Bihar News : मोकामा के विधायक और बाहुबली नेता अनंत सिंह की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। एक तरफ दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें 1 दिसंबर तक सरेंडर करना है, तो दूसरी तरफ उनकी विधायकी पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। विधानसभा अध्यक्ष की ओर से भेजे गए नोटिस को लेकर अब अनंत सिंह ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने साफ कर दिया है कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान बेटी की शादी पर है। शादी के बाद ही वह विधानसभा अध्यक्ष को नोटिस का जवाब देंगे।
अनंत सिंह के इस बयान के बाद सवाल उठने लगा है कि आखिर विधानसभा अध्यक्ष के नोटिस का जवाब देने में वह कितना वक्त लगाएंगे? क्या बेटी की शादी के बाद उनकी विधायकी को लेकर चल रही कानूनी और राजनीतिक लड़ाई में नया मोड़ आएगा?
बेटी की शादी के बाद देंगे नोटिस का जवाब
दरअसल, मोकामा विधायक अनंत सिंह से जब विधानसभा अध्यक्ष की ओर से आए नोटिस का जवाब देने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि अभी वह अपनी बेटी की शादी की तैयारियों में व्यस्त हैं। बेटी की शादी के बाद ही वह इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष को जवाब देंगे।
अनंत सिंह ने कहा कि अभी उन्हें यह भी ठीक से जानकारी नहीं है कि विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से चिट्ठी आई है या नहीं। उन्होंने कहा कि फिलहाल बेटी की शादी में लगे हुए हैं। शादी संपन्न होने के बाद नोटिस का जवाब दिया जाएगा।अनंत सिंह के इस बयान से साफ है कि फिलहाल वह अपनी विधायकी पर उठ रहे सवालों से ज्यादा बेटी की शादी को प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि, उनके जवाब के बाद विधानसभा अध्यक्ष की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी।
67 मुकदमों पर अनंत सिंह ने क्या कहा?
बातचीत के दौरान अनंत सिंह से उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों को लेकर भी सवाल किया गया। उनसे पूछा गया कि जब वह 2005 में विधायक फ्लैट में आए थे, तब से लेकर अब तक उनके खिलाफ कई मामले दर्ज हुए हैं और कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक उनके ऊपर 67 मुकदमे हैं। आखिर इतने मुकदमे कैसे दर्ज हुए?
इस सवाल पर अनंत सिंह ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि उनके खिलाफ जानबूझकर मुकदमे दर्ज किए जाते रहे। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय की सरकारों ने जांच के दौरान पुराने मामलों को भी उनके साथ जोड़ दिया। अनंत सिंह ने इस सिलसिले में ललन बाबू का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि जब 2015 में पुटुश हत्याकांड में उनका नाम आया, उस समय वह विधायक फ्लैट में थे और विधानसभा का सत्र चल रहा था। उनका दावा है कि बाढ़ में हुई घटना के मामले में भी उन्हें नामजद कर दिया गया, जबकि वह घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। इसके बाद जांच के दौरान पुराने मामलों को भी जोड़ दिया गया और धीरे-धीरे उनके खिलाफ मुकदमों की संख्या बढ़ती चली गई।
बोले- सिर्फ एक केस में हूं शामिल
अपने ऊपर दर्ज 67 मुकदमों को लेकर अनंत सिंह ने दावा किया कि इनमें से सिर्फ एक मामले में वह शामिल हैं। उन्होंने कहा कि अपने क्षेत्र में एक व्यक्ति के पैसे को लेकर विवाद हुआ था और उसी मामले में उनकी भूमिका थी। बाकी मुकदमों में उनकी कोई संलिप्तता नहीं है।
अनंत सिंह ने कहा कि उन्होंने कभी किसी की चमचागिरी नहीं की और हमेशा अपनी बात खुलकर रखी है। उनके मुताबिक, इसी वजह से उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जो भी बात उन्हें गलत लगती है, वह उसके खिलाफ आवाज उठाते हैं और इसी का खामियाजा उन्हें मुकदमों के रूप में भुगतना पड़ा है। हालांकि, मुकदमों को लेकर अनंत सिंह की ओर से दिए गए ये दावे उनकी अपनी सफाई हैं। इन मामलों में उनकी भूमिका का निर्धारण संबंधित अदालतों की प्रक्रिया और फैसलों से होगा।
विधायकी चली जाए या जेल जाना पड़े, कोई टेंशन नहीं
अनंत सिंह से जब पूछा गया कि अगर उनकी विधायकी चली जाती है या उन्हें जेल जाना पड़ता है तो उनकी क्या प्रतिक्रिया होगी? इस पर उन्होंने बेबाक अंदाज में कहा कि उन्हें इसकी कोई चिंता नहीं है।उन्होंने कहा कि उनकी विधायकी चली जाए या उन्हें जेल जाना पड़े, उन्हें कोई टेंशन नहीं है। पार्टी को उनके ऊपर जितना जुल्म करना है, कर सकती है। जनता सबको जवाब देगी। उनके इस बयान को पार्टी के भीतर चल रहे विवाद और उनके खिलाफ संभावित कार्रवाई के बीच काफी अहम माना जा रहा है। गौरतलब है कि पटना स्नातक एमएलसी चुनाव के दौरान अनंत सिंह और जेडीयू नेता नीरज कुमार के बीच भी राजनीतिक खींचतान सामने आई थी। इसके बाद पार्टी ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था।
1 दिसंबर तक करना है सरेंडर
वहीं, दुलारचंद यादव हत्याकांड में भी अनंत सिंह की कानूनी मुश्किलें बढ़ी हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 1 दिसंबर 2026 तक सरेंडर करने का निर्देश दिया है। इस मामले में उन्हें निर्धारित समयसीमा के भीतर अदालत के आदेश का पालन करना होगा।ऐसे में अनंत सिंह के सामने एक साथ दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहली चुनौती दुलारचंद यादव हत्याकांड में सरेंडर करने की है और दूसरी विधानसभा अध्यक्ष के नोटिस का जवाब देकर अपनी विधायकी को लेकर उठ रहे सवालों का सामना करने की है। फिलहाल अनंत सिंह का कहना है कि पहले बेटी की शादी होगी और उसके बाद विधानसभा अध्यक्ष को जवाब देंगे। अब देखना होगा कि शादी के बाद वह नोटिस पर क्या रुख अपनाते हैं और उनकी विधायकी को लेकर आगे क्या फैसला होता है।





