1st Bihar Published by: First Bihar Updated Mar 30, 2026, 12:24:24 PM
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Ganga Aarti : वाराणसी की पहचान सिर्फ मंदिरों से नहीं, बल्कि गंगा घाटों पर होने वाली भव्य महाआरती से भी है। हर रोज़ शाम को होने वाली इस दिव्य आरती को देखने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। अब इसी तर्ज पर बिहार में भी गंगा घाटों पर महाआरती का आयोजन शुरू होने जा रहा है, जिससे यहां भी आध्यात्मिक और पर्यटन माहौल को नई पहचान मिलेगी।
बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम (BSTDC) की पहल पर यह खास आयोजन किया जाएगा। इसका उद्देश्य न केवल श्रद्धालुओं को एक आध्यात्मिक अनुभव देना है, बल्कि राज्य में धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा देना है। लंबे समय से ऐसी मांग उठ रही थी कि बिहार में भी बनारस की तरह गंगा आरती शुरू की जाए, जिसे अब हकीकत में बदला जा रहा है।
पटना के इन घाटों पर होगी शुरुआत
पहले चरण में पटना के दो प्रमुख घाटों को इस योजना के लिए चुना गया है। इनमें मित्तन घाट और पर्यटन घाट शामिल हैं। इन घाटों पर गंगा महाआरती को नियमित रूप से आयोजित करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
निगम की ओर से इसके लिए टेंडर भी जारी कर दिया गया है। इच्छुक उद्यमियों से प्रस्ताव मांगे गए हैं, जो इस आयोजन को पेशेवर तरीके से संचालित कर सकें। टेंडर की शर्तों के अनुसार, चयनित एजेंसी को एक लाख रुपये की सुरक्षा राशि जमा करनी होगी और पूरे आयोजन की जिम्मेदारी संभालनी होगी।
क्या-क्या होंगी व्यवस्थाएं
गंगा महाआरती को भव्य और आकर्षक बनाने के लिए कई तरह की व्यवस्थाएं की जाएंगी। इसमें घाट की सजावट, फूल-मालाएं, पूजा सामग्री, योग्य ब्राह्मणों की व्यवस्था, लाइटिंग और साउंड सिस्टम शामिल होंगे। साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बैठने और सुरक्षा के भी इंतजाम किए जाएंगे। इस आयोजन को बनारस की तर्ज पर तैयार किया जाएगा, जहां मंत्रोच्चार, दीपों की श्रृंखला और भक्ति संगीत के बीच गंगा आरती का दिव्य दृश्य लोगों को आध्यात्मिक अनुभव कराएगा।
अन्य जिलों में भी विस्तार की योजना
पटना में सफल शुरुआत के बाद इस योजना को राज्य के अन्य जिलों तक भी विस्तारित किया जाएगा। खासतौर पर भागलपुर और बक्सर जैसे गंगा किनारे बसे शहरों में भी महाआरती आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है। इससे पूरे बिहार में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। पहले से ही सीढ़ी घाट (बख्तियारपुर), सुल्तानगंज और हाजीपुर में भी छोटे स्तर पर गंगा आरती का आयोजन किया जा रहा है, जिसे अब और व्यवस्थित और भव्य रूप देने की योजना है।
क्या है इसका उद्देश्य?
इस पहल के पीछे दो मुख्य उद्देश्य हैं—पहला, लोगों की धार्मिक आस्था को सम्मान देना और दूसरा, बिहार में पर्यटन को बढ़ावा देना। गंगा महाआरती जैसे आयोजन से न केवल स्थानीय लोगों को लाभ मिलेगा, बल्कि बाहर से आने वाले पर्यटकों की संख्या भी बढ़ेगी।
इसके अलावा, इस आयोजन के माध्यम से गंगा की स्वच्छता और पवित्रता के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने का भी प्रयास किया जाएगा। सरकार चाहती है कि लोग गंगा को केवल आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि स्वच्छ और संरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी समझें।
कुल मिलाकर, बिहार में गंगा घाटों पर महाआरती की शुरुआत राज्य के धार्मिक और पर्यटन नक्शे को नई पहचान देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह आयोजन बनारस की तरह ही बिहार की नई पहचान बन सकता है।