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Bihar Land Record: जमीन मालिक ध्यान दें! नाम-पिता का नाम से लेकर खाता-खेसरा तक सुधारेगी सरकार, शुरू हुआ अभियान

बिहार में जमीन मालिकों के लिए बड़ी खबर है। 90 लाख जमाबंदियों को दुरुस्त करने के लिए विशेष अभियान शुरू हो गया है। नाम, पिता का नाम, खाता-खेसरा, रकबा और लगान की गलतियां सुधारी जाएंगी। अभियान 31 अक्टूबर तक चलेगा।

Bihar Land Record: जमीन मालिक ध्यान दें! नाम-पिता का नाम से लेकर खाता-खेसरा तक सुधारेगी सरकार, शुरू हुआ अभियान
Tejpratap
Tejpratap
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Bihar Land Record : बिहार के जमीन मालिकों के लिए बड़ी और जरूरी खबर है। अगर आपकी जमीन की जमाबंदी में नाम गलत दर्ज है, पिता के नाम में गलती है, खाता-खेसरा में गड़बड़ी है या जमीन का रकबा और लगान सही नहीं है, तो अब इन रिकॉर्ड को दुरुस्त कराने का मौका है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने 15 सितंबर से जमाबंदी अपडेट और उत्तराधिकार नामांतरण का विशेष अभियान शुरू कर दिया है।

यह अभियान 31 अक्टूबर तक मिशन मोड में चलाया जाएगा। सरकार ने इस दौरान करीब 90 लाख जमाबंदियों को दुरुस्त करने का लक्ष्य तय किया है। अभियान की खास बात यह है कि इसमें सिर्फ ऑनलाइन रिकॉर्ड की गलतियां ही नहीं, बल्कि पुराने जमाबंदी पंजी और डिजिटल रिकॉर्ड के बीच अंतर को भी जांचा जाएगा।

बिहार में करीब साढ़े चार करोड़ जमाबंदियां

बिहार में जमीन से जुड़े रिकॉर्ड का बड़ा हिस्सा अब डिजिटल स्वरूप में उपलब्ध है। राज्य में करीब साढ़े चार करोड़ जमाबंदियां दर्ज हैं। इनमें लगभग 90 लाख जमाबंदियों में किसी न किसी तरह की त्रुटि, अधूरी जानकारी या रिकॉर्ड संबंधी समस्या सामने आने की बात कही जा रही है।यानी मोटे तौर पर देखा जाए तो हर पांचवीं जमाबंदी में सुधार की जरूरत हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने अब विशेष अभियान शुरू किया है, ताकि जमीन के रिकॉर्ड को ज्यादा सटीक और अपडेट किया जा सके।

नाम से लेकर रकबा और लगान तक की होगी जांच

इस अभियान के दौरान जमाबंदी में दर्ज जमीन से जुड़ी प्रमुख जानकारियों का पुराने मूल रिकॉर्ड से मिलान किया जाएगा। इसमें खास तौर पर रैयत का नाम, पिता का नाम, खाता नंबर, खेसरा नंबर, जमीन का रकबा और लगान जैसी जानकारी शामिल है।अगर डिजिटल जमाबंदी में दर्ज जानकारी पुराने जमाबंदी पंजी या उपलब्ध मूल रिकॉर्ड से अलग मिलती है, तो नियमानुसार उसे दुरुस्त किया जाएगा।इसके अलावा ऐसी जमाबंदियों को भी अभियान में शामिल किया जाएगा, जिनमें शून्य रकबा, शून्य लगान दर्ज है या जिनमें जरूरी जानकारी पूरी तरह उपलब्ध नहीं है।इसका सीधा फायदा जमीन मालिकों को मिल सकता है, क्योंकि रिकॉर्ड में छोटी सी गलती भी आगे चलकर दाखिल-खारिज, रजिस्ट्री, बैंक लोन या जमीन विवाद जैसी परिस्थितियों में परेशानी खड़ी कर सकती है।

