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NEET UG 2026: NEET Re-Exam से पहले बड़ा खुलासा! टेलीग्राम पर बिक रहा था फर्जी प्रश्नपत्र, 4 और आरोपी गिरफ्तार

NEET UG 2026 की दोबारा परीक्षा से पहले बिहार के मुजफ्फरपुर में फर्जी प्रश्नपत्र बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने 4 और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरोह टेलीग्राम के जरिए छात्रों को परीक्षा में सफलता का झांसा देकर ठगी कर रहा था।

NEET UG 2026: NEET Re-Exam से पहले बड़ा खुलासा! टेलीग्राम पर बिक रहा था फर्जी प्रश्नपत्र, 4 और आरोपी गिरफ्तार
Tejpratap
Tejpratap
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NEET UG 2026:  NEET UG 2026 परीक्षा पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है। इसी बीच सोशल मीडिया पर फर्जी प्रश्नपत्रों और नकली दस्तावेजों का कारोबार भी तेजी से बढ़ गया है। परीक्षा में सफलता का सपना दिखाकर छात्रों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक ऐसे ही गिरोह का बिहार के मुजफ्फरपुर में खुलासा हुआ है। मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया है।


मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) कांतिश कुमार मिश्रा ने बताया कि विशेष जांच दल (SIT) द्वारा की गई कार्रवाई में गिरफ्तार किए गए चारों आरोपी पहले से पकड़े गए मुख्य आरोपी मनीष यादव के सहयोगी हैं। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह संगठित तरीके से छात्रों को अपने जाल में फंसाता था और उन्हें असली NEET प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का झांसा देकर मोटी रकम वसूलता था।


पुलिस के अनुसार, गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम का व्यापक इस्तेमाल कर रहा था। विभिन्न चैनलों और ग्रुप्स के माध्यम से छात्रों तक पहुंच बनाई जाती थी। इन प्लेटफॉर्म्स पर दावा किया जाता था कि परीक्षा से पहले वास्तविक प्रश्नपत्र उपलब्ध करा दिया जाएगा। परीक्षा को लेकर तनाव और बेहतर परिणाम की उम्मीद में कई छात्र इन दावों पर भरोसा कर लेते थे। इसके बाद उनसे हजारों से लेकर लाखों रुपये तक की मांग की जाती थी और बदले में नकली प्रश्नपत्र या फर्जी दस्तावेज भेज दिए जाते थे।


इस पूरे मामले का पहला खुलासा मई महीने में हुआ था, जब पुलिस ने मुख्य आरोपी मनीष यादव को गिरफ्तार किया था। शुरुआती पूछताछ में ही संकेत मिल गए थे कि इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। इसके बाद एसआईटी ने तकनीकी जांच, मोबाइल डेटा, डिजिटल रिकॉर्ड और बैंक लेनदेन की पड़ताल शुरू की। जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर पुलिस अन्य आरोपियों तक पहुंचने में सफल रही।


जांच एजेंसियों का कहना है कि अब तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि आरोपियों के पास वास्तव में NEET परीक्षा का मूल प्रश्नपत्र था। पुलिस का मानना है कि पूरा नेटवर्क केवल छात्रों को गुमराह कर आर्थिक लाभ कमाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा था। आरोपी छात्रों और उनके अभिभावकों की चिंताओं का फायदा उठाकर उन्हें आसान सफलता का लालच देते थे।


पुलिस अधिकारियों ने अभ्यर्थियों और अभिभावकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे किसी भी प्रश्नपत्र, दस्तावेज या परीक्षा से जुड़ी संदिग्ध सामग्री पर भरोसा न करें। किसी भी तरह की जानकारी केवल राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और आधिकारिक स्रोतों से ही प्राप्त करें।


फिलहाल एसआईटी की जांच जारी है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि ठगी का यह नेटवर्क केवल बिहार तक सीमित था या देश के अन्य राज्यों के छात्र भी इसके शिकार बने हैं।


उल्लेखनीय है कि NEET UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने 21 जून को पुनः परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया है। परीक्षा की सुरक्षा को लेकर इस बार विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक प्रश्नपत्रों की सुरक्षित ढुलाई और वितरण के लिए कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए गए हैं ताकि किसी भी तरह की अनियमितता की संभावना को पूरी तरह खत्म किया जा सके।