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राजबल्लभ यादव के बेटे की मौत मामले में बड़ी कार्रवाई, नवादा के धर्मशीला देवी हॉस्पिटल को किया गया सील

नवादा के धर्मशीला देवी अस्पताल का रजिस्ट्रेशन रद्द करने के बाद उसे सील कर दिया गया। अखिलेश कुमार की मौत के मामले में इलाज में लापरवाही के आरोपों की जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई की।

बिहार न्यूज
लाइसेंस भी किया गया रद्द
© सोशल मीडिया
Jitendra Vidyarthi
4 मिनट

NAWADA:नवादा के केंदुआ स्थित धर्मशीला देवी हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन रद्द करने के बाद शुक्रवार को उसे सील कर दिया गया। यह कार्रवाई पूर्व मंत्री राजबल्लभ प्रसाद यादव और जेडीयू विधायक विभा देवी के बेटे अखिलेश कुमार की मौत के मामले में अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर लगाए गए इलाज में लापरवाही के आरोपों की जांच के बाद की गई है।


स्वास्थ्य विभाग की उच्चस्तरीय जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद अस्पताल का रजिस्ट्रेशन रद्द किया गया। इसके बाद जिला प्रशासन के आदेश पर अस्पताल को सील करने की कार्रवाई की गई।


डीएम के आदेश पर अस्पताल सील

नवादा डीएम रवि प्रकाश के आदेश और सिविल सर्जन डॉ. बिनोद कुमार चौधरी के निर्देश पर शुक्रवार को डॉक्टरों की टीम और मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में अस्पताल सील किया गया। नवादा सदर BDO सह मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में सदर अस्पताल की तीन सदस्यीय मेडिकल टीम ने कार्रवाई पूरी की। अस्पताल सील करने से पहले परिसर को पूरी तरह खाली कराया गया। टीम में डॉ. आफताब कलीम, डॉ. अमित कुमार और डॉ. नीतेश रवि शामिल थे। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी और प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे।


एक मरीज सदर अस्पताल शिफ्ट, बाकी घर लौटे

अस्पताल सील करने के दौरान वहां कई मरीज भर्ती थे। इनमें एक मरीज का शुक्रवार को ही ऑपरेशन हुआ था। प्रशासन ने मरीजों को सदर अस्पताल भेजने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था की। हालांकि, बताया गया कि केवल एक मरीज को ही एंबुलेंस से नवादा सदर अस्पताल ले जाया गया, जबकि अन्य मरीज अपने घर चले गए।


अखिलेश कुमार की मौत के बाद लगे थे लापरवाही के आरोप

मामला पूर्व मंत्री राजबल्लभ प्रसाद यादव और नवादा विधायक विभा देवी के छोटे बेटे अखिलेश कुमार की मौत से जुड़ा है। 19 मार्च को सड़क हादसे में घायल होने के बाद अखिलेश को धर्मशीला देवी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।परिजनों का आरोप था कि अस्पताल में करीब 7 घंटे तक इलाज के बाद अखिलेश को रेफर किया गया। इसके बाद उन्हें पटना के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। अखिलेश की मौत के बाद राजबल्लभ यादव ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी।


1 अप्रैल को दर्ज हुई थी FIR

राजबल्लभ यादव की शिकायत पर 1 अप्रैल 2026 को नवादा के मुफस्सिल थाना में कांड संख्या 119/26 दर्ज किया गया था। मामले में BNS की धारा 106(01) के तहत अस्पताल के मालिक, प्रबंधक और चिकित्सकों पर कथित लापरवाही के आरोप लगाए गए थे। शिकायत के बाद डीएम के निर्देश पर सदर अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने धर्मशीला देवी अस्पताल का निरीक्षण कर जांच की थी। इसके बाद सिविल सर्जन की अनुशंसा पर स्वास्थ्य विभाग को विस्तृत जांच के लिए लिखा गया।


स्वास्थ्य विभाग की उच्चस्तरीय टीम ने की जांच

स्वास्थ्य विभाग की उच्चस्तरीय जांच टीम 3 जून 2026 को नवादा पहुंची थी। जांच के दौरान दोनों पक्षों के लोग भी मौजूद रहे। पूर्व मंत्री ने स्वास्थ्य बीमा कंपनी से जुड़े मामले का हवाला देते हुए फर्जी मरीजों के नाम पर कथित तौर पर करोड़ों रुपये की अवैध निकासी की जांच की मांग भी की थी।


जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सही पाया। इसके बाद अस्पताल का निबंधन रद्द करने की कार्रवाई की गई। अस्पताल और संबंधित पक्षों को इसकी सूचना ईमेल के माध्यम से गुरुवार को ही दे दी गई थी। फिलहाल अस्पताल को सील कर दिया गया है और मामले में पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से आगे की कार्रवाई की जा रही है।

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