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समोसे के लिए घर छोड़कर भागा 14 साल का बच्चा: 20 रुपये की जिद बनी बड़ी मुसीबत

बिहार के बगहा में 14 वर्षीय बच्चा समोसे के लिए 20 रुपये न मिलने पर घर छोड़कर भाग गया। मां के पर्स से 500 रुपये लेकर कई शहरों तक पहुंच गया। 8 दिनों की तलाश के बाद पुलिस ने बच्चे को प्रयागराज से सकुशल बरामद किया।

बिहार न्यूज
घर छोड़ भागा बच्चा 8 दिन बाद मिला
© रिपोर्टर
Jitendra Vidyarthi
6 मिनट

BAGAHA: बिहार के बगहा जिले से एक 14 वर्षीय बच्चे की ऐसी कहानी सामने आई है, जिसे सुनकर हर कोई दंग रह गया। बच्चे की जुबानी उसकी पूरी कहानी सुनकर बगहा एसपी भी हैरान रह गईं। इस बच्चे की कहानी में मासूमियत भी है और जिद भी। आप जानकर हैरान हो जाएंगे कि मात्र 20 रुपये के लिए इस मासूम बच्चे ने क्या-क्या कदम उठा लिए। सिर्फ 20 रुपये की वजह से पूरा परिवार और बगहा पुलिस सकते में आ गई, और 8 दिनों तक पुलिस की नींद उड़ गई। पूरी कहानी जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे......


सिर्फ 20 रुपये के लिए बच्चे ने छोड़ दिया घर

इस पूरे मामले की शुरुआत केवल 20 रुपये से हुई। बच्चा समोसा खाना चाहता था और उसने अपनी मां से 20 रुपये मांगे। लेकिन उस समय मां ने पैसे देने से मना कर दिया।बच्चा इस बात से बहुत नाराज हो गया। उसकी उम्र कम थी, समझ भी कम थी, इसलिए उसने गुस्से में गलत फैसला ले लिया। उसने सोचा कि जब उसकी बात नहीं मानी जा रही, तो वह घर छोड़ देगा।यही छोटी सी जिद पूरे परिवार के लिए बड़ी मुसीबत बन गई। 


मम्मी के पर्स से 500 रुपये निकालकर भाग गया

गुस्से में बच्चे ने चुपचाप अपनी मां के पर्स से 500 रुपये निकाल लिए। उसने सोचा कि इन पैसों से वह बाहर रह सकेगा और अपनी जरूरतें पूरी कर लेगा,बिना किसी को बताए वह घर से निकल गया। बाद में जब पुलिस ने उसे बरामद किया और प्रभारी एसपी निर्मला कुमारी ने उससे बात की, तो बच्चे ने खुद स्वीकार किया की मम्मी के पर्स से 500 रुपये निकाले थे।बच्चे की यह बात सुनकर सभी हैरान रह गए। एक छोटी सी नाराजगी ने उसे चोरी जैसे गलत कदम तक पहुंचा दिया। यही कारण है कि पुलिस ने इस मामले को केवल बरामदगी नहीं, बल्कि बच्चों को सीख देने वाला मामला बताया।


 बिना टिकट कई शहरों तक पहुंच गया बच्चा

घर छोड़ने के बाद बच्चा पहले नरकटियागंज पहुंचा। वहां से उसने बिना टिकट ट्रेन पकड़ ली और गोरखपुर चला गया। इसके बाद उसने दूसरी ट्रेन पकड़ी और लखनऊ पहुंच गया।लखनऊ से वह गोंडा गया और फिर वहां से प्रयागराज पहुंच गया। इतनी कम उम्र में अकेले कई शहरों की यात्रा करना बेहद खतरनाक था। रास्ते में उसके साथ कोई भी अनहोनी हो सकती थी। बच्चे को शायद यह अंदाजा भी नहीं था कि वह कितने बड़े खतरे में है। यही बात पुलिस अधिकारियों को भी सबसे ज्यादा चिंतित कर रही थी। परिवार को डर था कि कहीं बच्चा किसी गलत हाथ में न पड़ जाए।


 8 दिनों तक परिवार और पुलिस की उड़ गई नींद

जब बच्चा घर नहीं लौटा तो परिवार की चिंता बढ़ती गई।काफी खोजबीन के बाद भी जब उसका कोई पता नहीं चला, तो परिजनों ने अपहरण की आशंका जताई।17 अप्रैल को लौकरिया थाने में बच्चे के अपहरण का मामला दर्ज कराया गया। इसके बाद बगहा पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने बच्चे के मोबाइल की लोकेशन ट्रैक करनी शुरू की और हर संभव जगह संपर्क बनाया। पूरे 8 दिनों तक परिवार परेशान रहा। माता-पिता की हालत बेहद खराब थी। पुलिस भी लगातार दबाव में थी, क्योंकि मामला एक नाबालिग बच्चे की सुरक्षा से जुड़ा था।यह सिर्फ एक गुमशुदगी नहीं, बल्कि परिवार के लिए सबसे कठिन समय बन गया था।


लेडी सिंघम SDPO रागिनी कुमारी की जांच से मिला बच्चा

रामनगर SDPO रागिनी कुमारी, जिन्हें इलाके में लेडी सिंघम के नाम से भी जाना जाता है, ने इस मामले में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने तकनीकी जांच और मोबाइल टॉवर लोकेशन के जरिए बच्चे की तलाश तेज की जांच के दौरान पता चला कि बच्चे का मोबाइल प्रयागराज रेलवे स्टेशन के पास ऑन हुआ है। यह पुलिस के लिए सबसे बड़ा सुराग साबित हुआ।तुरंत प्रयागराज रेलवे स्टेशन की रेलवे पुलिस से संपर्क किया गया। वहां की पुलिस ने तेजी दिखाते हुए बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया और इसकी सूचना बगहा पुलिस को दी।इस तरह पुलिस की मेहनत रंग लाई और बच्चा सुरक्षित अपने परिवार तक वापस पहुंच गया।


पुलिस ने दिया बड़ा संदेश

बगहा पुलिस जिले की प्रभारी एसपी निर्मला कुमारी ने इस घटना के बाद बच्चों और अभिभावकों दोनों को बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को छोटी-छोटी बातों पर घर छोड़कर नहीं जाना चाहिए। घरवालों की चिंता, सुरक्षा और परिवार का महत्व समझना बहुत जरूरी है। गुस्से में लिया गया एक छोटा फैसला कई बार बहुत बड़ा संकट बन जाता है।एसपी ने बच्चे से भी यही संदेश दिलवाया ताकि दूसरे बच्चे और किशोर ऐसी गलती दोबारा न करें। बिहार पुलिस बगहा के फेसबुक पेज पर इस बातचीत का वीडियो भी साझा किया गया। यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि हर परिवार के लिए एक सीख है बच्चों की छोटी नाराजगी को हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि कभी-कभी वही छोटी जिद बहुत बड़ी मुसीबत बन जाती है......

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