Bihar News : बिहार में अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई को और तेज करने के लिए पुलिस मुख्यालय ने बड़ा अभियान शुरू करने का फैसला लिया है। राज्य के सभी जिलों में देसी शराब के लिए बदनाम अनुमंडलों और थानों की अपडेट सूची तैयार की जाएगी। इसके आधार पर एक समय में दो से तीन संवेदनशील इलाकों को चिह्नित कर वहां लगातार विशेष अभियान चलाया जाएगा। पुलिस मुख्यालय ने इस संबंध में सभी जिलों के एसएसपी और एसपी को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
यह निर्णय हाल ही में मोतिहारी जहरीली शराब कांड के बाद लिया गया है, जिसने राज्य में शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। इसके बाद मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो ने चौकीदार स्तर से लेकर एसपी स्तर तक के अधिकारियों के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की है।
नई एसओपी के तहत अब हर स्तर पर जवाबदेही तय की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में चौकीदार और दफादार जबकि शहरी इलाकों में बीट पुलिसकर्मियों को अपने-अपने क्षेत्र में अवैध शराब के कारोबार की जानकारी प्रतिदिन उपलब्ध करानी होगी। इसके अलावा सभी थानों के अपराध मानचित्र पर अवैध शराब से जुड़े हॉटस्पॉट चिन्हित किए जाएंगे, ताकि वहां टाइगर मोबाइल और पुलिस टीमों द्वारा नियमित छापेमारी की जा सके।
पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि शराबबंदी कानून को लागू करने में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। एसपी स्तर के अधिकारियों को थानाध्यक्ष, सर्किल इंस्पेक्टर और डीएसपी के कार्यों की नियमित समीक्षा करने का निर्देश दिया गया है। वहीं, क्षेत्रीय आईजी और डीआईजी को एसपी के कामकाज की निगरानी कर रिपोर्ट तैयार करनी होगी। मासिक समीक्षा के दौरान यह भी देखा जाएगा कि संबंधित क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार किस हद तक नियंत्रित हुआ है।
एसओपी के अनुसार, तस्करों और अवैध कारोबारियों की सूचना मिलने पर थानाध्यक्षों को तुरंत छापेमारी करनी होगी। इसमें किसी भी तरह की देरी को गंभीर लापरवाही माना जाएगा। इसके साथ ही बेहतर प्रदर्शन करने वाले पुलिस अधिकारियों को पुरस्कृत करने और खराब प्रदर्शन करने वालों को दंडित करने की व्यवस्था भी लागू की गई है।
विशेष रूप से त्योहार, शादी-विवाह, जलसा, चुनाव और अन्य बड़े आयोजनों के दौरान अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। इन अवसरों पर अवैध शराब की खपत बढ़ने की आशंका को देखते हुए चौकीदारों और पुलिसकर्मियों को पहले से ही सक्रिय रहने को कहा गया है। उन्हें अपने क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखते हुए अग्रिम सूचना देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसके अलावा स्कूल-कॉलेज, आवासीय क्षेत्रों, बाजारों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों के आसपास निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस को इन स्थानों पर नियमित गश्त करने और संदिग्ध व्यक्तियों पर कड़ी नजर रखने को कहा गया है।
पुलिस मुख्यालय ने सभी एसपी को सप्ताह में कम से कम एक बार जिले में अवैध शराब के खिलाफ विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है। इस दौरान श्वान दस्ते (डॉग स्क्वायड) का भी उपयोग किया जाएगा, ताकि छिपाकर रखी गई शराब को आसानी से खोजा जा सके। थानेदारों को भी निर्देश दिया गया है कि वे महत्वपूर्ण अभियानों का नेतृत्व खुद करें और उनकी नियमित समीक्षा करें।
राज्य सरकार का मानना है कि इन सख्त उपायों से अवैध शराब के नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकेगा। नई एसओपी के जरिए न केवल जवाबदेही तय की गई है, बल्कि जमीनी स्तर पर सूचना तंत्र को भी मजबूत करने की कोशिश की गई है। अब देखना यह होगा कि इन निर्देशों का कितना प्रभावी पालन होता है और राज्य में शराबबंदी कानून को लागू करने में कितनी सफलता मिलती है।






