Bihar Government School: बिहार के सरकारी विद्यालयों की तस्वीर अब जल्द ही बदली-बदली नजर आएगी। राज्यभर के प्रारंभिक से लेकर उच्च माध्यमिक विद्यालयों तक भवनों के रंग-रोगन, मरम्मत और जरूरी सुविधाओं को दुरुस्त करने की तैयारी तेज कर दी गई है। स्कूलों को एक जैसी पहचान देने के लिए भवनों के रंग और डिजाइन का मानक भी तय किया गया है। यानी आने वाले दिनों में बिहार के सरकारी स्कूलों में पहुंचते ही एकरूपता और नया लुक साफ नजर आएगा।
विभागीय स्तर पर जारी निर्देशों के मुताबिक राज्य के सभी संबंधित सरकारी विद्यालयों में भवनों की रंगाई-पुताई के साथ-साथ छोटी-मोटी मरम्मत के काम भी कराए जाएंगे। स्कूल भवन के बाहरी और अंदरूनी हिस्सों के लिए अलग-अलग रंग निर्धारित किए गए हैं। इसका मकसद सिर्फ स्कूलों को सुंदर बनाना नहीं, बल्कि पूरे राज्य में सरकारी विद्यालयों की एक समान पहचान तैयार करना भी है।
स्कूलों के लिए तय होगा खास रंग
नई व्यवस्था के तहत कक्षा एक से आठ तक संचालित होने वाले प्रारंभिक विद्यालयों के भवनों के बाहरी हिस्से में गुलाबी रंग किया जाएगा। इसके किनारों पर मैरून रंग की पट्टी रहेगी। वहीं, भवन के अंदर के हिस्से में सफेद रंग किया जाएगा। किचेन शेड के बाहरी हिस्से के लिए भी इसी तरह निर्धारित रंग का इस्तेमाल किया जाएगा।
दूसरी ओर कक्षा 9 से 12 तक के उच्च माध्यमिक विद्यालयों के भवनों के लिए ग्रे रंग निर्धारित किया गया है। इसके किनारों पर नीली पट्टी बनाई जाएगी। इस तरह प्रारंभिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों की अलग पहचान भी बनी रहेगी और पूरे राज्य में रंगों को लेकर एकरूपता भी दिखाई देगी।
15 नवंबर तक पूरा करना होगा काम
विद्यालयों में रंग-रोगन और आवश्यक सुधार कार्यों को पूरा करने के लिए 15 नवंबर 2026 तक की समय सीमा तय की गई है। विभाग की ओर से स्कूलों के प्रधानाध्यापकों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि निर्धारित समय के भीतर काम पूरा कराया जाए।
दरअसल, निरीक्षण के दौरान कई विद्यालयों में निर्धारित मानकों के अनुसार रंग-रोगन नहीं होने की बात सामने आती रही है। कहीं भवन का रंग अलग था तो कहीं किनारों पर तय रंग की पट्टी नहीं बनाई गई थी। अब विभाग इस मामले में सख्ती बरतने की तैयारी में है, ताकि सभी स्कूल एक समान मानक के अनुरूप नजर आएं।
सिर्फ पेंटिंग नहीं, कई काम होंगे
सरकारी स्कूलों को नया लुक देने की योजना सिर्फ रंग-रोगन तक सीमित नहीं है। भवनों की छोटी-मोटी मरम्मत, फर्श की स्थिति सुधारने, पेयजल की व्यवस्था और शौचालयों को दुरुस्त करने जैसे जरूरी काम भी कराए जाएंगे। इसके अलावा विद्यालय की दीवारों पर नामांकन से जुड़ी जानकारी और बच्चों को प्रेरित करने वाले स्लोगन भी लिखवाए जाएंगे। इससे स्कूल परिसर ज्यादा आकर्षक और व्यवस्थित दिखाई देगा। विभाग का मानना है कि बेहतर और साफ-सुथरा स्कूल वातावरण बच्चों के लिए भी सकारात्मक माहौल तैयार करेगा।
स्कूलों को मिलेगी 50 हजार तक की राशि
इन विकास कार्यों के लिए विद्यालयों को वित्तीय अनुमति भी दी गई है। प्रारंभिक और माध्यमिक विद्यालयों में आवश्यक कार्यों को पूरा कराने के लिए अधिकतम 50 हजार रुपये तक की राशि खर्च की जा सकेगी। यह राशि निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के तहत खर्च करनी होगी।
इस पूरी कवायद के बाद बिहार के सरकारी विद्यालयों की तस्वीर काफी हद तक एक जैसी नजर आने की उम्मीद है। अलग-अलग जिलों में अलग-अलग रंगों और अधूरे रखरखाव की तस्वीर के बजाय अब स्कूलों में एक निर्धारित डिजाइन और रंग योजना दिखाई देगी।
यानी आने वाले समय में बिहार के सरकारी स्कूलों में सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि स्कूल भवन और परिसर भी बदलाव की कहानी कहते नजर आएंगे। अगर निर्धारित समयसीमा में काम पूरा हुआ तो 15 नवंबर के बाद राज्य के सरकारी स्कूलों का बदला हुआ लुक छात्रों, अभिभावकों और स्थानीय लोगों को साफ दिखाई दे सकता है।





