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Bihar Land Reform: राजस्व एवं भूमि सुधार में Vijay Sinha के एक्शन से हुआ बड़ा सुधार, शिकायत निपटारे में आई तेजी; विभाग ने जारी किया पूरा डेटा

बिहार में भूमि सुधार और जनसुविधा में महत्वपूर्ण सुधार देखा गया है। आवेदन निष्पादन दर बढ़ी, लंबित मामलों में कमी आई और ऑनलाइन प्रक्रिया तेज हुई।

Bihar Land Reform
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© REPORTER
Tejpratap
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Bihar Land Reform : बिहार में इस वित्तीय वर्ष में भूमि सुधार और संबंधित जनसुविधाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। विभिन्न प्रकार के आवेदन और अभियान अब तेजी से निष्पादित हो रहे हैं, जिससे लोगों को उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान मिल रहा है। सबसे पहले सामान्य आवेदनों की बात करें तो इस वित्तीय वर्ष की शुरुआत में आवेदन निष्पादन दर 75.30 प्रतिशत थी, जो वर्तमान में बढ़कर 82 प्रतिशत हो गई है। इसके साथ ही लंबित मामलों की संख्या में 30,000 से अधिक की कमी आई है। यह सुधार प्रशासनिक प्रक्रिया में तेजी और पारदर्शिता का संकेत है।


परिमार्जन प्लस योजना में भी इस वर्ष उल्लेखनीय प्रगति हुई है। वर्ष की शुरुआत में प्राप्त आवेदनों का निष्पादन दर 65.16 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 74.41 प्रतिशत हो गया है। लंबित मामलों की संख्या में 90,000 से अधिक की कमी दर्ज की गई है, जिससे लाभार्थियों को समय पर सेवा मिल रही है। मापी  में भी सुधार दिखाई दे रहा है। कुल प्राप्त आवेदनों का निष्पादन दर वर्ष की शुरुआत में 81.77 प्रतिशत था, जो वर्तमान में 82.22 प्रतिशत हो गया है। लंबित मामलों की संख्या में 1,150 से अधिक की कमी आई है, जिससे लाभार्थियों को राहत मिल रही है।


राजस्व न्यायालय में दाखिल-खारिज अपील, BLDRA, दाखिल-खारिज पुनरीक्षण और जमाबंदी रद्दीकरण जैसे मामलों में कुल आवेदन निष्पादन दर वर्ष की शुरुआत में 51.73 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 54 प्रतिशत हो गई है। लंबित मामलों की संख्या में 4,655 से अधिक की कमी आई है। इसका सकारात्मक असर न्यायिक प्रक्रियाओं की गति में भी देखा जा सकता है।


राजस्व महाभियान में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इस अभियान के तहत कुल प्राप्त आवेदनों की संख्या लगभग 46 लाख थी। वर्ष की शुरुआत में आवेदनों की स्कैनिंग का प्रतिशत मात्र 19.11 था, जो अब बढ़कर 68.73 प्रतिशत हो गया है। कुल ऑनलाइन दर्ज आवेदनों की संख्या 3,662 से बढ़कर 43,519 हो गई है। इस प्रकार महाभियान के तहत ऑनलाइन प्रक्रियाओं में तेज़ी आई है और भूमि संबंधी मामलों का त्वरित निपटारा हो रहा है।


अभियान बसेरा 2 के तहत सुयोग्य श्रेणी के वासहीन नागरिकों को वास योग्य भूमि आवंटन की प्रक्रिया में भी सुधार देखा गया है। वर्ष की शुरुआत में भूमि आवंटन का प्रतिशत 48.88 था, जो वर्तमान में बढ़कर 50.38 प्रतिशत हो गया है। कुल भूमि आवंटन की संख्या 67,129 से बढ़कर 69,506 हो गई है, जिससे लाभार्थियों को स्थायी आवास मिलने में मदद मिली है।


जन शिकायत पोर्टल पर भी आवेदन निष्पादन दर में भारी सुधार हुआ है। अंचल अधिकारी, भूमि सुधार उप समाहर्ता, अपर समाहर्ता और समाहर्ता स्तर के कुल प्राप्त आवेदनों का निष्पादन दर वर्ष की शुरुआत में 27.8 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 44.6 प्रतिशत हो गया है। इस पोर्टल पर निष्पादन की संख्या 11,502 से बढ़कर 26,773 हो गई है, जिससे आम जनता की शिकायतों का निपटारा तेजी से हो रहा है।


जन कल्याण संवाद के अंतर्गत विभिन्न जिलों में भी प्रगति देखी गई है। पटना में 240, लखीसराय में 728, मुजफ्फरपुर में 586, सहरसा में 1,200, पूर्णिया में 2,100 और भागलपुर में 2,751 आवेदन प्राप्त हुए। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि राज्य में भूमि सुधार और जनसुविधा कार्यक्रमों का व्यापक लाभ आम जनता तक पहुँच रहा है।


इन सुधारों से यह संदेश जाता है कि बिहार सरकार भूमि सुधार, न्यायिक निपटान और जनसुविधाओं के क्षेत्र में तेजी से काम कर रही है। लंबित मामलों में कमी और आवेदन निष्पादन दर में वृद्धि यह संकेत देती है कि प्रशासन ने पारदर्शिता और त्वरित सेवा के मानकों को अपनाया है। इसके परिणामस्वरूप नागरिकों को उनके अधिकार और सेवाएँ समय पर मिल रही हैं, जिससे लोगों में सरकारी योजनाओं के प्रति विश्वास बढ़ रहा है। बिहार में भूमि सुधार और जनसुविधाओं के क्षेत्र में यह प्रगति न केवल प्रशासनिक दक्षता को दर्शाती है, बल्कि राज्य में सामाजिक न्याय और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम भी साबित हो रही है।

पटना से प्रिंस कुशवाहा की रिपोर्ट