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बिहार में अस्पताल बना रणक्षेत्र… इमरजेंसी गेट पर भड़का विवाद, गार्ड और परिजनों में जमकर चले लात-घूंसे

Bihar News: नालंदा जिले के सदर अस्पताल में मरीज के परिजनों और सुरक्षा गार्ड के बीच हुआ विवाद अचानक हिंसक झड़प में बदल गया। इमरजेंसी गेट पर करीब 10 मिनट तक मारपीट और अफरा-तफरी का माहौल बना रहा, जिससे अस्पताल की व्यवस्था...

बिहार में अस्पताल बना रणक्षेत्र… इमरजेंसी गेट पर भड़का विवाद, गार्ड और परिजनों में जमकर चले लात-घूंसे
Ramakant kumar
3 मिनट

Bihar News: बिहार के नालंदा जिले में स्थित सदर अस्पताल नालंदा सोमवार को अचानक रणक्षेत्र में तब्दील हो गया, जब इमरजेंसी गेट पर मरीज के परिजनों और सुरक्षा गार्ड के बीच शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। करीब 10 मिनट तक अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा और इस दौरान जमकर लात-घूंसे चले।


घटना के वक्त अस्पताल में मौजूद लोगों के मुताबिक, एक मरीज की हालत बेहद गंभीर थी। परिजन उसे जल्द से जल्द इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराना चाहते थे। इसी दौरान गेट पर तैनात सुरक्षा गार्ड ने उन्हें रोक दिया और अस्पताल के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि सीमित संख्या में ही लोगों को अंदर जाने की अनुमति है।


मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए परिजन बेचैन थे और तुरंत अंदर जाने की जिद पर अड़े रहे। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच पहले कहासुनी हुई, जो कुछ ही देर में तीखी बहस में बदल गई। माहौल इतना गरमाया कि देखते ही देखते धक्का-मुक्की शुरू हो गई और फिर मामला हाथापाई तक पहुंच गया।


प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गार्ड और परिजनों के बीच जमकर मारपीट हुई। दोनों तरफ से लात-घूंसे चलने लगे, जिससे वहां मौजूद अन्य मरीज और उनके परिजन दहशत में आ गए। कुछ लोग बीच-बचाव की कोशिश करते रहे, लेकिन स्थिति कुछ देर तक पूरी तरह बेकाबू रही।


इस दौरान अस्पताल परिसर में भारी भीड़ जमा हो गई, जिससे अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इमरजेंसी सेवाएं भी कुछ समय के लिए प्रभावित हुईं और आने-जाने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।


घटना की सूचना मिलते ही अस्पताल के अन्य सुरक्षा कर्मी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद दोनों पक्षों को अलग कराया गया और स्थिति को धीरे-धीरे नियंत्रित किया गया।


घटना के बाद मरीज के परिजनों में गहरा आक्रोश देखने को मिला। उनका आरोप है कि अस्पताल के सुरक्षा कर्मियों का व्यवहार अक्सर असंवेदनशील रहता है। परिजनों का कहना है कि लोग मजबूरी में अस्पताल आते हैं और ऐसे समय में उन्हें सहयोग और सहानुभूति की जरूरत होती है, लेकिन इसके बजाय उन्हें सख्ती और बदसलूकी का सामना करना पड़ता है।


वहीं, अस्पताल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। सिविल सर्जन डॉ. जयप्रकाश सिंह ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच की जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन के प्रतिनिधि मोहम्मद इमरान को सौंपी गई है।


प्रशासन का कहना है कि जांच के दौरान यह पता लगाया जाएगा कि आखिर विवाद की असली वजह क्या थी और किस पक्ष की गलती अधिक थी। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।