1st Bihar Published by: Viveka Nand Updated Thu, 15 Jan 2026 04:19:58 PM IST
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Bihar Bhumi: बिहार सरकार ने भूमि संबंधी विवाद के निपटारे, सरकारी जमीन पर फर्जी जमाबंदी रद्द करने को लेकर बड़ा कदम उठाया है . सरकारी भूमि की जारी की गई जमाबंदी रद्द करने का आदेश दिया गया है. सात प्रकार की जमीन जो सरकारी है, लेकिन उस पर गलत तरीके से जमाबंदी कायम कर दी गई है, उस पर सरकार की नजर है. इस संबंध में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सी. के. अनिल ने सभी प्रमंडलीय आयुक्त, समाहर्ता और अपर समाहर्ताओं को पत्र लिखा है .
सात तरह की जमीन पर कायम जमाबंदी 45 दिनों में होगा रद्द
प्रधान सचिव ने कहा है कि सर्वे खतियान में तीन तरह की जमीन जिसका अवैध तरीके से जमाबंदी हुआ है, उसे रद्द करें. जिसमें गैर मजरुआ आम, कैसरे- हिंद और खास महाल की जमीन. खास महाल की वैसी जमीन जिसका पूर्व में सरकार द्वारा विधि सम्मत बंदोबस्ती नहीं की गई हो, उसकी जमाबंदी रद्द करें. इसके अलावे जो भूमि पूर्व में जिला परिषद, नगर पंचायत, नगर परिषद, नगर निगम, ग्राम पंचायत का होने का दस्तावेज हो . यदि उक्त भूमि राज्य सरकार के किसी भी विभाग, बोर्ड, निगम या बियाड़ा से संबंधित हो, यदि वह भूमि भारत सरकार के किसी भी मंत्रालय से संबंधित हो, वह भूमि जो धार्मिक न्यास बोर्ड, सरकारी-अर्द्ध सरकारी मान्यता प्राप्त ट्रस्ट, गौशाला से संबंधित हो, तब अपर समाहर्ता इस पर कायम की गई जमाबंदी को रद्द कर सकते हैं. यह काम उन्हें 45 दिनों में करना होगा.
अंचल के कलेक्टर होते हैं सीओ...
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव ने अंचल अधिकारियों से कहा है कि आप 3 जून 1974 से अपने अंचल की सरकारी भूमि के कलेक्टर घोषित हैं. यदि उनके कार्यकाल में सरकारी भूमि का अवैध हस्तांतरण पाया जाता है तब उनके खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई होगी. यदि उनके कार्यकाल में सरकारी भूमि का निजी व्यक्तियों के नाम पर जमाबंदी खोला गया हो एवं दाखिल खारिज की गई हो तो वे विभागीय कार्यवाही के भागी होंगे . अंचलाधिकारी अभियान चलाकर पुराने अभिलेखों का निरीक्षण करें और चिन्हित ऐसे मामलों का प्रतिवेदन बनाएं और सीधे 31 जनवरी 2026 तक अपने-अपने अपर समाहर्ता को भेजें.
सरकारी भूमि के संरक्षक होते हैं समाहर्ता (DM)
प्रधान सचिव ने सभी जिलों के समाहर्ताओं से कहा है कि आप अपने अधिकार क्षेत्र में सरकारी भूमि के संरक्षक हैं. ऐसे में जमाबंदी रद्दीकरण के अभियान का पर्यवेक्षण करें, ताकि सर्वे में दर्ज सरकारी भूमि की वापसी हो सके. जिला स्तर और अंचल स्तर पर लैंड बैंक का सृजन हो सके. सभी समाहर्ता भूमि की वापसी के लिए कार्रवाई करें. इसका पूर्ण दायित्व जिला स्तर पर समाहर्ता का ही होगा.