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बिहार चुनाव को लेकर विपक्षी दलों ने दिखाई एकजुटता, आयोग के सामने रखी बड़ी मांग

DELHI : बिहार में कोरोना महामारी के बीच सरकार चुनाव की भी तैयारियों में जुटी हुई है. लेकिन विपक्षी पार्टियां चुनाव आयोग को विधानसभा चुनाव पर गंभीरता से विचार करने के लिए बोल

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DELHI :  बिहार में कोरोना महामारी के बीच सरकार चुनाव की भी तैयारियों में जुटी हुई है. लेकिन विपक्षी पार्टियां चुनाव आयोग को विधानसभा चुनाव पर गंभीरता से विचार करने के लिए बोल रही हैं. इसे लेकर विपक्षी दलों ने इलेक्शन कमीशन को एक ज्ञापन भी सौंपा है. दिल्ली के कंस्टीयूच्यूशन क्लब में बैठक के बाद तमाम दलों ने एक योजना बनाई है.


बिहार में विधानसभा चुनाव को लेकर सूबे की तमाम विपक्षी पार्टियों में एक बार फिर से एकजुटता दिखी. बिहार की 9 विपक्षी पार्टियों ने मिलकर दिल्ली के कंस्टीयूच्यूशन क्लब में बैठक की. पार्टी प्रतिनिधियों ने अपनी बैठक में बिहार में फैलते कोरोना को लेकर सरकार की असफलता पर चिंता जतायी. इस मौके पर पार्टी प्रतिनिधियों ने अपने-अपने विचार रखे और एक सामूहिक मांग पत्र चुनाव आयोग को सौंपा.


इन लोगों का कहना है कि चुनाव एक संवैधानिक कार्य है जिसे कब और कैसे संपन्ना कराना है, यह चुनाव आयोग तय करे. लेकिन कोरोना जैसे महामारी के कारण जरूरी बातों का अवश्य ख्याल रखे. जिस तरह से कोरोना अपना पैर पसार रहा है उस स्थिति को देखते हुए जरूरी है कि 1000 की जगह 250 वोटरों पर एक बूथ का इंतजाम किया जाए. यह संख्या कम रखते हुए बूथों पर सामाजिक दूरियों के साथ-साथ अन्य सावधानियां को बरतना आसान होगा. यह जरूरी है कि चुनाव के साथ-साथ इस मौके पर मानवता का ख्याल रखा जाए.


दूसरी महत्वपूर्ण बात है कि मतदाताओं को चुनाव के समय चुनावी रैलियों के माध्यम से ही पार्टियां अपनी नीतियों और योजनाओं से जनता को अवगत कराती रही है. कोविड-19 के कारण सामान्य तौर पर ऐसी रैलियां संभव नहीं है और विकल्प के तौर पर वर्चुअल रैली की बात करना पूरी तरह से गैर व्यवहारिक है. तकनीक पर आधारित वर्चुअल रैली के लिए स्मार्ट फोन और नेट कनेक्टविटी का होना अनिवार्य है जबकि वास्तविकता है कि बिहार की 50 फीसद लोगों के पास फोन है और कुल फोन धारकों के 35 फीसद लोगों के पास स्मार्ट फोन है. ऐसे में कुल आबादी का 15 फीसद लोग ही इस कथित वर्चुअल रैली के दौरान कवर हो सकते हैं. यह हमारी प्रजातांत्रिक व्यवस्था और चुनावी राजनीति पर कड़ा प्रहार है और साथ ही बिहार की जनता के साथ नाइंसाफी है. बिहार की पूरी विपक्षी पार्टियां मांग करती है कि चुनाव आयोग इस मुद्दे को गंभीरता से ले और तमाम पक्षों का मूल्यांकन करते हुए जनहित में फैसला ले.


पार्टी प्रतिनिधियों ने बाद में चुनाव आयोग के साथ दिल्ली में वर्चुअल मीटिंग की. इस मींटिग में मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ-साथ दोनों चुनाव आयुक्तों ने विपक्षी पार्टियों की मांगों पर विचार करने का भरोसा दिया. चुनाव आयोग के साथ संपन्न हुई इस वर्चुअल मीटिंग में सर्वश्री शक्ति सिंह गोहिल(कांग्रेस), डी राजा(सीपीआई), सीताराम यचुरी(सीपीआईएम), दीपंकर भट्टाचार्या (सीपीआईएमएल), उपेन्द्र कुशवाहा (रालोसापा), राजीव मिश्रा(वीआईपी) मनोज झा(आरजेडी) के साथ-साथ शरद यादव और हम के प्रतिनिधि भी शामिल हुए.