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रुबन मेमोरियल हॉस्पिटल में बिहार का पहला सफल लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट, मरीज को मिली नई जिंदगी

बिहार में पहली बार रुबन मेमोरियल हॉस्पिटल में सफल लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट किया गया। छोटे भाई ने लिवर दान कर बड़े भाई की जान बचाई, डॉक्टरों ने 9 घंटे की जटिल सर्जरी को सफल बनाया।

बिहार न्यूज
बड़े भाई की छोटे भाई ने बचाई जान
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

PATNA: बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए Ruban Memorial Hospital ने राज्य का पहला सफल लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट कर एक मरीज को नया जीवन प्रदान किया है। इस जटिल सर्जरी में छोटे भाई ने अपने बड़े भाई को लिवर का हिस्सा दान कर मानवता और पारिवारिक समर्पण की मिसाल पेश की।


31 वर्षीय मरीज को गंभीर लिवर फेल्योर की स्थिति में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनका बिलीरुबिन स्तर अत्यधिक (35 mg/dl) था तथा उन्हें पेट में पानी (एसाइटिस), छाती में तरल (प्ल्यूरल इफ्यूजन) और किडनी की गंभीर समस्या थी। चिकित्सकों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लिवर ट्रांसप्लांट को जीवनरक्षक विकल्प बताया। ऐसे में 23 वर्षीय छोटे भाई ने आगे आकर लिवर दान करने का निर्णय लिया।


यह जटिल सर्जरी करीब 9 घंटे तक चली और इसे Dr. Milind Mandwar (कंसल्टेंट, लिवर एवं किडनी ट्रांसप्लांट) और उनकी विशेषज्ञ टीम ने सफलतापूर्वक संपन्न किया। सर्जरी के बाद मरीज ने शीघ्र ही होश प्राप्त कर लिया, वेंटिलेटर सपोर्ट हटा दिया गया और 14 दिनों के भीतर बिना किसी जटिलता के उन्हें स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज कर दिया गया। वहीं, डोनर को भी ऑपरेशन के छठे दिन सुरक्षित रूप से छुट्टी दे दी गई।


Dr. Raju Babu Kushwaha, कंसल्टेंट, मेडिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी ने बताया कि एंड-स्टेज लिवर डिजीज के मामलों में लिवर ट्रांसप्लांट ही एकमात्र प्रभावी उपचार होता है और कई बार यह मरीज के जीवन को बचाने का एकमात्र विकल्प बन जाता है। Dr. Milind Mandwar ने कहा कि सफल ट्रांसप्लांट के लिए डोनर और रिसिपिएंट का सावधानीपूर्वक चयन अत्यंत आवश्यक होता है। आधुनिक तकनीकों के कारण अब लिवर ट्रांसप्लांट की सफलता दर 95% से अधिक हो चुकी है। उन्होंने बताया कि डोनर की पूरी जांच के बाद ही सर्जरी की जाती है और डोनर सामान्य जीवन बिना किसी दीर्घकालिक दवाओं के जी सकता है। वहीं, रिसिपिएंट को शुरुआती तीन महीनों तक विशेष सावधानी और नियमित फॉलो-अप की आवश्यकता होती है।


इस उपलब्धि पर Dr. Satyajit Kumar Singh, प्रबंध निदेशक, रुबन मेमोरियल हॉस्पिटल ने कहा कि यह सफलता बिहार में उन्नत चिकित्सा सुविधाओं की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि रुबन हॉस्पिटल हमेशा से नई तकनीकों और अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं को बिहार में सबसे पहले शुरू करने में अग्रणी रहा है, और यह उपलब्धि उसी निरंतर प्रयास का परिणाम है। साथ ही, उन्होंने अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि ब्रेन-डेड मरीजों से अंगदान को बढ़ावा देने के लिए मेडिकल कॉलेज, ट्रॉमा और न्यूरोलॉजिकल सेंटरों की महत्वपूर्ण भूमिका है।


 उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंगदान के लिए उम्र कोई बाधा नहीं है। रुबन मेमोरियल हॉस्पिटल द्वारा शुरू किया गया लिवर ट्रांसप्लांट कार्यक्रम राज्य में विश्वस्तरीय चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक मजबूत पहल है। यह उपलब्धि बिहार में ऑर्गन ट्रांसप्लांट और उन्नत सर्जरी के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत का संकेत देती है।रुबन मेमोरियल हॉस्पिटल में बिहार का पहला सफल लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट, मरीज को मिली नई जिंदगी

रुबन मेमोरियल हॉस्पिटल में बिहार का पहला सफल लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट, मरीज को मिली नई जिंदगी