ब्रेकिंग
‘ढह गया है एजुकेशन सिस्टम’, झारखंड के JPSC-JSSC छात्र आंदोलन पर राहुल गांधी का बड़ा बयानजेन जी हमारी पीढ़ी से ज्यादा ईमानदार और देशभक्त, उन्हें चाहिए तार्किक जवाब, मोहन भागवत का बड़ा बयान..“Gen Z हमारे अपने लोग हैं”मंत्री दीपक प्रकाश बने MLC, बिहार विधान परिषद में सभापति ने दिलाई शपथ; पिता उपेंद्र कुशवाहा समेत NDA नेता रहे मौजूदRJD ने बिहार की सभी सांगठनिक इकाइयां की भंग, जल्द होगा पुनर्गठन दो हजार रूपये घूस लेने वाले हेडमास्टर को 3 साल की सजा और जुर्माना, विजिलेंस कोर्ट ने सुनाया फैसला‘ढह गया है एजुकेशन सिस्टम’, झारखंड के JPSC-JSSC छात्र आंदोलन पर राहुल गांधी का बड़ा बयानजेन जी हमारी पीढ़ी से ज्यादा ईमानदार और देशभक्त, उन्हें चाहिए तार्किक जवाब, मोहन भागवत का बड़ा बयान..“Gen Z हमारे अपने लोग हैं”मंत्री दीपक प्रकाश बने MLC, बिहार विधान परिषद में सभापति ने दिलाई शपथ; पिता उपेंद्र कुशवाहा समेत NDA नेता रहे मौजूदRJD ने बिहार की सभी सांगठनिक इकाइयां की भंग, जल्द होगा पुनर्गठन दो हजार रूपये घूस लेने वाले हेडमास्टर को 3 साल की सजा और जुर्माना, विजिलेंस कोर्ट ने सुनाया फैसला

भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर केस: पटना हाईकोर्ट में PIL दायर, दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग

Bharat Tiwari Encounter Case: भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर पटना हाईकोर्ट में PIL दाखिल की गई है।

Bharat Tiwari Encounter Case
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर केस
© Google
Mukesh Srivastava
3 मिनट

Bharat Tiwari Encounter Case: भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में कथित पुलिस मुठभेड़ में युवक भरत भूषण तिवारी की मौत के मामले में निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर पटना हाईकोर्ट में लोकहित याचिका (PIL) दायर की गई है।


यह याचिका अधिवक्ता मुकेश कुमार द्वारा दाखिल की गई है, जिसमें मामले की स्वतंत्र जांच कराने और जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों को कानून के दायरे में लाने की मांग की गई है। अधिवक्ता ने इस मामले की त्वरित सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश मीनाक्षी मदन राय की खंडपीठ के समक्ष भी गुहार लगाई है।


याचिका में आरोप लगाया गया है कि घटना से पहले भरत भूषण तिवारी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वह कथित रूप से हथियार लहराते दिखाई दे रहा था। याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि पुलिस के पास पहले से सूचना थी तो गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई और न ही कोई हथियार बरामद किया गया।


याचिका के अनुसार, इसके अगले ही दिन युवक की कथित पुलिस मुठभेड़ में मौत हो गई, जिससे पूरे घटनाक्रम पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। अधिवक्ता मुकेश कुमार का दावा है कि यह मामला प्रथम दृष्टया हत्या का प्रतीत होता है और इसकी निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने आत्मसमर्पण किया हो और फिर भी उस पर गोली चलाई गई हो, तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए।


वहीं पुलिस का दावा है कि भरत भूषण तिवारी की ओर से 10 से 12 राउंड फायरिंग की गई थी, जिसके बाद आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी। घटना के बाद प्रारंभिक जांच के आधार पर चार पुलिसकर्मियों और शाहपुर थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया गया है। राज्य सरकार ने मामले की जांच किसी सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीश से कराने की घोषणा की है, हालांकि अब तक इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है।

रिपोर्टिंग
F

रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता