Where is My Train App : ट्रेन लेट से परेशान युवक का आइडिया बना करोड़ों भारतीयों का ट्रैवल साथी, Where is My Train App से भारत में ट्रेन ट्रैकिंग क्रांति

अहमद निजाम ने Where is My Train App के जरिए भारत में ट्रेन ट्रैकिंग में क्रांति ला दी। गूगल द्वारा अधिग्रहण के बाद भी उन्होंने Regain App से डिजिटल आदतें सुधारने में योगदान दिया।

1st Bihar Published by: First Bihar Updated Thu, 08 Jan 2026 03:40:50 PM IST

Where is My Train App : ट्रेन लेट से परेशान युवक का आइडिया बना करोड़ों भारतीयों का ट्रैवल साथी, Where is My Train App से भारत में ट्रेन ट्रैकिंग क्रांति

- फ़ोटो

Where is My Train App : आज के समय में करोड़ों भारतीय अपनी यात्रा के लिए ट्रेन का इस्तेमाल करते हैं। रेलवे हर रोज लाखों यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाती है। लेकिन अक्सर कोहरे, तकनीकी दिक्कत या अन्य कारणों से ट्रेनें लेट हो जाती हैं, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालांकि आज हमारे पास कई ऐसे विकल्प हैं जिनके जरिए हम ट्रेन की लाइव लोकेशन ट्रैक कर सकते हैं। लेकिन लगभग दस साल पहले, ऐसी कोई टेक्नोलॉजी या एप्लिकेशन मौजूद नहीं थी। उस समय तक ट्रेन की लाइव लोकेशन जानना आसान नहीं था।


ऐसे ही एक आम भारतीय की कहानी ने भारत में ट्रेन ट्रैकिंग की दिशा बदल दी। 2015 में एक युवक ट्रेन से यात्रा करने स्टेशन पहुंचा था। लेकिन उनकी ट्रेन घंटों लेट हो गई। प्लेटफॉर्म पर बैठे-बैठे वह परेशान हो गए। तभी उनके दिमाग में एक आइडिया आया। उस समय भारत में ओला और उबर जैसी कैब सर्विस एप्स लोकप्रिय हो रही थीं। ये एप्स ग्राहकों को उनके ड्राइवर और गंतव्य की लाइव लोकेशन दिखाती थीं। तभी युवक ने सोचा कि अगर टैक्सी के लिए यह संभव है तो ट्रेन के लिए क्यों नहीं। इसी विचार ने जन्म दिया Where is My Train App को।


यह युवक पहले से ही टेक्नोलॉजी में सक्रिय थे। 2013 में उन्होंने Sigmoid Labs नाम की एक कंपनी बनाई थी। यह कंपनी डेटा इंजीनियरिंग, मशीन लर्निंग और जेनरेटिव AI का इस्तेमाल करके बिजनेस प्रोसेस और डेटा को मॉडर्नाइज करने का काम करती थी। अहमद ने Sigmoid Labs की टीम के साथ मिलकर ट्रेन ट्रैकिंग एप बनाने का काम शुरू किया।


शुरुआत में राह आसान नहीं थी। उन्होंने एक साल तक 20 से अधिक प्रोटोटाइप बनाए, लेकिन कई बार असफलता हाथ लगी। भारत में उस समय इंटरनेट की पहुँच सीमित थी और उन्हें बड़ी फंडिंग भी नहीं मिली। फिर भी अहमद ने हार नहीं मानी और सेल टावर डेटा का इस्तेमाल करके ट्रेन की लोकेशन ट्रैक करने का तरीका खोज निकाला। इसका मतलब यह हुआ कि मोबाइल इंटरनेट के बिना भी ट्रेन की लाइव ट्रैकिंग संभव हो गई।


Where is My Train App की यह यूनिक टेक्नोलॉजी गूगल को इतनी पसंद आई कि उसने इसे खरीदने की पेशकश की। दिसंबर 2018 में गूगल ने Sigmoid Labs को लगभग 280 करोड़ रुपये में अधिग्रहित कर लिया। हालांकि आधिकारिक तौर पर वित्तीय शर्तों का खुलासा नहीं किया गया था। गूगल ने यह कदम “नेक्स्ट बिलियन यूजर्स” पहल को मजबूत करने के लिए उठाया, ताकि उभरते बाजारों में अधिक उपयोगकर्ताओं को ट्रेन ट्रैकिंग जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा सकें।


आज Where is My Train App भारत में 10 करोड़ से अधिक डाउनलोड के साथ एक लोकप्रिय एप बन चुका है। यह एप केवल ट्रेन की लाइव लोकेशन ही नहीं देता, बल्कि ऑफलाइन शेड्यूल, प्लेटफॉर्म नंबर, कोच लेआउट, सीट की उपलब्धता, PNR स्टेटस, डेस्टिनेशन अलार्म और लोकेशन शेयरिंग जैसी सुविधाएँ भी प्रदान करता है। 


सेल टावर डेटा के इस्तेमाल से यह एप GPS या इंटरनेट के बिना भी काम करता है, जिससे यह यात्रियों के लिए बैटरी-एफिशिएंट और विश्वसनीय ट्रैवल साथी बन गया। इस युवक की मेहनत और दूरदर्शिता की वजह से आज करोड़ों भारतीय अपनी ट्रेन की लाइव लोकेशन जान सकते हैं और अपनी यात्रा को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकते हैं। उनके इस आइडिया ने भारतीय रेलवे की तकनीकी दुनिया में क्रांति ला दी।