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Nalanda Bridge Collapse : 10 साल में सकरी नदी पर बना करोड़ों का पुल धंसा! नालंदा में अचानक बंद हुई लाइफलाइन, हजारों लोग परेशान

नालंदा के दरियापुर स्थित सकरी नदी पर बना 10 साल पुराना पुल जर्जर होकर धंस गया। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर पुल पर आवाजाही बंद कर दी है, जिससे हजारों लोग प्रभावित हैं।

Nalanda Bridge Collapse : 10 साल में सकरी नदी पर बना करोड़ों का पुल धंसा! नालंदा में अचानक बंद हुई लाइफलाइन, हजारों लोग परेशान
Tejpratap
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नालंदा जिले में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। बिहारशरीफ-कतरीसराय मुख्य मार्ग पर दरियापुर गांव के पास सकरी नदी पर बना पुल महज दस साल के भीतर ही खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। पुल के कई हिस्सों में दरारें आने और पीलरों के झुकने के बाद जिला प्रशासन ने एहतियातन इस पुल को पूरी तरह बंद कर दिया है। प्रशासन द्वारा पुल के दोनों ओर ईंट की मजबूत दीवार खड़ी कर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है, ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।


जानकारी के अनुसार, पुल के नीचे से मिट्टी का कटाव होने के कारण इसकी नींव कमजोर हो गई है। कई पायों में झुकाव देखा गया है, जबकि कैपिंग में लगे लोहे के सरिए बाहर निकल आए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से पुल की हालत लगातार खराब होती जा रही थी, लेकिन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि पुल कभी भी ध्वस्त हो सकता है।


इस पुल के बंद होने से नालंदा और शेखपुरा जिले के बीच आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। बिहारशरीफ से कतरीसराय, महलपर और छबीलापुर जाने वाले लोगों को अब लंबा वैकल्पिक रास्ता अपनाना पड़ रहा है। वहीं गिरियक से शेखपुरा और बरबीघा की ओर जाने वाले यात्रियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दोनों जिलों की सीमा से जुड़े दर्जनों गांवों के हजारों लोग इस पुल पर निर्भर थे, लेकिन अब उन्हें कई किलोमीटर अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है।


हाल ही में एनआईटी और बिहार राज्य पुल निर्माण निगम की संयुक्त तकनीकी टीम ने पुल का निरीक्षण किया था। जांच के दौरान टीम ने पाया कि पुल की संरचना काफी कमजोर हो चुकी है और यह आवागमन के लिए सुरक्षित नहीं है। तकनीकी रिपोर्ट में पुराने पुल को खतरनाक बताते हुए नए पुल के निर्माण की सिफारिश की गई है। इसी रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने तत्काल पुल को बंद करने का फैसला लिया।


ग्रामीणों में इस घटना को लेकर भारी नाराजगी है। स्थानीय निवासी राजीव पांडेय, धर्मेंद्र सिंह और विकास कुमार ने आरोप लगाया कि पुल निर्माण के समय गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई थी। उनका कहना है कि घटिया सामग्री और लापरवाही की वजह से इतनी कम अवधि में पुल जर्जर हो गया। लोगों ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो सके।


हालांकि प्रशासन ने पुल पर आवाजाही रोक दी है, लेकिन कई लोग अब भी जान जोखिम में डालकर मोटरसाइकिल से पुल पार करने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ युवक प्रशासन द्वारा बनाई गई ईंट की दीवार को पार कर पुल से गुजर रहे हैं, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर पुलिस बल की तैनाती की गई है और लोगों को लगातार सतर्क किया जा रहा है।


बिहारशरीफ के अनुमंडल पदाधिकारी क्रिसलय श्रीवास्तव ने बताया कि तकनीकी रिपोर्ट मिलने के बाद सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पुल पर तत्काल रोक लगाई गई है। उन्होंने कहा कि आम लोगों को हो रही परेशानी को प्रशासन गंभीरता से ले रहा है। लोगों की सुविधा के लिए अगले एक-दो दिनों में नदी के भीतर अस्थायी डायवर्सन तैयार किया जाएगा, ताकि छोटे वाहनों की आवाजाही फिर से शुरू हो सके। फिलहाल पुल बंद होने से पूरे इलाके में आवागमन और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ा है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही वैकल्पिक व्यवस्था के साथ नए पुल निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाएगा, ताकि लोगों को राहत मिल सके।