ब्रेकिंग
दिलीप जायसवाल की कुर्सी पर निशांत कुमार ने कर लिया कब्जा: शपथ ग्रहण में दिखा दिलचस्प नज़ाराहलवाई की संदिग्ध मौत से सनसनी, परिजनों ने हत्या की जताई आशंका; थाना के सामने शव रखकर किया बवाल1st Bihar जो कहता है वही होता है...बाकी सब हैं पीछे-पीछे, निशांत की खबर पर 100 फीसदी लगी मुहर, बने पावर सेंटर बिहार कैबिनेट विस्तार: गांधी मैदान में 32 मंत्रियों ने ली शपथ, पीएम मोदी. शाह, राजनाथ सिंह, सीएम सम्राट और नीतीश कुमार समेत तमाम NDA नेता मौजूदसम्राट कैबिनेट में मंत्री बनने जा रहे निशांत कुमार, शपथ ग्रहण से पहले पिता नीतीश कुमार का लिया आशीर्वाददिलीप जायसवाल की कुर्सी पर निशांत कुमार ने कर लिया कब्जा: शपथ ग्रहण में दिखा दिलचस्प नज़ाराहलवाई की संदिग्ध मौत से सनसनी, परिजनों ने हत्या की जताई आशंका; थाना के सामने शव रखकर किया बवाल1st Bihar जो कहता है वही होता है...बाकी सब हैं पीछे-पीछे, निशांत की खबर पर 100 फीसदी लगी मुहर, बने पावर सेंटर बिहार कैबिनेट विस्तार: गांधी मैदान में 32 मंत्रियों ने ली शपथ, पीएम मोदी. शाह, राजनाथ सिंह, सीएम सम्राट और नीतीश कुमार समेत तमाम NDA नेता मौजूदसम्राट कैबिनेट में मंत्री बनने जा रहे निशांत कुमार, शपथ ग्रहण से पहले पिता नीतीश कुमार का लिया आशीर्वाद

अनुशासनात्मक कार्रवाई में ये गलतियां न करें: मुख्य सचिव की अफसरों को दी सख्त चेतावनी

पटना सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया में होने वाली सामान्य गलतियों पर सख्त चेतावनी दी। बैठक में जांच, आरोप-पत्र और दंड प्रक्रिया को विधिसम्मत रखने पर जोर दिया गया।

bihar
© social media
Jitendra Vidyarthi
3 मिनट

PATNA: पटना सचिवालय स्थित सभागार में अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया से संबंधित एक उच्चस्तरीय संक्षिप्त प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। सत्र की अध्यक्षता बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने की, जबकि सह-अध्यक्षता महानिदेशक सह मुख्य जांच आयुक्त दीपक कुमार सिंह द्वारा की गई।


बैठक में विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, राजस्व परिषद की अध्यक्ष सह सदस्य श्रीमती हरजोत कौर बम्हरा, अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग डॉ. बी. राजेंदर, श्री अरविंद कुमार चौधरी, अपर मुख्य सचिव गृह विभाग सहित राज्य सरकार के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित थे।


बैठक का मुख्य विषय अनुशासनात्मक कार्रवाई रहा। इस अवसर पर महानिदेशक सह मुख्य जांच आयुक्त दीपक कुमार सिंह ने कहा कि सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा समय-समय पर जारी सभी परिपत्रों को संकलित कर इस विषय पर एक मास्टर सर्कुलर जारी किया गया है। साथ ही, अनुशासनात्मक कार्रवाई से संबंधित संविधान के अनुच्छेद 311 सहित अन्य प्रासंगिक प्रावधानों एवं उच्च न्यायालयों एवं सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णयों को सम्मिलित करते हुए एक पुस्तक का संकलन किया गया है, ताकि अनुशासनात्मक मामलों में की जाने वाली कार्रवाई एवं अपनाई जाने वाली प्रक्रिया की समग्र और स्पष्ट समझ विकसित की जा सके।


बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि किसी भी जांच की स्थापना के समय सही शब्दावली एवं विधिक प्रक्रिया का पालन अत्यंत आवश्यक है। इस संदर्भ में कुछ सामान्य त्रुटियों से बचने की आवश्यकता पर चर्चा की गई, जिनमें बिना आरोप-पत्र गठित किए सीधे लघु दंड देना, अनुशासनिक प्राधिकारी या प्रशासनिक विभाग से आरोपित पदाधिकारी के प्रतिरक्षा कथन पर राय मांगना, तथा दंड की मात्रा, निलंबन अवधि के दौरान देय भत्तों एवं निलंबन की अवधि के समायोजन संबंधी आदेश एक ही संकल्प में जारी करना शामिल है। यह भी स्पष्ट किया गया कि स्तर-9 एवं उससे ऊपर के पदाधिकारियों के मामलों में दंडादेश जारी करने से पूर्व बिहार लोक सेवा आयोग से परामर्श अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, प्रस्तुतिकरण पदाधिकारी की नियुक्ति से संबंधित त्रुटियों पर भी ध्यान आकर्षित किया गया।


बैठक में विशेष रूप से जिन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया, उनमें आरोप-पत्र का विधिवत गठन, सरकारी सेवक के प्रतिरक्षा कथन/अभ्यावेदन का समुचित परीक्षण तथा निलंबन अवधि का समयबद्ध नियमितीकरण शामिल है। यह स्पष्ट किया गया कि निलंबन अवधि के नियमितीकरण में विलंब होने से दंड असंगत एवं उद्देश्य के विपरीत हो सकता है। बैठक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना रहा कि राज्य में अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया पारदर्शी, विधिसम्मत एवं न्यायोचित हो तथा भविष्य में प्रक्रियागत त्रुटियों से बचा जा सके।

टैग्स

संबंधित खबरें