Bihar News : बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत पुस्तकालयाध्यक्षों यानी लाइब्रेरियन के लिए ट्रांसफर को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। बिहार राज्य शिक्षक स्थानांतरण नियमावली 2026 में किए गए संशोधन के बाद अब करीब 3,000 लाइब्रेरियन भी स्थानांतरण प्रक्रिया के दायरे में आ गए हैं। इसमें सक्षमता परीक्षा पास कर चुके तथा पुस्तकालयाध्यक्ष के पद पर कार्यरत कर्मी शामिल होंगे। नई व्यवस्था के तहत शिक्षकों की तर्ज पर लाइब्रेरियन का भी ऐच्छिक और पारस्परिक यानी म्यूचुअल ट्रांसफर किया जा सकेगा। हालांकि, ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी तरह स्कूलों में लाइब्रेरियन की उपलब्धता और विभागीय नियमों पर निर्भर होगी।
पोर्टल पर अपडेट होगी लाइब्रेरियन की पूरी जानकारी
शिक्षा विभाग ने जिला शिक्षा पदाधिकारियों को सरकारी स्कूलों में कार्यरत पुस्तकालयाध्यक्षों की जानकारी विभागीय पोर्टल पर अपडेट करने की जिम्मेदारी दी है। ट्रांसफर के दौरान वरिष्ठता और अंक प्रणाली को आधार बनाया जाएगा।यदि किसी एक स्कूल से एक से अधिक लाइब्रेरियन ट्रांसफर के लिए आवेदन करते हैं, तो प्राथमिकता तय करते समय गंभीर बीमारी, दिव्यांगता और अन्य निर्धारित श्रेणियों को ध्यान में रखा जाएगा। यानी केवल आवेदन करने से मनचाही जगह पर पोस्टिंग मिलना तय नहीं होगा।
महिला और पुरुष लाइब्रेरियन के लिए अलग व्यवस्था
नियमावली में महिला और पुरुष पुस्तकालयाध्यक्षों के ट्रांसफर के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई है। महिला लाइब्रेरियन को गृह पंचायत के अलावा ऐच्छिक प्रखंड के अंदर ट्रांसफर का विकल्प मिलेगा।वहीं, पुरुष लाइब्रेरियन के मामले में गृह प्रखंड के अलावा जिले के दूसरे प्रखंड में ट्रांसफर का प्रावधान रहेगा। इसके अलावा दो पुस्तकालयाध्यक्ष आपसी सहमति से विभागीय पोर्टल के माध्यम से म्यूचुअल ट्रांसफर के लिए आवेदन कर सकेंगे।लेकिन यहां सबसे बड़ी शर्त यह होगी कि संबंधित स्कूल में लाइब्रेरियन की उपलब्धता बनी रहे। यानी किसी स्कूल से लाइब्रेरियन को हटाने से पहले वहां दूसरे लाइब्रेरियन की व्यवस्था जरूरी होगी।
लापरवाही या वित्तीय अनियमितता के आरोप में भी हो सकता है ट्रांसफर
जिन पुस्तकालयाध्यक्षों पर वित्तीय अनियमितता, अनुशासनहीनता, लापरवाही या अमर्यादित व्यवहार जैसे आरोप हैं, उनका ट्रांसफर अलग प्रक्रिया के तहत किया जा सकता है। इसके लिए जिलाधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी की अनुशंसा महत्वपूर्ण होगी।हालांकि कार्रवाई से पहले संबंधित पुस्तकालयाध्यक्ष को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा। उन्हें 7 कार्य दिवस के भीतर अपना जवाब देना होगा। जिला स्थापना समिति के फैसले के खिलाफ आदेश जारी होने के 15 दिनों के भीतर प्रमंडलीय आयुक्त के समक्ष अपील की जा सकेगी। वहीं, राज्य स्थापना समिति के फैसले के खिलाफ भी पुस्तकालयाध्यक्ष 15 दिनों के भीतर शिक्षा विभाग के सचिव के समक्ष अपील कर सकेंगे।
बिहार में 43 हजार लाइब्रेरियन की नियुक्ति की तैयारी
सरकार की योजना आने वाले समय में बिहार के स्कूलों में बड़े पैमाने पर पुस्तकालयाध्यक्षों की नियुक्ति करने की है। करीब 43 हजार स्कूलों में लाइब्रेरियन की नियुक्ति का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि नियुक्ति से पहले स्कूलों में लाइब्रेरी की आधारभूत व्यवस्था और पर्याप्त किताबों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा।
पहले चरण में करीब 7 हजार लाइब्रेरियन की नियुक्ति की योजना है। इनकी तैनाती मुख्य रूप से कक्षा 9वीं से 12वीं वाले स्कूलों में छात्रों की संख्या के आधार पर की जाएगी। अधिक छात्र संख्या वाले स्कूलों में दो से तीन लाइब्रेरियन की नियुक्ति का प्रावधान हो सकता है।
78 हजार स्कूल, लेकिन सिर्फ 3000 में लाइब्रेरियन
बिहार में करीब 78 हजार सरकारी स्कूलों के मुकाबले अभी लगभग 3,000 स्कूलों में ही लाइब्रेरियन कार्यरत बताए जा रहे हैं। ऐसे में ट्रांसफर की नई व्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौती स्कूलों में खाली पदों की स्थिति है।एक स्कूल में सामान्य तौर पर एक ही लाइब्रेरियन का पद होने के कारण बड़ी संख्या में पुस्तकालयाध्यक्षों को उनकी पसंद की जगह मिलना आसान नहीं होगा। म्यूचुअल ट्रांसफर का विकल्प मिलने के बावजूद अनुमान है कि बड़ी संख्या में लाइब्रेरियन अपनी पसंद की जगह पर ट्रांसफर नहीं करा पाएंगे।यानी नियमों में ट्रांसफर का रास्ता खुल गया है, लेकिन स्कूलों में लाइब्रेरियन के खाली पद और सीमित सीटें ही मनचाही पोस्टिंग की राह में सबसे बड़ी बाधा बन सकती हैं।





