बेतिया के नवलपुर थाना परिसर में मंगलवार की रात हुए हंगामे के बाद पुलिस कार्रवाई का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में हाफ पैंट और टी-शर्ट पहने कुछ युवकों को दौड़ाकर डंडे से पीटते हुए एक पुलिस अधिकारी नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर इस अधिकारी की पहचान नवलपुर थानाध्यक्ष देवेंद्र कुमार के रूप में बताई जा रही है। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है। वीडियो सामने आने के बाद अब सवाल यह उठ रहा है कि कानून-व्यवस्था संभालने वाली पुलिस को आखिर युवकों पर इस तरह डंडा चलाने की नौबत क्यों आई?
मामला सिर्फ एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एक गिरफ्तार महिला को छुड़ाने के लिए थाना पहुंचे लोगों और पुलिस के बीच हुआ विवाद बताया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, हंगामा इतना बढ़ गया कि नौ लोगों को गिरफ्तार करना पड़ा। लेकिन वायरल वीडियो ने पूरे घटनाक्रम को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
महिला की गिरफ्तारी के बाद थाने पहुंची भीड़
बताया जा रहा है कि मंगलवार की रात नवलपुर थाना पुलिस ने एक युवती के अपहरण मामले में चनपटिया थाना क्षेत्र के कैथवलिया गांव से किरण देवी को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, किरण देवी इस मामले में अप्राथमिकी अभियुक्त है। गिरफ्तारी की जानकारी मिलने के बाद कुछ लोग उसे छुड़ाने के लिए नवलपुर थाना पहुंच गए। पुलिस के अनुसार, शुरुआत में दो लोग थाने पहुंचे और गिरफ्तार महिला के संबंध में उग्र होकर पूछताछ करने लगे। पुलिसकर्मियों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद देखते ही देखते करीब 15 से 20 लोगों का समूह थाना परिसर पहुंच गया। पुलिस का आरोप है कि भीड़ ने ओडी कक्ष में जबरन प्रवेश किया और पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की, गाली-गलौज और मारपीट की।
जब थाना ही बना अखाड़ा तो सवाल भी उठेंगे
हंगामा बढ़ने पर थाने में मौजूद अन्य पुलिसकर्मी भी मौके पर पहुंचे। पुलिस के अनुसार, लोगों को समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन भीड़ के उग्र होने के बाद स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी। इसके बाद आत्मरक्षार्थ साधारण बल का प्रयोग करते हुए मौके से नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया।
अब सवाल यह है कि अगर भीड़ पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट कर रही थी तो स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग की जरूरत क्यों पड़ी? और अगर बल प्रयोग जरूरी था, तो वायरल वीडियो में युवकों को दौड़ाकर डंडे से पीटने की तस्वीरें क्यों दिखाई दे रही हैं? क्या पुलिस की कार्रवाई तय नियमों के दायरे में थी? या फिर थाना परिसर में हालात बिगड़ने के बाद पुलिस का गुस्सा भीड़ पर भारी पड़ गया? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही साफ हो सकेगा।
वायरल वीडियो ने बढ़ाई चर्चा
इसी घटनाक्रम के बीच का बताया जा रहा वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है। वीडियो में थानाध्यक्ष जैसे दिख रहे एक अधिकारी कुछ युवकों को डंडे से पीटते नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर इसे लेकर पुलिस की कार्रवाई पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और यह भी स्पष्ट नहीं है कि वीडियो में दिखाई दे रहा पूरा घटनाक्रम किस क्रम में हुआ। ऐसे में सिर्फ वायरल वीडियो के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। लेकिन वीडियो ने पुलिस के तौर-तरीकों को लेकर बहस जरूर छेड़ दी है।
थानाध्यक्ष ने दी अपनी सफाई
वायरल वीडियो के संबंध में नवलपुर थानाध्यक्ष देवेंद्र कुमार ने बताया कि गिरफ्तार महिला को छुड़ाने के लिए पहुंचे उग्र लोगों के समूह में शामिल एक युवक पर आत्मरक्षार्थ साधारण बल का प्रयोग किया गया था। यानी पुलिस का दावा है कि कार्रवाई किसी व्यक्तिगत रंजिश या मनमानी के तहत नहीं, बल्कि उग्र भीड़ से निपटने और आत्मरक्षा के लिए की गई। दूसरी तरफ, वायरल वीडियो में दिख रहे दृश्य इस कार्रवाई की शैली पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
पांच जनवरी के अपहरण केस से जुड़ा है मामला
गौरतलब है कि नवलपुर थाना क्षेत्र के एक गांव से पांच जनवरी को शादी की नीयत से नाबालिग युवती के अपहरण का मामला सामने आया था। इसी मामले की जांच के क्रम में पुलिस ने मंगलवार को चनपटिया थाना क्षेत्र के कैथवलिया गांव से किरण देवी को गिरफ्तार किया था।
यही गिरफ्तारी बाद में थाने पर हंगामे की वजह बनी। पुलिस के अनुसार, महिला को छुड़ाने के लिए पहुंचे लोगों ने उग्र होकर पुलिस के काम में बाधा डाली और पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए नौ लोगों को गिरफ्तार कर लिया।लेकिन अब पूरा मामला दो हिस्सों में बंटता नजर आ रहा है—एक तरफ पुलिस का आरोप है कि भीड़ ने कानून हाथ में लिया, तो दूसरी तरफ वायरल वीडियो पुलिस की कार्रवाई के तरीके पर सवाल खड़े कर रहा है। आखिर कानून लागू कराने वाली पुलिस और कानून अपने हाथ में लेने वाली भीड़ के बीच फर्क कौन तय करेगा? क्या उग्र भीड़ पर कार्रवाई जरूरी थी, या कार्रवाई का तरीका भी जांच के दायरे में आना चाहिए? नवलपुर के वायरल वीडियो ने इन सवालों को फिर सामने ला दिया है। अब नजर इस बात पर है कि पूरे मामले की जांच में सच की तस्वीर क्या सामने आती है।





