Nepal Flood Alert: नेपाल में अचानक आई भीषण फ्लैश फ्लड ने जहां भारी तबाही मचाई, वहीं इसका असर बिहार तक पहुंचने की आशंका से प्रशासन और आम लोगों की चिंता बढ़ गई थी। नेपाल से त्रिशूली और नारायणी नदी के रास्ते पानी गंडक नदी तक पहुंचा तो वाल्मीकिनगर गंडक बराज पर जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। पानी के भारी दबाव को देखते हुए बराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए। कुछ घंटों तक बिहार के सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ के बड़े खतरे की आशंका बनी रही, लेकिन अब राहत की खबर है। गंडक का जलस्तर लगातार घट रहा है और बिहार पर मंडरा रहा बड़ा खतरा फिलहाल टल गया है। नेपाल में आई इस आपदा के बाद सबसे बड़ा सवाल यही था कि आखिर वहां की विनाशकारी फ्लैश फ्लड का असर बिहार में इतना बड़ा क्यों नहीं हुआ? इसके पीछे नदियों की प्राकृतिक व्यवस्था और पानी के फैलाव ने अहम भूमिका निभाई।
पहाड़ों से शुरू हुआ तबाही का सफर
नेपाल-चीन सीमा के पास ऊंचे हिमालयी इलाके में बुधवार सुबह अचानक फ्लैश फ्लड की स्थिति बनी। बताया जा रहा है कि नेपाल के रसुवा जिले में ल्हेंडे नदी के ऊपरी इलाके में अचानक बड़ी मात्रा में पानी, बर्फ और चट्टानों का मलबा नीचे की ओर आया। आशंका जताई गई कि पहाड़ से बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा खिसकने के कारण नदी का प्रवाह कुछ समय के लिए बाधित हो गया।
नदी में पानी जमा होता गया और प्राकृतिक बांध जैसी स्थिति बन गई। इसके बाद जब पानी का दबाव बढ़ा तो जमा पानी अचानक तेजी से नीचे की ओर निकल गया। पानी के साथ भारी मात्रा में मिट्टी, पत्थर और मलबा भी बहता चला गया। फ्लैश फ्लड का वेग इतना तेज था कि कई इलाकों में लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। इस आपदा का असर सबसे पहले रसुवा जिले के टिमुरे और आसपास के इलाकों में दिखाई दिया। बताया गया कि कई जगहों पर मौसम सामान्य था और बारिश भी नहीं हो रही थी, इसलिए लोगों को अचानक आने वाली बाढ़ का अंदाजा नहीं था।
भोटे कोशी से त्रिशूली और फिर नारायणी तक पहुंचा पानी
नेपाल में शुरू हुई इस फ्लैश फ्लड का पानी कई नदियों के रास्ते आगे बढ़ा। ऊपरी इलाके से आया पानी भोटे कोशी नदी तक पहुंचा। इसके बाद यह त्रिशूली नदी में मिला। त्रिशूली नदी ने इस तेज जलप्रवाह का बड़ा हिस्सा अपने भीतर समेटा।
आगे चलकर यही पानी नारायणी नदी प्रणाली में पहुंचा। इसके बाद इसका असर गंडक नदी तक दिखाई दिया। चूंकि गंडक नदी नेपाल से निकलकर बिहार में प्रवेश करती है, इसलिए नेपाल की फ्लैश फ्लड के बाद बिहार के लोगों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक था। प्रशासन ने भी स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हाई अलर्ट जारी किया और गंडक नदी से जुड़े संवेदनशील इलाकों पर नजर रखी।
वाल्मीकिनगर बराज पर तेजी से बढ़ा जलस्तर
नेपाल से आया पानी जब बिहार सीमा के करीब पहुंचा तो वाल्मीकिनगर गंडक बराज पर पानी का दबाव तेजी से बढ़ने लगा। रात के समय बराज पर जलप्रवाह करीब 1.50 लाख क्यूसेक तक पहुंचने की जानकारी सामने आई। तेज जलप्रवाह को सुरक्षित तरीके से आगे निकालने और बराज पर दबाव कम रखने के लिए सभी 36 गेट खोल दिए गए। यह स्थिति प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि गंडक के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी से बिहार के निचले और तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता था। हालांकि, कुछ समय बाद राहत की खबर आने लगी। गंडक नदी का जलस्तर धीरे-धीरे कम होने लगा और बराज से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा भी नीचे आई।
आखिर कैसे टला बिहार पर बड़ा खतरा?
बिहार के लिए राहत की सबसे बड़ी वजह यह रही कि त्रिशूली नदी में आया पानी नारायणी नदी के बड़े जलक्षेत्र में फैल गया। पानी का बड़ा हिस्सा नारायणी नदी प्रणाली में समाहित और विस्तृत क्षेत्र में फैलने के कारण पूरा दबाव सीधे गंडक नदी पर नहीं पड़ा।
यही वजह रही कि गंडक नदी में जलप्रवाह जरूर तेजी से बढ़ा, लेकिन आशंका के अनुरूप विनाशकारी स्तर तक स्थिति नहीं पहुंची। अगर फ्लैश फ्लड का पूरा दबाव एक साथ गंडक नदी की ओर बढ़ता, तो बिहार के कई निचले इलाकों में बाढ़ की गंभीर स्थिति बन सकती थी। इस तरह नारायणी नदी ने एक तरह से अतिरिक्त पानी को अपने बड़े जलक्षेत्र में फैलाकर बिहार की ओर बढ़ रहे जलदबाव को कम करने में अहम भूमिका निभाई।
बिहार और यूपी में राहत, लेकिन निगरानी जारी
नेपाल की फ्लैश फ्लड के बाद बिहार और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई थी। गंडक नदी के किनारे बसे संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन ने निगरानी तेज कर दी थी और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी भी की गई।
अब जलस्तर में गिरावट से राहत जरूर मिली है, लेकिन प्रशासन पूरी तरह निश्चिंत नहीं है। नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में मौसम की स्थिति और नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। नदी में दोबारा अचानक जलप्रवाह बढ़ने की स्थिति में प्रभावित जिलों को तुरंत सतर्क किया जा सकता है।
नेपाल की इस फ्लैश फ्लड ने एक बार फिर साबित कर दिया कि हिमालयी क्षेत्रों में होने वाली प्राकृतिक घटनाओं का असर सीमाओं तक सीमित नहीं रहता। नेपाल की पहाड़ियों में हुई एक घटना का असर कुछ ही घंटों में बिहार की नदियों तक पहुंच सकता है। फिलहाल गंडक का जलस्तर घटने से लोगों ने राहत की सांस ली है, लेकिन प्रशासन की नजर अब भी नेपाल से आने वाले पानी पर बनी हुई है।





