएस मैपिंग को लेकर प्रस्ताव तैयार किया गया है और उस पर तेजी से काम चल रहा है। इसके लिए आधुनिक तकनीक से लैस सॉफ्टवेयर बनाया जा रहा है, ताकि निबंधन के समय प्लॉट की भौगोलिक स्थिति को सटीक रूप से दर्ज किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था लागू होने के बाद जमीन के गलत विवरण, दोहरी रजिस्ट्री और सीमाओं को लेकर होने वाले विवादों में काफी कमी आएगी।


विभागीय जानकारी के अनुसार, जीआईएस तकनीक के उपयोग से जमीन संबंधी सभी सूचनाओं का डिजिटलीकरण संभव होगा। इसके साथ ही मैपिंग और भौगोलिक संदर्भों का सटीक विश्लेषण किया जा सकेगा। जब किसी प्लॉट की तस्वीर और उसका लोकेशन डेटा ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा, तो न केवल अधिकारी बल्कि आम नागरिक भी जमीन की वास्तविक स्थिति को आसानी से समझ सकेंगे। इससे जमीन की पहचान सरल होगी और निबंधन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी।


सरकार का मानना है कि यह पहल जमीन माफिया और दलालों पर भी नकेल कसने में मददगार साबित होगी। अब फर्जी दस्तावेजों या गलत लोकेशन दिखाकर जमीन की रजिस्ट्री कराना मुश्किल हो जाएगा। जीआईएस मैपिंग के कारण हर प्लॉट का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा, जो भविष्य में किसी भी तरह के विवाद की स्थिति में प्रमाण के तौर पर उपयोग किया जा सकेगा।


इसी कड़ी में निबंधन विभाग ने हाल ही में ई-निबंधन सॉफ्टवेयर भी लागू किया है, जिससे नागरिक सुविधाओं में बड़ा सुधार देखने को मिला है। जुलाई में शुरू हुई इस व्यवस्था के तहत अब जमीन, फ्लैट या अन्य संपत्ति के निबंधन के लिए घर बैठे ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। आवेदन के समय ही शुल्क की गणना, ऑनलाइन भुगतान और अपॉइंटमेंट बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।


ई-निबंधन व्यवस्था के तहत आवेदक को केवल अपॉइंटमेंट की तय तारीख पर एक बार निबंधन कार्यालय जाना होता है। वहां फोटो, बायोमेट्रिक और केवाईसी की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसके बाद दस्तावेज का निबंधन कर दिया जाता है और उसी दिन निबंधित दस्तावेज की पीडीएफ कॉपी उपलब्ध करा दी जाती है।


विभागीय आंकड़ों के अनुसार, 19 दिसंबर तक कुल 6 लाख 20 हजार 551 लोगों को रजिस्टर्ड डीड की ऑनलाइन कॉपी उपलब्ध कराई जा चुकी है। खास बात यह है कि अब निबंधित दस्तावेज की पीडीएफ कॉपी उसी दिन लोगों के व्हाट्सएप पर भी भेजी जा रही है। इससे लोगों को कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिली है और समय व संसाधनों की बचत हो रही है।


सरकार का कहना है कि जीआईएस मैपिंग और ई-निबंधन जैसी डिजिटल पहलें बिहार में जमीन निबंधन व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और नागरिकों के अनुकूल बनाएंगी। आने वाले समय में इन सुधारों से न केवल फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी, बल्कि आम लोगों का भरोसा भी सरकारी व्यवस्था पर और मजबूत होगा।

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