मंत्री संतोष सुमन ने कहा कि "बांकीपुर की जनता लोकतंत्र का महापर्व मना रही है और 'बांकेलाल' विदेश भ्रमण का आनंद ले रहे हैं। चुनाव के समय जनता के बीच रहने का साहस नहीं, लेकिन परिणाम आने के बाद EVM, चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने की पूरी तैयारी है। यही इनकी राजनीति का स्थायी चरित्र बन चुका है।"
"जो लोग राजनीति को अपनी खानदानी जागीर और जनता को अपनी निजी संपत्ति समझते हैं, उन्हें लगता है कि एयरपोर्ट, रिसॉर्ट और विदेशी नौकायन से चुनाव जीते जाते हैं। उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि लोकतंत्र में सत्ता टेबल पॉलिटिक्स से नहीं, जनता के विश्वास और कार्यकर्ताओं के पसीने से मिलती है।"
"नेता प्रतिपक्ष का पद लोकतंत्र की गरिमा का प्रतीक होता है। जननायक कर्पूरी ठाकुर ने इस पद की मर्यादा बढ़ाई और लालू प्रसाद यादव ने भी विपक्ष की जिम्मेदार भूमिका निभाई। लेकिन आज के नेता प्रतिपक्ष चुनाव के समय जनता से दूर और विदेश यात्रा में व्यस्त हैं। इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा?"
"बांकीपुर की जनता सब देख रही है। हार का बहाना पहले से तैयार रखने वालों को यह समझ लेना चाहिए कि लोकतंत्र में जनता अंतिम निर्णायक होती है। जनता का फैसला स्वीकार करने का साहस ही सच्चे लोकतंत्र की पहचान है, हर हार के बाद EVM और संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करना नहीं।"





