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दूसरी पत्नी भी पारिवारिक पेंशन की हकदार, पटना हाईकोर्ट का अहम फैसला

Patna High Court: पटना हाईकोर्ट ने मृत सरकारी कर्मचारी की दूसरी पत्नी के पारिवारिक पेंशन के दावे पर बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने दूसरी शादी की अनुमति नहीं लेने के आधार पर पेंशन खारिज करने वाला विभागीय आदेश रद्द कर नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया।

Patna High Court
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Mukesh Srivastava
4 मिनट

Patna High Court: पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में मृत सरकारी कर्मचारी की दूसरी पत्नी को पारिवारिक पेंशन के मामले में बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर पेंशन का दावा खारिज नहीं किया जा सकता कि कर्मचारी ने दूसरी शादी के लिए सक्षम प्राधिकारी से औपचारिक अनुमति नहीं ली थी, खासकर तब जब उसने अनुमति के लिए आवेदन किया हो और मामले के अन्य महत्वपूर्ण तथ्य भी मौजूद हों। न्यायाधीश पूर्णेंदु सिंह की एकलपीठ ने विभाग के 5 फरवरी 2019 के आदेश को निरस्त करते हुए मामले में सभी प्रासंगिक तथ्यों पर विचार कर नए सिरे से निर्णय लेने का निर्देश दिया है।



सीतामढ़ी निवासी कुसुम देवी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर खुद को दिवंगत जय लाल साह की दूसरी पत्नी बताते हुए पारिवारिक पेंशन की मांग की थी। जय लाल साह जल संसाधन विभाग में क्लर्क (ग्रेड-III) के पद पर कार्यरत थे। सेवा में रहते हुए 17 अप्रैल 2009 को उनकी मृत्यु हो गई थी। विभाग के मुख्य अभियंता ने वर्ष 2019 में कुसुम देवी का पेंशन दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि मृत कर्मचारी ने दूसरी शादी के लिए सक्षम प्राधिकारी से अनुमति नहीं ली थी।



सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने यह महत्वपूर्ण तथ्य आया कि जय लाल साह ने सेवा में रहते हुए 28 फरवरी 1982 को दूसरी शादी के लिए अनुमति मांगते हुए आवेदन दिया था। इस आवेदन की प्रति भी रिकॉर्ड में मौजूद थी। कोर्ट ने माना कि विभाग ने इस महत्वपूर्ण तथ्य पर समुचित विचार नहीं किया। अदालत ने कहा कि केवल अनुमति नहीं लिए जाने के आधार पर पेंशन का दावा खारिज करना उचित नहीं है, जबकि कर्मचारी ने दूसरी शादी के लिए अनुमति मांगने की प्रक्रिया शुरू की थी।



मामले में यह तथ्य भी सामने आया कि मृत कर्मचारी की पहली पत्नी की मृत्यु जय लाल साह की मृत्यु के बाद 17 दिसंबर 2009 को हुई थी। याचिकाकर्ता कुसुम देवी से मृत कर्मचारी के दो बेटे और चार बेटियां हैं। पीठ ने यह भी ध्यान दिया कि पहली पत्नी की मृत्यु के बाद कुसुम देवी और जय लाल साह साथ रहे तथा पति-पत्नी के रूप में उनका संबंध जारी रहा।



हाईकोर्ट ने बिहार सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 1976 के नियम 23(2) का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी कर्मचारी की दूसरी शादी पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। निर्धारित परिस्थितियों में सरकार ऐसी शादी के लिए अनुमति दे सकती है। अदालत ने माना कि विभाग ने मृत कर्मचारी के अनुमति आवेदन और मामले से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों पर पर्याप्त विचार नहीं किया। ऐसे में 5 फरवरी 2019 का विभागीय आदेश टिकाऊ नहीं है।



हाईकोर्ट ने मुख्य अभियंता को निर्देश दिया कि मामले के सभी सही और प्रासंगिक तथ्यों पर विचार करते हुए कारणयुक्त नया आदेश पारित किया जाए। साथ ही कानून के अनुसार याचिकाकर्ता को पारिवारिक पेंशन का भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।कोर्ट के इस फैसले से कुसुम देवी को पारिवारिक पेंशन के दावे के मामले में बड़ी राहत मिली है।

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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता