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Bihar ADR report: अनंत सिंह से मनीष कश्यप तक, कई दिग्गजों पर गंभीर केस, ADR ने उठाए सवाल; दलों ने नहीं बताया टिकट देने का कारण

बिहार चुनाव 2025 के बाद एडीआर और बिहार इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट ने राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण की पोल खोल दी है। कई दिग्गज उम्मीदवारों पर गंभीर मामले दर्ज हैं, फिर भी उन्हें टिकट मिला है।

Bihar ADR report:  अनंत सिंह से मनीष कश्यप तक, कई दिग्गजों पर गंभीर केस, ADR ने उठाए सवाल; दलों ने नहीं बताया टिकट देने का कारण
Tejpratap
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Bihar ADR report : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राज्य की राजनीति में पारदर्शिता और उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण रिपोर्ट सामने आई है। चुनावी सुधारों के लिए काम करने वाले संगठन एडीआर (Association for Democratic Reforms) और बिहार इलेक्शन वॉच ने प्रारूप C-7 के गहन अध्ययन के बाद चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं। इस रिपोर्ट ने साफ दिखाया है कि बिहार में राजनीति और अपराध का संबंध अभी भी गहरा है, और कई दल ऐसे उम्मीदवारों को टिकट दे रहे हैं जिन पर गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।


रिपोर्ट के अनुसार, आगामी चुनावों में उतरे कई चर्चित दावेदारों के खिलाफ बड़े पैमाने पर आपराधिक मामले हैं। सबसे अधिक सुर्खियों में रहे जदयू नेता अनंत सिंह पर सबसे ज्यादा गंभीर मामले दर्ज पाए गए, जबकि जन सुराज पार्टी के नेता त्रिपुरारी तिवारी उर्फ मनीष कश्यप भी आपराधिक आरोपों की लिस्ट में ऊपर हैं। इसी तरह राजद के देवा गुप्ता, राघोपुर सीट से उम्मीदवार तेजस्वी यादव, और एआईएमआईएम के मोहम्मद कैफ के नाम भी इस सूची में शामिल हैं। ये आंकड़े इस ओर इशारा करते हैं कि आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों की दावेदारी लगातार बढ़ती जा रही है।


एडीआर की रिपोर्ट में कहा गया है कि विधानसभा चुनाव 2025 में कुल 2616 प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतरे, जिनमें से 612 उम्मीदवारों ने अपने ऊपर दर्ज मामलों की जानकारी अपने हलफनामों में सार्वजनिक की। लेकिन इससे भी चिंताजनक तथ्य यह है कि जिन 436 उम्मीदवारों ने C-7 फॉर्म भरा, उनमें से 29% उम्मीदवारों ने अपनी अपराध पृष्ठभूमि की पूरी जानकारी साझा ही नहीं की। यह सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी दलों और प्रत्याशियों को निर्देश दिया है कि वे आपराधिक रिकॉर्ड की पूरी जानकारी अनिवार्य रूप से सार्वजनिक करें।


C-7 फॉर्म का उद्देश्य है कि राजनीतिक दल स्पष्ट कारण बताएं कि उन्होंने आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार को टिकट क्यों दिया। लेकिन रिपोर्ट बताती है कि राजद, भाजपा, कांग्रेस, जदयू, जन सुराज पार्टी सहित लगभग सभी बड़े दलों ने या तो यह जानकारी साझा नहीं की या अधूरी जानकारी दी। इससे साफ होता है कि दल चुनावी पारदर्शिता की बात तो करते हैं, लेकिन वास्तविक अनुपालन में गंभीर कमी दिखाई देती है।


बिहार इलेक्शन वॉच के राज्य संयोजक राजीव कुमार ने बताया कि इस रिपोर्ट को तैयार करने में काफी मेहनत और गहन विश्लेषण किया गया। जानकारी जुटाने के लिए उम्मीदवारों की आधिकारिक वेबसाइट, राजनीतिक दलों के पोर्टल, सोशल मीडिया अकाउंट, चुनावी हलफनामे और C-7 फॉर्म का अध्ययन किया गया। कई उम्मीदवारों और दलों द्वारा प्रदान की गई जानकारी अधूरी या विरोधाभासी पाई गई, जिससे चुनावी पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।


सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही निर्देश दिया है कि राजनीतिक दल अपराधी पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को टिकट देने का कारण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, आधिकारिक वेबसाइट और अखबारों में प्रकाशित करें। लेकिन एडीआर की रिपोर्ट से साफ हो गया है कि अधिकांश राजनीतिक दलों ने इस आदेश को गंभीरता से नहीं लिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि दलों द्वारा कारण न बताए जाने का मतलब है कि वे उम्मीदवारों की छवि से ज्यादा चुनावी जीत को महत्व दे रहे हैं।


एडीआर ने अपनी रिपोर्ट में बेहद स्पष्ट रूप से कहा है कि “राजनीतिक दल मंचों से साफ राजनीति की बात करते हैं, लेकिन जब नियमों का पालन करने की बात आती है तो वही दल सबसे अधिक लापरवाह साबित होते हैं।” यह स्थिति न केवल लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि मतदाताओं के अधिकारों का भी हनन करती है।


एडीआर और बिहार इलेक्शन वॉच की इस रिपोर्ट ने न केवल दलों की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि मतदाताओं को भी आगाह किया है कि वे उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि का सही मूल्यांकन कर ही मतदान करें। रिपोर्ट ने एक बार फिर दिखा दिया है कि बिहार की राजनीति में अपराध का असर अभी भी गहरा है और इसे खत्म करने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है।