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बिहार में जमीन मापी का बड़ा बदलाव! अब 7 दिन में मापी, 14 दिन में रिपोर्ट—सब कुछ ऑनलाइन

बिहार सरकार ने जमीन मापी की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन कर दिया है। अब 7 दिन में मापी और 14 दिन में रिपोर्ट देना अनिवार्य होगा, जिससे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

बिहार में जमीन मापी का बड़ा बदलाव! अब 7 दिन में मापी, 14 दिन में रिपोर्ट—सब कुछ ऑनलाइन
Tejpratap
Tejpratap
4 मिनट

बिहार में जमीन से जुड़े विवादों और लंबी प्रक्रियाओं को खत्म करने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य में जमीन मापी की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल कर दिया गया है। आवेदन से लेकर मापी और रिपोर्ट तक का पूरा सिस्टम ऑनलाइन होगा। इस फैसले से आम लोगों को अंचल कार्यालय के बार-बार चक्कर लगाने से छुटकारा मिलेगा और प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।


सरकार ने सभी जिलों को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं कि अब जमीन मापी के लिए कोई भी ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। साथ ही मापी के बाद रिपोर्ट भी कागज पर देने की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। यदि कोई कर्मचारी इस नए नियम का पालन नहीं करता है, तो संबंधित अंचल के अमीन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


क्या है नई व्यवस्था

नई व्यवस्था के तहत जमीन मापी के दौरान तकनीक का विशेष इस्तेमाल किया जाएगा। अमीन को मौके पर ही जियो टैग फोटो लेकर उसे पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसका मतलब है कि मापी के दौरान ली गई तस्वीरों में स्थान और समय की पूरी जानकारी दर्ज होगी, जिससे किसी भी तरह की गड़बड़ी या फर्जीवाड़े की संभावना कम हो जाएगी।


सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि जियो टैग फोटो अपलोड नहीं की जाती है, तो मापी की प्रक्रिया अधूरी मानी जाएगी। इस कदम से पूरे सिस्टम में पारदर्शिता आएगी और जमीन विवादों में कमी आने की उम्मीद है।


तय समय सीमा में होगा काम

नई डिजिटल व्यवस्था में समय सीमा का भी सख्ती से पालन करना होगा। सरकार ने हर चरण के लिए निश्चित समय निर्धारित किया है:

आवेदन के 3 दिनों के भीतर अमीन की नियुक्ति

इसके बाद संबंधित पक्षों को नोटिस जारी

आवेदन के 7 दिनों के भीतर जमीन की मापी पूरी

मापी के 14 दिनों के भीतर रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड

इस समयबद्ध प्रक्रिया से पहले जहां महीनों तक मापी लंबित रहती थी, अब वह कुछ ही दिनों में पूरी हो जाएगी।


लोगों को मिलेगी बड़ी राहत

इस नई व्यवस्था से आम रैयतों (जमीन मालिकों) को काफी राहत मिलेगी। पहले लोगों को मापी के लिए कई बार अंचल कार्यालय जाना पड़ता था, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती थी। कई मामलों में दलालों की भूमिका भी सामने आती थी, जिससे लोगों को परेशानी होती थी।अब लोग घर बैठे ही ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे और पूरी प्रक्रिया की जानकारी पोर्टल के माध्यम से प्राप्त कर पाएंगे। इससे न केवल सुविधा बढ़ेगी बल्कि भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगेगी।


निगरानी भी होगी सख्त

सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए भी सख्त इंतजाम किए हैं। अब जमीन मापी से जुड़े सभी मामलों की मॉनिटरिंग अपर समाहर्ता (Additional Collector) स्तर से की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी अधिकारी और कर्मचारी नियमों का सही तरीके से पालन करें। पिपरा की अंचल अधिकारी उमा कुमारी ने बताया कि इस नई व्यवस्था से लोगों को काफी सहूलियत मिलेगी। उन्होंने कहा कि अब रैयतों को बार-बार कार्यालय आने की जरूरत नहीं पड़ेगी और तय समय सीमा के भीतर उनका काम पूरा हो जाएगा।


पारदर्शिता और गति पर जोर

बिहार सरकार का मानना है कि डिजिटल सिस्टम लागू होने से जमीन मापी की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और विश्वसनीय बनेगी। जियो टैगिंग, ऑनलाइन रिपोर्ट और समयबद्ध प्रक्रिया जैसे कदमों से विवादों में कमी आएगी और लोगों का भरोसा सरकारी तंत्र पर बढ़ेगा।


कुल मिलाकर यह फैसला राज्य में भूमि प्रशासन को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अगर यह व्यवस्था सही तरीके से लागू होती है, तो आने वाले समय में जमीन से जुड़े विवादों में काफी कमी देखने को मिल सकती है और आम लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है।