Bihar New Road Project : बिहार में गंगा किनारे सड़क संपर्क को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य में तीन नए गंगा पथों का निर्माण कार्य नए साल में शुरू होने की संभावना है। इन तीनों महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए चयनित परामर्शियों ने अपना काम शुरू कर दिया है। उन्हें तीन महीने के भीतर विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन यानी डीपीआर तैयार करने का निर्देश दिया गया है। डीपीआर तैयार होने के बाद निर्माण कार्य के लिए निविदा जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इन तीनों गंगा पथों को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया जाएगा। बिहार सरकार ने परियोजनाओं की योजना बनाते समय अगले 25 वर्षों में बढ़ने वाले ट्रैफिक दबाव का भी आकलन करने का फैसला किया है। इसके आधार पर सड़कों की क्षमता, संभावित यातायात और उससे निपटने के उपायों को डीपीआर में शामिल किया जाएगा। साथ ही, इन सड़कों से होने वाली संभावित टोल आय का भी अनुमान लगाया जाएगा।
पहला गंगा पथ बिदुपुर से दिघवारा के बीच बनाया जाएगा। गंगा के दक्षिणी छोर पर प्रस्तावित इस सड़क की लंबाई करीब 56 किलोमीटर होगी। यह पथ उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच सड़क संपर्क को बेहतर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बिदुपुर से दिघवारा तक सड़क संपर्क मजबूत होने से आसपास के इलाकों के लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी और पटना से गंगा किनारे के विभिन्न क्षेत्रों की कनेक्टिविटी भी और बेहतर होगी। इस परियोजना का नाम अंबिका पथ रखा गया है।
दूसरा महत्वपूर्ण गंगा पथ बक्सर से आरा होते हुए मनेर के कोइलवर तक बनाया जाएगा। इसकी लंबाई करीब 90 किलोमीटर होगी। इस परियोजना को विश्वामित्र पथ नाम दिया गया है। यह सड़क पश्चिमी बिहार के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ने के साथ पटना की ओर आने-जाने वाले यातायात के लिए एक वैकल्पिक और महत्वपूर्ण मार्ग के रूप में विकसित की जाएगी। जेपी गंगा पथ को पहले ही मनेर तक विस्तार देने की स्वीकृति मिल चुकी है। ऐसे में बक्सर-आरा-मनेर गंगा पथ के निर्माण से गंगा किनारे सड़क के माध्यम से पटना की संपर्कता और मजबूत होने की उम्मीद है।
तीसरा गंगा पथ सारण जिले के दरिहारा (कोन्हुआ) से गोपालगंज जिले के डुमरिया घाट तक बनाया जाएगा। इसकी लंबाई करीब 73 किलोमीटर होगी। इस सड़क का नाम नारायणी पथ रखा गया है। यह पथ बिहार के कई इलाकों को जोड़ने के साथ उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाले लोगों के लिए भी आवागमन को आसान बनाने में मदद करेगा। खासकर सारण और गोपालगंज क्षेत्र में सड़क संपर्क को इससे नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
तीनों परियोजनाओं का प्रारंभिक एलाइनमेंट तय किया जा चुका है। अब चयनित परामर्शियों की जिम्मेदारी अंतिम एलाइनमेंट तय करने के साथ परियोजना की लागत, जमीन से जुड़े पहलुओं, संभावित ट्रैफिक दबाव और निर्माण से जुड़ी अन्य तकनीकी जरूरतों का अध्ययन करना है। इसी अध्ययन के आधार पर विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार किया जाएगा।
डीपीआर में यह भी बताया जाएगा कि अगले 25 वर्षों में इन तीनों गंगा पथों पर वाहनों का दबाव कितना बढ़ सकता है। इसके अनुसार सड़क की डिजाइन और क्षमता तय करने की योजना है। इसके अलावा परियोजनाओं पर होने वाले खर्च और भविष्य में टोल टैक्स से मिलने वाली संभावित राशि का भी आकलन किया जाएगा। यानी इन सड़कों की योजना केवल वर्तमान यातायात को देखते हुए नहीं, बल्कि आने वाले दशकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है।
तीनों गंगा पथों से बिहार में गंगा किनारे सड़क नेटवर्क को विस्तार मिलेगा। बिदुपुर-दिघवारा, बक्सर-कोइलवर और कोन्हुआ-डुमरिया घाट के बीच बनने वाली इन सड़कों के जरिए कई जिलों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। इन सभी परियोजनाओं का काम बिहार राज्य पथ निर्माण विकास निगम की निगरानी में किया जा रहा है। निगम की ओर से ही परियोजनाओं के लिए परामर्शियों का चयन किया गया है। डीपीआर तैयार होने के बाद निविदा की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और इसके बाद निर्माण कार्य शुरू करने की दिशा में कदम उठाया जाएगा।





