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घर में दुकान, क्लीनिक या ऑफिस चला रहे हैं तो हो जाएं सावधान! इस नियम का पालन करना जरूरी, वरना आ सकता है नगर निगम का नोटिस

पटना में आवासीय मकान में दुकान, ऑफिस, क्लीनिक या कोचिंग चला रहे हैं तो यह खबर आपके लिए जरूरी है। नगर निगम का नोटिस मिलने पर घबराने के बजाय पहले मास्टर प्लान-2031 में अपने इलाके की जोनिंग और नियमों की जानकारी जांचें।

घर में दुकान, क्लीनिक या ऑफिस चला रहे हैं तो हो जाएं सावधान! इस नियम का पालन करना जरूरी, वरना आ सकता है नगर निगम का नोटिस
Tejpratap
Tejpratap
6 मिनट

पटना :  अगर आपके आवासीय मकान में दुकान, क्लीनिक, ऑफिस, कोचिंग सेंटर, गोदाम या कोई अन्य गैर-आवासीय गतिविधि चल रही है और नगर निगम की ओर से नोटिस मिला है, तो इसे हल्के में लेना महंगा पड़ सकता है। ऐसे मामलों में सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि जिस इलाके में आपका मकान या परिसर स्थित है, वहां संबंधित गतिविधि की अनुमति है या नहीं। इसका जवाब पटना मास्टर प्लान-2031 में मिल सकता है।

शहर में जमीन और भवनों के उपयोग को व्यवस्थित करने के लिए मास्टर प्लान में अलग-अलग क्षेत्रों का जोन तय किया गया है। किसी जगह पर आवासीय गतिविधि की अनुमति है, तो किसी इलाके को व्यावसायिक, मिश्रित उपयोग, औद्योगिक, सार्वजनिक या परिवहन से जुड़ी गतिविधियों के लिए चिह्नित किया गया है। ऐसे में सिर्फ मकान का होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि उस परिसर में क्या गतिविधि संचालित की जा रही है।

नोटिस मिला है तो पहले समझें जोनिंग का नियम

किसी भूखंड या भवन का उपयोग उसी जोन के निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाना चाहिए। मास्टर प्लान में अलग-अलग गतिविधियों के लिए सामान्य रूप से तीन तरह के प्रावधान तय किए गए हैं। कुछ गतिविधियों की सीधे अनुमति होती है, कुछ गतिविधियों के लिए संबंधित प्राधिकरण से मंजूरी लेना जरूरी होता है, जबकि कुछ गतिविधियां पूरी तरह प्रतिबंधित हो सकती हैं।

यही वजह है कि नगर निगम की ओर से अनधिकृत गैर-आवासीय उपयोग का नोटिस मिलने पर संबंधित भवन मालिक को पहले अपने इलाके की जोनिंग स्थिति की जांच करनी चाहिए। यह देखना होगा कि वहां चल रही गतिविधि उस क्षेत्र में अनुमत है, अनुमति के बाद संचालित की जा सकती है या पूरी तरह प्रतिबंधित है।

घर में दुकान या क्लीनिक है तो सिर्फ कारोबार देखना काफी नहीं

कई इलाकों में आवासीय मकानों से दुकान, ऑफिस, क्लीनिक, कोचिंग संस्थान या अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। लेकिन किसी मकान में लंबे समय से कारोबार चल रहा है, इसका मतलब यह नहीं कि उसका उपयोग स्वतः वैध है।

नगर नियोजन के नियमों के अनुसार संबंधित भूखंड का निर्धारित भूमि उपयोग देखना जरूरी है। मास्टर प्लान में उस इलाके को किस श्रेणी में रखा गया है और वहां किस तरह की गतिविधि की अनुमति है, इसका परीक्षण किया जा सकता है। पुनर्विकास या नए निर्माण के दौरान भी जोनिंग नियमों का पालन महत्वपूर्ण होगा। यानी पुरानी इमारत को तोड़कर नया भवन बनाने या उसके उपयोग में बदलाव करने के समय भी मास्टर प्लान के नियम लागू हो सकते हैं।

आर-1 और आर-2 में बांटा गया आवासीय क्षेत्र

पटना मास्टर प्लान-2031 में आवासीय क्षेत्रों को दो प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया गया है। पहली श्रेणी आर-1 है, जिसे प्रस्तावित मुख्य शहरी क्षेत्र के लिए रखा गया है। दूसरी श्रेणी आर-2 है, जिसमें प्रस्तावित विकास केंद्रों को शामिल किया गया है।

इसी तरह व्यावसायिक क्षेत्रों को भी अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। सी-1 और सी-2 श्रेणी के अलावा शहर में विभिन्न व्यावसायिक पट्टियों और वाणिज्यिक हब की भी पहचान की गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कारोबार और अन्य गैर-आवासीय गतिविधियां योजनाबद्ध तरीके से विकसित हों।

1981 के बाद शहर को मिला प्रभावी मास्टर प्लान

पटना के तेजी से बढ़ते विस्तार के बीच लंबे समय तक एक प्रभावी मास्टर प्लान की जरूरत महसूस की जाती रही। दस्तावेज के अनुसार 1981 के बाद शहर के लिए कोई प्रभावी मास्टर प्लान नहीं था। इस दौरान शहर का विस्तार तेजी से हुआ और कई क्षेत्रों में अनियोजित विकास भी देखने को मिला।

अनियोजित निर्माण और बढ़ती आबादी का असर सड़कों, जलापूर्ति, जल निकासी और दूसरी बुनियादी सुविधाओं पर पड़ा। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2031 तक के लिए संशोधित मास्टर प्लान तैयार किया गया। पटना मास्टर प्लान-2031 को 30 अक्टूबर 2017 को अधिसूचित किया गया था। इसमें भूमि उपयोग के वर्गीकरण के साथ विकास नियंत्रण से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए।

2031 की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार हुई योजना

पटना मास्टर प्लान-2031 का मुख्य उद्देश्य शहर का सुनियोजित और समेकित विकास करना है। बढ़ती आबादी और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए आवास, व्यापार, उद्योग, परिवहन और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए जमीन के उपयोग की दिशा तय की गई है। योजना का मकसद केवल इमारतों के निर्माण को नियंत्रित करना नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि शहर में सुविधाओं पर अनावश्यक दबाव न पड़े। इसलिए अलग-अलग गतिविधियों के लिए भूमि उपयोग की श्रेणियां निर्धारित की गई हैं।

सीधी बात यह है कि अगर आपके आवासीय मकान में कोई गैर-आवासीय गतिविधि चल रही है और नगर निगम ने नोटिस भेजा है, तो सबसे पहले पटना मास्टर प्लान-2031 में अपने क्षेत्र की जोनिंग और वहां अनुमत गतिविधियों की जानकारी जरूर जांच लें। नियमों की सही जानकारी ही यह स्पष्ट करेगी कि गतिविधि वैध है, अनुमति की जरूरत है या उस क्षेत्र में प्रतिबंधित है।