MLC Election Bihar : बिहार विधान परिषद की पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की लड़ाई जैसे-जैसे मतदान के करीब पहुंच रही है, वैसे-वैसे सियासी हलचल भी तेज होती जा रही है। एनडीए के उम्मीदवार नीरज कुमार के समर्थन में लगातार चुनावी कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। लेकिन इन कार्यक्रमों को लेकर अब एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने एनडीए के भीतर की सियासी रणनीति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि नीरज कुमार के चुनावी कार्यक्रम के पहले जारी किए गए पोस्टर और अब जारी की गई नई सूची में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। खास तौर पर दो बड़े नेताओं के नाम नई सूची से गायब हैं। इनमें केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान तथा केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का नाम शामिल है।

- यह पहले का पोस्टर जिसमें चिराग और गिरिराज का नाम शामिल
दरअसल, 15 अक्टूबर को बाढ़ अनुमंडल के अगवानपुर इलाके में नीरज कुमार के समर्थन में चुनावी सभा है। पहले जारी पोस्टर में इस कार्यक्रम में चिराग पासवान, गिरिराज सिंह और बिहार सरकार के मंत्री विजय कुमार सिन्हा समेत कई नेताओं की उपस्थिति प्रस्तावित बताई गई थी। कार्यक्रम का समय सुबह 11 बजे और स्थान अगवानपुर खेल मैदान बताया गया था।
इसके अलावा पटना के वीरचंद पटेल स्थित कर्पूरी सभागार में भी दोपहर 2 बजे नीरज कुमार के समर्थन में चुनावी सभा का कार्यक्रम रखा गया था। यानी पटना स्नातक सीट के लिए एनडीए ने बड़े नेताओं की मौजूदगी के जरिए माहौल बनाने की पूरी तैयारी दिखाई थी।

- यह नया पोस्टर जिसमें सिर्फ विजय सिन्हा का नाम शामिल लेकिन चिराग और गिरिराज गायब
लेकिन अब नीरज कुमार की ओर से एक नई तस्वीर जारी की गई है। इस नई सूची में एनडीए के कई प्रमुख नेताओं की मौजूदगी बताई गई है। इसमें प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा, बिहार सरकार के मंत्री विजय कुमार सिन्हा, दीपक प्रकाश, डॉ. अनिल कुमार, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष, सरकार के कई मंत्री, सांसद, विधायक, विधान परिषद सदस्य और एनडीए के घटक दलों के जिला अध्यक्षों समेत कई नेताओं के नाम शामिल हैं। लेकिन इस नई सूची में चिराग पासवान और गिरिराज सिंह का नाम नहीं है। सबसे अहम यह है कि इस लिस्ट में शामिल विजय सिन्हा के भी इस कार्यक्रम में शामिल होने पर संशय कायम है। इसकी वजह यह है कि विजय कुमार सिन्हा का कार्यक्रम 11 बजे राजधानी पटना में तय है ऐसे में उनका 11 बजे बाढ़ के कार्यक्रम में पहुंचना फिलहाल तय नहीं कहा जा रहा है। लेकिन यह उम्मीद जताई जा रही है की शायद वह पटना के कार्यक्रम में शामिल हो।
यही बदलाव अब राजनीतिक चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया है। सवाल उठ रहा है कि आखिर पहले दोनों केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी प्रस्तावित की गई थी तो बाद में उनका नाम सूची से क्यों हटा दिया गया? क्या कार्यक्रम में बदलाव हुआ है या फिर दोनों नेताओं की व्यस्तता के कारण उनकी मौजूदगी संभव नहीं है? या फिर इसके पीछे पटना स्नातक सीट की स्थानीय राजनीति का कोई और संदेश छिपा है?
खास बात यह है कि बाढ़ और आसपास के इलाके में भूमिहार वोटरों की राजनीतिक भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे में इलाके के प्रभावशाली भूमिहार नेताओं की सक्रियता चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकती है। यही वजह है कि नीरज कुमार की सभा से बड़े नेताओं की दूरी को लेकर राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग तरह की चर्चा शुरू हो गई है।
फिर भी पटना स्नातक सीट पर जिस तरह मुकाबला लगातार दिलचस्प होता जा रहा है, उसमें ऐसे छोटे-छोटे राजनीतिक संकेत भी मायने रखते हैं। खासकर तब, जब एनडीए ने सभी आठ विधान परिषद सीटों पर जीत का लक्ष्य रखा है और पटना स्नातक सीट पर नीरज कुमार के सामने मजबूत चुनौती मानी जा रही है।पटना स्नातक सीट पर फिलहाल मुकाबला सिर्फ उम्मीदवारों के बीच नहीं दिख रहा है। इसके साथ ही एनडीए के भीतर नेताओं की सक्रियता, स्थानीय समीकरण और अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच पकड़ भी चर्चा का विषय बन गई है।
यही वजह है कि पहले पोस्टर में चिराग पासवान और गिरिराज सिंह की प्रस्तावित मौजूदगी और बाद की सूची से दोनों नामों का गायब होना अब चुनावी मैदान में एक बड़ा सवाल बन गया है। क्या यह महज कार्यक्रम में बदलाव है या फिर पटना स्नातक सीट की सियासत में कोई बड़ा संकेत? इसका जवाब आने वाले दिनों में नेताओं की वास्तविक चुनावी सक्रियता से ही साफ होगा।





