1st Bihar Published by: First Bihar Updated Fri, 02 Jan 2026 09:26:31 AM IST
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Bihar land acquisition : बिहार में विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए राज्य सरकार जमीन संबंधी मामलों के निपटारे को लेकर कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अधिकारियों को अब इस दिशा में और अधिक सक्रिय और जवाबदेह बनाने के लिए टाइट कर दिया गया है। अधिकारियों के कामकाज में सुधार और मुआवजा भुगतान में होने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए अब नई प्रक्रिया शुरू की गई है।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अधिकारियों की समीक्षा के अनुसार राज्य में अधिकांश जमीन अधिग्रहण (भूमि अर्जन) के मामले मुआवजे के भुगतान की समस्या के कारण लंबित हैं। विभिन्न जिलों में परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण में रैयतों को समय पर मुआवजा न मिलने के कारण परियोजनाओं में देरी हो रही है। सड़क, रेलवे, सरकारी भवन, नहर, तालाब जैसी विकास परियोजनाओं को प्रभावित करने वाली ये समस्याएं अब जल्द ही खत्म होंगी।
जानकारी के मुताबिक, अब रैयत अपने कागजात लेकर प्रत्यक्ष रूप से भू-अर्जन पदाधिकारी से मिल सकते हैं। इसके लिए विशेष दिन निर्धारित किए गए हैं – कार्य दिवस वाले शुक्रवार और शनिवार को रैयत अपने दस्तावेजों के साथ संबंधित भू-अर्जन पदाधिकारी से मिलकर अपने मामले का समाधान करवा सकते हैं। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भूमि अधिग्रहण से संबंधित समस्याओं के कारण परियोजनाओं में विलंब न हो और रैयतों को उनका मुआवजा समय पर मिल सके।
इस संबंध में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सभी भू-अर्जन पदाधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि रैयतों के दस्तावेजों और उनके मुआवजा भुगतान से संबंधित सभी समस्याओं को गंभीरता से देखें और उन्हें बिना किसी देरी के हल करें। विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि इस प्रक्रिया की जानकारी क्षेत्रीय स्तर पर प्रचारित की जाए। संबंधित कार्यालयों में नोटिस बोर्ड पर स्पष्ट संदेश भी लगाया जाएगा ताकि आम लोग आसानी से जानकारी प्राप्त कर सकें।
प्रधान सचिव, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, सीके अनिल ने हाल ही में राज्य में भू-अर्जन की समस्याओं और मुआवजा भुगतान में होने वाली बाधाओं को लेकर जिला भू-अर्जन पदाधिकारियों के साथ एक विस्तृत बैठक की। बैठक में उन्होंने हर जिले में भूमि अधिग्रहण से जुड़ी समस्याओं की समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक कारण को गंभीरता से देखें और त्वरित समाधान निकालें। सीके अनिल ने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य की विकास परियोजनाओं में तेजी लाने के लिए रैयतों को मुआवजा देने में किसी भी तरह की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि भू-अर्जन संबंधी मामलों की नियमित समीक्षा के लिए हर सप्ताह मंगलवार को जिला स्तर की बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक की अध्यक्षता जिला पदाधिकारी करेंगे और इसमें राजस्व विभाग और परियोजना से जुड़े अन्य विभागों के अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे। बैठक का उद्देश्य यही है कि किसी भी भू-अर्जन समस्या को तुरंत पहचान कर उसका समाधान किया जा सके और आवश्यक कार्रवाई उसी समय की जा सके।
विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण में होने वाली देरी का सबसे बड़ा कारण मुआवजे का भुगतान था। कई रैयत लंबे समय से अपनी जमीनों के मुआवजे की प्रतीक्षा कर रहे थे, जिससे परियोजनाओं में बाधा आ रही थी। नए निर्देश और बैठक प्रणाली के लागू होने के बाद अब रैयत अपने मामलों को सीधे अधिकारियों के सामने रखकर तुरंत समाधान पा सकेंगे। यह व्यवस्था प्रशासन और जनता दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगी।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की यह पहल राज्य में विकास परियोजनाओं की गति बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके अलावा, रैयतों के अधिकार सुरक्षित होंगे और उन्हें समय पर मुआवजा मिल सकेगा। अधिकारियों की सक्रिय निगरानी और सप्ताह में नियमित समीक्षा बैठक सुनिश्चित करेगी कि कोई भी मामला अनसुलझा न रहे।इस प्रकार, बिहार सरकार की यह नई पहल न केवल भूमि अधिग्रहण के मामलों को पारदर्शी बनाएगी, बल्कि रैयतों और विकास परियोजनाओं दोनों के लिए समाधान सुनिश्चित करेगी।