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BIHAR NEWS: "आप बस ऐसा कीजिए… हम आपको 15 से 20 हजार सैलरी वाली नौकरी दिलवा देंगे" – इस तरह करता था फ्रॉड, अब खुला गैंग का राज

Cyber Fraud: पटना में एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। यह गिरोह ऑनलाइन गेमिंग और जुआ के नाम पर लोगों को ठग रहा था। पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि गिरोह का मास्टरमाइंड अंकित कुमार अभी फरार है। पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रह

BIHAR NEWS: "आप बस ऐसा कीजिए… हम आपको 15 से 20 हजार सैलरी वाली नौकरी दिलवा देंगे" – इस तरह करता था फ्रॉड, अब खुला गैंग का राज
Tejpratap
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Cyber Fraud: राजधानी पटना से एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का खुलासा हुआ है, जिसने ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर देशभर के लोगों को निशाना बनाकर ठगी का जाल बिछा रखा था। हैरान करने वाली बात यह है कि इस गिरोह में युवाओं को नौकरी का झांसा देकर 15 से 30 हजार रुपये तक की सैलरी पर रखा जाता था, लेकिन उनसे असल में ठगी का काम कराया जाता था। पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह का सरगना अब भी फरार है।

यह पूरा मामला शास्त्री नगर थाना क्षेत्र का है, जहां एक साधारण सी दिखने वाली सोसायटी के फ्लैट में बड़े स्तर पर साइबर ठगी का नेटवर्क संचालित हो रहा था। बाहर से देखने पर सब कुछ सामान्य लगता था, लेकिन चौथी मंजिल के एक फ्लैट के अंदर ‘फ्रॉड कॉल सेंटर’ चल रहा था। यहां मौजूद युवक लैपटॉप और मोबाइल के जरिए देशभर के लोगों को ठगने का काम कर रहे थे। 


गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने शिवपुरी इलाके में कार्बन फैक्ट्री के पास स्थित एक बिल्डिंग के फ्लैट नंबर 404 में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने पांच लोगों को मौके से गिरफ्तार कर लिया, जबकि इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड अंकित कुमार फरार होने में सफल रहा। उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।


छापेमारी में बरामद सामान ने इस पूरे नेटवर्क की गहराई को उजागर कर दिया। पुलिस को फ्लैट से 21 मोबाइल फोन, 24 सिम कार्ड, कई एटीएम कार्ड, चेक बुक, पासबुक और दो लैपटॉप मिले हैं। इससे साफ है कि यह गिरोह काफी संगठित तरीके से बड़े स्तर पर ठगी को अंजाम दे रहा था।


पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह का सरगना अंकित कुमार बिहार के अलग-अलग जिलों से बेरोजगार युवाओं को नौकरी का लालच देकर पटना बुलाता था। उन्हें फ्लैट में ही रहने और खाने की व्यवस्था के साथ 15 से 30 हजार रुपये तक की सैलरी का वादा किया जाता था। लेकिन जॉब के नाम पर उनसे ऑनलाइन ठगी कराई जाती थी।


गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि वे सोशल मीडिया, कॉल और मैसेजिंग ऐप के जरिए लोगों को ऑनलाइन गेमिंग और जुए में पैसा कमाने का झांसा देते थे। इसके बाद उन्हें एक फर्जी प्लेटफॉर्म पर जोड़कर धीरे-धीरे उनसे पैसे ऐंठे जाते थे। खासकर दक्षिण भारत के लोगों को ज्यादा निशाना बनाया जाता था, ताकि भाषा और दूरी का फायदा उठाकर अपनी पहचान छिपाई जा सके।


इस गैंग का संचालन किसी कॉरपोरेट कंपनी की तरह किया जाता था, जहां हर सदस्य की एक तय भूमिका होती थी। कोई कॉल करता था, कोई चैट के जरिए लोगों को फंसाता था, तो कोई बैंकिंग ट्रांजेक्शन संभालता था। सभी लोग कोड नेम का इस्तेमाल करते थे, जिससे उनकी असली पहचान छिपी रहे।


इस मामले में सचिवालय एसडीपीओ-2 साकेत कुमार ने बताया कि गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए इस अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। उन्होंने कहा कि पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है और फरार सरगना को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।


पुलिस अब बरामद मोबाइल, सिम कार्ड और लैपटॉप की फॉरेंसिक जांच करा रही है, ताकि इस गिरोह के अन्य कनेक्शन और ठगी के शिकार लोगों की पहचान की जा सके। आशंका जताई जा रही है कि इस नेटवर्क के तार दूसरे राज्यों और बड़े साइबर अपराध गिरोहों से भी जुड़े हो सकते हैं।