मृत व्यक्ति के नाम पर चल रही जमाबंदी भी होगी अपडेट

अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उत्तराधिकार नामांतरण भी है। राज्य में कई ऐसे मामले हैं, जहां जमीन के वास्तविक मालिक की मृत्यु हो चुकी है, लेकिन जमाबंदी अभी भी उनके नाम पर ही चल रही है।ऐसे मामलों की पहचान की जाएगी। इसके बाद राजस्व कर्मचारियों की ओर से वैध उत्तराधिकारियों की वंशावली तैयार करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई के बाद मृत व्यक्ति के स्थान पर उसके वैध उत्तराधिकारियों के नाम जमाबंदी और उत्तराधिकार नामांतरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।इससे जमीन के रिकॉर्ड में वास्तविक हकदारों का नाम दर्ज करने में मदद मिलेगी और भविष्य में उत्तराधिकार से जुड़े विवादों को कम करने में भी सहायता मिल सकती है।

31 अक्टूबर तक पूरा करना होगा अभियान

सरकार ने इस पूरे अभियान को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का निर्देश दिया है। 15 सितंबर से शुरू हुआ यह अभियान 31 अक्टूबर तक चलेगा। यानी अधिकारियों और कर्मचारियों के पास रिकॉर्ड की जांच और सुधार के लिए सीमित समय है।मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की ओर से अभियान को लेकर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। प्रशासनिक स्तर पर इसकी लगातार निगरानी की जाएगी, ताकि तय समय सीमा के भीतर काम पूरा हो सके।

डीएम और कमिश्नर करेंगे निगरानी

अभियान की मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी जिला और प्रमंडल स्तर के अधिकारियों को भी दी गई है। डीएम और कमिश्नर अभियान की प्रगति पर नजर रखेंगे। वहीं अंचल स्तर पर सीओ को रोजाना काम की रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।इससे विभाग को यह पता चल सकेगा कि किस जिले और अंचल में कितनी जमाबंदियों की जांच हुई, कितने रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिली और कितने रिकॉर्ड को दुरुस्त किया गया।

जमीन मालिकों के लिए क्यों अहम है यह अभियान?

जमीन के रिकॉर्ड में नाम, खाता, खेसरा या रकबा जैसी जानकारी गलत होने पर भविष्य में कई तरह की दिक्कतें सामने आ सकती हैं। कई बार रिकॉर्ड में छोटी गलती के कारण जमीन के स्वामित्व को लेकर विवाद भी पैदा हो जाता है।जमाबंदी सही और अपडेट रहने से जमीन की रजिस्ट्री, दाखिल-खारिज, बैंक से लोन और दूसरे राजस्व कार्यों में सुविधा हो सकती है। वहीं मृत व्यक्ति के नाम पर चल रही जमाबंदी को उत्तराधिकारियों के नाम अपडेट करने से भविष्य में संपत्ति के बंटवारे और स्वामित्व को लेकर होने वाली परेशानी कम करने में मदद मिल सकती है।इसके अलावा राज्य में चल रहे विशेष भूमि सर्वे और रिकॉर्ड अपडेट के काम के लिए भी सही जमाबंदी महत्वपूर्ण है। जब जमीन का रिकॉर्ड स्पष्ट और दुरुस्त होगा, तो आगे की प्रक्रियाओं में भी सहूलियत होने की उम्मीद है।

जमीन मालिक रखें अपने रिकॉर्ड पर नजर

ऐसे में बिहार के जमीन मालिकों के लिए यह अभियान महत्वपूर्ण है। खासकर जिन लोगों की जमाबंदी में नाम, पिता का नाम, खाता-खेसरा, रकबा या लगान से जुड़ी गलती है, उन्हें अपने जमीन रिकॉर्ड की जानकारी जरूर जांचनी चाहिए। सरकार का यह अभियान अगर तय लक्ष्य के अनुसार पूरा होता है, तो लाखों जमीन मालिकों के पुराने रिकॉर्ड में मौजूद गड़बड़ियां दूर हो सकती हैं और बिहार में जमीन से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड को और अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद मिल सकती है।