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बर्खास्त CISF जवान को पटना हाईकोर्ट से राहत, दो महीने में बहाल करने का आदेश; ड्यूटी से गायब रहने का आरोप

Patna High Court: 137 दिन तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने पर बर्खास्त किए गए CISF जवान को पटना हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली। कोर्ट ने बर्खास्तगी रद्द कर दो महीने में बहाली का आदेश दिया, लेकिन अनुपस्थिति अवधि का वेतन देने से इनकार किया।

Patna High Court News
© File
Mukesh Srivastava
3 मिनट

Patna High Court: ड्यूटी से बिना सूचना 137 दिनों तक गायब रहने के आरोप में बर्खास्त किए गए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के जवान को पटना हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने नौकरी से हटाए जाने के सभी आदेश रद्द करते हुए उसे दो महीने के भीतर दोबारा सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया है। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अनुपस्थित रहने की अवधि का वेतन जवान को नहीं मिलेगा। उस अवधि को उसके अवकाश (लीव) में समायोजित किया जाएगा।


पटना हाईकोर्ट के जस्टिस हरीश कुमार की एकलपीठ ने CISF जवान नवनीत कुमार यादव की याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया। नवनीत कुमार यादव की नियुक्ति 21 मार्च 2017 को CISF में सिपाही के पद पर हुई थी। उन्होंने 4 मई 2017 को ओडिशा के मुंडाली स्थित रीजनल ट्रेनिंग सेंटर (RTC) में ज्वाइन किया और प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें भिलाई RTC भेजा गया।


18 से 24 अक्टूबर 2018 तक उन्होंने एक सप्ताह की छुट्टी ली थी, लेकिन छुट्टी समाप्त होने के बाद भी वह ड्यूटी पर वापस नहीं लौटे। करीब 137 दिनों तक बिना अनुमति अनुपस्थित रहने पर उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई। जांच में दोषी पाए जाने के बाद उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।


नवनीत यादव ने बर्खास्तगी के आदेश को पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि बीमारी के कारण वह ड्यूटी पर नहीं लौट सके थे। इस संबंध में उन्होंने दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (DMCH) और सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के मेडिकल दस्तावेज भी अदालत में प्रस्तुत किए। उनका कहना था कि वह विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह पर इलाज करा रहे थे। इसी दौरान उन्हें विभागीय जांच से संबंधित नोटिस मिला।


कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलों और प्रस्तुत मेडिकल दस्तावेजों पर विचार करते हुए CISF द्वारा जारी बर्खास्तगी के आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने CISF को निर्देश दिया कि नवनीत कुमार यादव को दो महीने के भीतर सेवा में पुनः बहाल किया जाए। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिस अवधि तक वह बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित रहे, उस दौरान का वेतन उन्हें नहीं मिलेगा। साथ ही, अनुपस्थिति की पूरी अवधि को उनके उपलब्ध अवकाश में समायोजित करने का निर्देश दिया गया है।

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रिपोर्टर

FIRST BIHAR

FirstBihar संवाददाता