Bihar land record : बिहार में जमीन मालिकों के लिए बड़ी राहत, इस महीने से पुराने सेल डीड और रजिस्ट्री दस्तावेज ऑनलाइन डाउनलोड होंगे

बिहार सरकार जून 2026 से राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की वेबसाइट पर 1990 और उससे पुराने भूमि दस्तावेज, रजिस्ट्री कागजात और सर्वेक्षण रिकॉर्ड डिजिटल रूप में उपलब्ध कराएगी। भूमि मालिक अब अंचल कार्यालयों के चक्कर लगाए बिना ऑनलाइन दस्तावेज डाउनलोड कर सकेंग

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Sun, 15 Feb 2026 01:40:04 PM IST

Bihar land record : बिहार में जमीन मालिकों के लिए बड़ी राहत, इस महीने से पुराने सेल डीड और रजिस्ट्री दस्तावेज ऑनलाइन डाउनलोड होंगे

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Bihar land record : बिहार के लाखों जमीन मालिकों के लिए राहत की बड़ी खबर आई है। राज्य सरकार ने जून 2026 से राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से पुराने भूमि दस्तावेज (Deeds), रजिस्ट्री कागजात और संबंधित रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य जमीन मालिकों को अंचल कार्यालयों के चक्कर काटने से मुक्ति देना और पारदर्शिता बढ़ाना है।


इस सुविधा के तहत भूमि मालिक खाता नंबर, प्लॉट नंबर और जिला जैसी बुनियादी जानकारी दर्ज करके 1990 और उससे पुराने रिकॉर्ड आसानी से डाउनलोड कर सकेंगे। 1990 और 2005 के बीच के रिकॉर्ड के चार करोड़ से अधिक पृष्ठ पहले ही स्कैन किए जा चुके हैं, जबकि पुराने दस्तावेजों को प्राथमिकता दी जा रही है। पोर्टल के लाइव होने के बाद लंबित शुल्क का भुगतान भी ऑनलाइन किया जा सकेगा और दस्तावेज मिनटों में डिजिटल रूप से प्राप्त होंगे।


यह कदम भूमि प्रशासन में व्यापक सुधार का हिस्सा है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, जिनके पास राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का पोर्टफोलियो है, ने इसे अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है। उन्होंने कहा कि पुराने जटिल भूमि विवाद और फर्जी दस्तावेज राज्य में अपराध और सामाजिक तनाव का प्रमुख कारण हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी कई बार कहा है कि राज्य में लगभग 60% अपराध भूमि विवादों से संबंधित हैं, इसलिए पारदर्शी और सुलभ रिकॉर्ड अत्यंत आवश्यक हैं।


विभाग ने दाखिल-खारिज (Mutation) के मामलों की समय सीमा भी तय की है। निर्विवाद उत्तराधिकार या बिक्री-आधारित दाखिल-खारिज का निपटारा एक सप्ताह में, विवादित मामलों की अधिकतम सीमा 11 दिन, विशेष श्रेणी के रैयतों के लिए 14 दिन और सामान्य त्रुटियों के मामलों के लिए 15 दिन तय की गई है। जटिल मामलों के लिए अधिकारियों को 75 दिनों का लक्ष्य दिया गया है।


अधिकारियों का दावा है कि पिछले दो वर्षों में दाखिल-खारिज के ऑनलाइन निपटान की दर लगभग 25% से बढ़कर 75% हो गई है। मार्च 2026 तक 46 लाख से अधिक लंबित आवेदनों का निपटारा कर लिया गया है। इसके अलावा जारी भूमि सर्वेक्षण के तहत 40 लाख से अधिक किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है, जिसे 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।


इस नई डिजिटल व्यवस्था से भूमि रिकॉर्ड तक पहुंच आसान होने के साथ-साथ कागजी प्रक्रिया और लंबी कतारों का बोझ भी कम होगा। जमीन मालिक अब घर या कार्यालय से ही दस्तावेज डाउनलोड कर सकेंगे। अधिकारी मानते हैं कि डिजिटलीकरण और पारदर्शिता भूमि विवादों का स्थायी समाधान हैं।


विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल न केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाएगी, बल्कि सामाजिक तनाव और अपराध में भी कमी लाएगी। लंबे समय से अंचल कार्यालयों के पुराने तरीके और कर्मचारियों के प्रतिरोध को दरकिनार कर यह कदम जमीन मालिकों के लिए राहत का बड़ा संदेश है। जून 2026 से शुरू होने वाली यह ऑनलाइन सुविधा बिहार में भूमि प्रशासन में डिजिटल क्रांति का प्रतीक होगी। यह पहल जमीन मालिकों को पुराने सिस्टम से वास्तविक मुक्ति देने के साथ-साथ पारदर्शिता, सुविधा और सुरक्षा के नए मानक स्थापित करेगी।